गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर पाबंदी हटी, डीजीएफटी की अधिसूचना जारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को गेहूं से बने प्रमुख उत्पादों — गेहूं का आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेहूं का आटा — को प्रतिबंधित निर्यात श्रेणी से हटाकर मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब इन उत्पादों का निर्यात बिना किसी सरकारी अनुमति के किया जा सकेगा।
प्रतिबंध का इतिहास
यह निर्णय उस नीति को पलटता है जो रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक खाद्य आपूर्ति में व्यवधान के दौरान लागू की गई थी। 13 मई 2022 को सरकार ने गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में बदला था। उसी वर्ष अगस्त 2022 में गेहूं के आटे पर भी प्रतिबंध लागू हो गया। सरकार ने तब कहा था कि देश की 1.4 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा और घरेलू कीमतों पर नियंत्रण के लिए यह कदम अनिवार्य था।
स्थिति में बदलाव क्यों आया
गौरतलब है कि इस साल फरवरी में ही सरकार ने बेहतर स्टॉक उपलब्धता का हवाला देते हुए 25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं और अतिरिक्त 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। यह ताज़ा अधिसूचना उसी दिशा में अगला कदम है।
आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 में 5.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 35.7732 करोड़ टन था। विशेष रूप से गेहूं का उत्पादन इस वर्ष 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है — पिछले वर्ष के 11.7945 करोड़ टन की तुलना में 27.12 लाख टन अधिक।
निर्यात पर असर
प्रतिबंध के दौरान भी सरकार ने गेहूं से बने कुछ विशेष प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात की छूट दी थी। अब पूर्ण उदारीकरण के बाद भारतीय निर्यातक वैश्विक बाज़ार में आटा, मैदा और सूजी की आपूर्ति बिना किसी प्रशासनिक बाधा के कर सकेंगे।
आम जनता और किसानों पर असर
निर्यात प्रतिबंध हटने से गेहूं और उससे बने उत्पादों की घरेलू माँग व आपूर्ति के बीच संतुलन पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड उत्पादन के बाद निर्यात खुलने से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है, हालाँकि यह घरेलू कीमतों पर दबाव बनाने की क्षमता भी रखता है।
आगे क्या
डीजीएफटी की यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू मानी जा रही है। सरकार की ओर से भविष्य में गेहूं के दाने (raw wheat) पर लगे प्रतिबंध की समीक्षा को लेकर कोई आधिकारिक संकेत अभी तक नहीं दिया गया है।