सौगत रॉय का सुवेंदु अधिकारी पर पलटवार: सीमा सुरक्षा, जादवपुर हिंसा और अग्निवीर पर TMC सांसद ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने 24 अगस्त को कोलकाता में कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई — सीमा सुरक्षा से लेकर जादवपुर विश्वविद्यालय की हिंसा और अग्निवीर योजना तक। उनका सबसे तीखा निशाना पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर था, जिन्होंने पिछली सरकार पर सीमा सुरक्षा में निष्क्रियता का आरोप लगाया था।
सीमा सुरक्षा पर सुवेंदु को जवाब
सुवेंदु अधिकारी के इस बयान पर कि पिछली सरकार ने सीमा सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया, रॉय ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'यह सही नहीं है। जो भी करने की जरूरत थी, पिछली सरकार ने पहले ही कर दिया था और सुवेंदु अधिकारी भी अब कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं। उनको कोई जरूरत नहीं है पुरानी सरकार को बोलने का, अभी तो यह उनकी ही जिम्मेदारी है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में सीमा प्रबंधन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
जादवपुर हिंसा: जांच समिति प्रमुख के इस्तीफे पर चिंता
जादवपुर विश्वविद्यालय में हाल ही में वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएँ हुई थीं। यह विवाद एक जनरल बॉडी मीटिंग को लेकर भड़का था, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर बाहरी लोगों को बुलाकर हमला करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं की जांच के लिए गठित समिति के प्रमुख प्रो. शुभा शंकर सरकार ने विवादों के बीच पद संभालने से इनकार करते हुए इस्तीफा दे दिया।
सौगत रॉय ने इस पर कहा कि विश्वविद्यालय में जो घटना हुई है, उस पर काफी सवाल हैं और इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि जांच समिति प्रमुख का इस्तीफा इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच पर और सवाल खड़े करता है।
अग्निवीर योजना पर आपत्ति
सुवेंदु अधिकारी के इस बयान पर कि पुलिस में अग्निवीर के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित हैं, TMC सांसद ने सतर्क रुख अपनाया। रॉय ने कहा कि अग्निवीर योजना की शुरुआत से ही लोगों में इसे लेकर आपत्ति रही है, क्योंकि वे सेना में स्थायी नौकरी चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अग्निवीर परियोजना कितनी सफल रही, यह अभी स्पष्ट नहीं है — इसलिए इसे पुलिस में लागू करने पर कुछ कहना मुश्किल है।
राजनीतिक संदर्भ
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से TMC और नई सरकार के बीच हर प्रमुख नीतिगत मुद्दे पर टकराव जारी है। सौगत रॉय की यह प्रतिक्रिया उसी व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है। आलोचकों का कहना है कि जादवपुर जैसी घटनाएँ तब और संवेदनशील हो जाती हैं जब जांच तंत्र ही विवादों में घिर जाए।
आगे क्या
जादवपुर विश्वविद्यालय हिंसा की जांच का भविष्य अब अनिश्चित है, क्योंकि समिति प्रमुख ने पद छोड़ दिया है। अग्निवीर को पुलिस भर्ती में शामिल करने के प्रस्ताव पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहने की संभावना है। सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।