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जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा पर TMC विधायक कुणाल घोष का BJP पर हमला, पुलिस निष्क्रियता पर उठाए सवाल

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जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा पर TMC विधायक कुणाल घोष का BJP पर हमला, पुलिस निष्क्रियता पर उठाए सवाल

सारांश

जादवपुर यूनिवर्सिटी में ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों की हिंसक झड़प में एक छात्र की मौत और TMC नेता बाबुल सुप्रियो पर हमले के बाद TMC विधायक कुणाल घोष ने BJP पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया और पुलिस की निष्क्रियता को 'जंगल राज' का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प में एक छात्र की मौत हुई।
TMC नेता बाबुल सुप्रियो पर भी इस झड़प के दौरान हमला किया गया।
TMC विधायक कुणाल घोष ने BJP पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया और पुलिस को BJP कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार न करने के लिए कटघरे में खड़ा किया।
घोष ने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय देश के शीर्ष-10 संस्थानों में शामिल है और यह घटना 'जंगल राज' की प्रतीक है।
घोष ने वंदे मातरम विवाद को इतिहासकारों का विषय बताया और राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने 20 अगस्त को जादवपुर यूनिवर्सिटी में हुई हिंसक झड़प के लिए सीधे भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि पुलिस ने BJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने इस घटना को 'जंगल राज' का प्रतीक बताया और कहा कि देश के शीर्ष-10 विश्वविद्यालयों में शामिल संस्थान में इस तरह की हिंसा अस्वीकार्य है।

मुख्य घटनाक्रम

जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) के कैंपस में गुरुवार की सुबह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर कैंपस में बाहरी लोगों को लाने का आरोप लगाया। इस झड़प में एक छात्र की मौत हुई और TMC नेता बाबुल सुप्रियो पर भी हमला किया गया।

कुणाल घोष के आरोप

घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि BJP के लोगों ने यूनिवर्सिटी में गुंडागर्दी की और पुलिस को उन्हें तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए था, परंतु ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ छात्रों का रवैया ठीक नहीं है और TMC ऐसे तत्वों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा, 'भाजपा के गुंडों को पुलिस का साथ मिला है' — यह आरोप राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है। घोष ने बाबुल सुप्रियो पर हुए हमले और छात्र की मौत दोनों की निंदा की।

वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस के दो पद वाले 'वंदे मातरम' प्रस्ताव पर घोष ने कहा कि यह मुद्दा इतिहासकारों के विचार का विषय है। उन्होंने 'जन गण मन' का उदाहरण देते हुए कहा, 'हम पूरा गीत नहीं गाते, केवल पहला पद गाते हैं — उसी तरह वंदे मातरम के मामले में भी अलग-अलग मत हैं।' उन्होंने इस प्रश्न का अंतिम उत्तर इतिहासकारों पर छोड़ा।

राजीव गांधी जयंती पर श्रद्धांजलि

TMC विधायक ने राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, 'अगर वे आज जीवित होते, तो पूरे देश और पश्चिम बंगाल की राजनीति, साथ ही समग्र दृष्टिकोण, अधिक सकारात्मक होता।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव चरम पर है।

आगे क्या

जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा की जाँच की माँग तेज हो रही है। छात्र की मौत और TMC नेता पर हमले के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। यह देखना होगा कि पुलिस किसी भी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी स्वतंत्र जाँच के बिना यह भी राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगा। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में छात्र संघ की राजनीति को हिंसा से मुक्त करने का कोई ठोस तंत्र किसी भी दल के पास नहीं है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जादवपुर यूनिवर्सिटी में क्या हुआ?
जादवपुर विश्वविद्यालय कैंपस में ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें एक छात्र की मौत हो गई और TMC नेता बाबुल सुप्रियो पर हमला किया गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर बाहरी लोगों को कैंपस में लाने का आरोप लगाया।
कुणाल घोष ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
TMC विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि BJP के लोगों ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में गुंडागर्दी की और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। उन्होंने कहा कि 'भाजपा के गुंडों को पुलिस का साथ मिला है' और इसे राज्य में जंगल राज का प्रतीक बताया।
इस हिंसा में TMC का क्या रुख है?
TMC ने झड़प और छात्र की मौत दोनों की निंदा की है। कुणाल घोष ने स्वीकार किया कि कुछ छात्रों का रवैया ठीक नहीं है और TMC ऐसे तत्वों का समर्थन नहीं करती, लेकिन मुख्य जिम्मेदारी BJP पर डाली।
वंदे मातरम विवाद पर कुणाल घोष का क्या कहना है?
घोष ने कांग्रेस के दो पद वाले वंदे मातरम प्रस्ताव पर कहा कि यह इतिहासकारों के विचार का विषय है। उन्होंने जन गण मन का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रगान भी पूरा नहीं गाया जाता, इसलिए इस पर इतिहासकार ही बेहतर राय दे सकते हैं।
जादवपुर यूनिवर्सिटी कितनी महत्वपूर्ण संस्था है?
जादवपुर विश्वविद्यालय भारत के शीर्ष-10 विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल है। यही कारण है कि वहाँ हुई हिंसा को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है और इसे उच्च शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक हिंसा के खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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