24 अगस्त 2026
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गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर पाबंदी हटी, डीजीएफटी की अधिसूचना जारी

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गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर पाबंदी हटी, डीजीएफटी की अधिसूचना जारी

सारांश

चार साल बाद केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया। रिकॉर्ड 12.06 करोड़ टन गेहूं उत्पादन के बाद यह फैसला संकेत देता है कि घरेलू खाद्य सुरक्षा की चिंता अब पीछे हट रही है और निर्यात के दरवाज़े फिर खुल रहे हैं।

मुख्य बातें

डीजीएफटी ने 24 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर गेहूं के आटे, मैदा, सूजी, होलमील आटे और मिश्रित गेहूं के आटे को मुक्त निर्यात श्रेणी में डाला।
मूल प्रतिबंध मई-अगस्त 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद घरेलू खाद्य सुरक्षा के लिए लगाया गया था।
इस वर्ष फरवरी में ही सरकार 25 एलएमटी गेहूं और 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे चुकी थी।
भारत का गेहूं उत्पादन 2025-26 में रिकॉर्ड 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान — पिछले वर्ष से 27.12 लाख टन अधिक।
कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.3% बढ़कर 37.6563 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।

केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को गेहूं से बने प्रमुख उत्पादों — गेहूं का आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेहूं का आटा — को प्रतिबंधित निर्यात श्रेणी से हटाकर मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा सोमवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब इन उत्पादों का निर्यात बिना किसी सरकारी अनुमति के किया जा सकेगा।

प्रतिबंध का इतिहास

यह निर्णय उस नीति को पलटता है जो रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक खाद्य आपूर्ति में व्यवधान के दौरान लागू की गई थी। 13 मई 2022 को सरकार ने गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में बदला था। उसी वर्ष अगस्त 2022 में गेहूं के आटे पर भी प्रतिबंध लागू हो गया। सरकार ने तब कहा था कि देश की 1.4 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा और घरेलू कीमतों पर नियंत्रण के लिए यह कदम अनिवार्य था।

स्थिति में बदलाव क्यों आया

गौरतलब है कि इस साल फरवरी में ही सरकार ने बेहतर स्टॉक उपलब्धता का हवाला देते हुए 25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं और अतिरिक्त 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। यह ताज़ा अधिसूचना उसी दिशा में अगला कदम है।

आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2025-26 में 5.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 35.7732 करोड़ टन था। विशेष रूप से गेहूं का उत्पादन इस वर्ष 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है — पिछले वर्ष के 11.7945 करोड़ टन की तुलना में 27.12 लाख टन अधिक।

निर्यात पर असर

प्रतिबंध के दौरान भी सरकार ने गेहूं से बने कुछ विशेष प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात की छूट दी थी। अब पूर्ण उदारीकरण के बाद भारतीय निर्यातक वैश्विक बाज़ार में आटा, मैदा और सूजी की आपूर्ति बिना किसी प्रशासनिक बाधा के कर सकेंगे।

आम जनता और किसानों पर असर

निर्यात प्रतिबंध हटने से गेहूं और उससे बने उत्पादों की घरेलू माँग व आपूर्ति के बीच संतुलन पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड उत्पादन के बाद निर्यात खुलने से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है, हालाँकि यह घरेलू कीमतों पर दबाव बनाने की क्षमता भी रखता है।

आगे क्या

डीजीएफटी की यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू मानी जा रही है। सरकार की ओर से भविष्य में गेहूं के दाने (raw wheat) पर लगे प्रतिबंध की समीक्षा को लेकर कोई आधिकारिक संकेत अभी तक नहीं दिया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब वैश्विक गेहूं संकट और घरेलू महंगाई दोनों वास्तविक चिंताएँ थीं — और उस निर्णय का बचाव किया जा सकता था। लेकिन रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद प्रतिबंध को इतने वर्षों तक बनाए रखना भारतीय किसानों को वैश्विक बाज़ार की बेहतर कीमतों से वंचित करता रहा। असली सवाल यह है कि क्या सरकार के पास अब भी कोई स्पष्ट नीति-ढाँचा है जो यह तय करे कि निर्यात कब खोलना है और कब बंद — या यह फैसले प्रतिक्रियात्मक रहेंगे। कच्चे गेहूं पर प्रतिबंध अभी भी बरकरार है, जो नीतिगत असंगति को उजागर करता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गेहूं के आटे और मैदा के निर्यात पर से प्रतिबंध कब हटाया गया?
केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को डीजीएफटी अधिसूचना के ज़रिए गेहूं के आटे, मैदा, सूजी और संबंधित उत्पादों को प्रतिबंधित श्रेणी से मुक्त श्रेणी में स्थानांतरित किया। यह प्रतिबंध 2022 से लागू था।
2022 में गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया था?
रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक गेहूं आपूर्ति में व्यवधान के बाद भारतीय गेहूं की विदेशी माँग बढ़ गई थी, जिससे घरेलू कीमतों पर दबाव आया। सरकार ने 1.4 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 13 मई 2022 को गेहूं और बाद में अगस्त 2022 में आटे के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी।
भारत में गेहूं का उत्पादन 2025-26 में कितना रहा?
आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में भारत का गेहूं उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 11.7945 करोड़ टन से 27.12 लाख टन अधिक है। कुल खाद्यान्न उत्पादन भी 5.3% बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन पर पहुँचा।
क्या अब कच्चे गेहूं का निर्यात भी खुल गया है?
नहीं। डीजीएफटी की ताज़ा अधिसूचना केवल गेहूं से बने प्रसंस्कृत उत्पादों — आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेहूं का आटा — पर लागू है। कच्चे गेहूं (raw wheat) के निर्यात पर प्रतिबंध की स्थिति को लेकर सरकार ने अभी कोई अलग अधिसूचना जारी नहीं की है।
इस फैसले से किसानों और उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
रिकॉर्ड उत्पादन के बाद निर्यात खुलने से गेहूं किसानों को वैश्विक बाज़ार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को घरेलू कीमतों पर संभावित दबाव पर नज़र रखनी होगी, ताकि उपभोक्ताओं पर महंगाई का असर न पड़े।
राष्ट्र प्रेस
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