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जादवपुर यूनिवर्सिटी के पास ABVP रैली से पहले कोलकाता पुलिस अलर्ट, SFI से झड़प के बाद तनाव

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जादवपुर यूनिवर्सिटी के पास ABVP रैली से पहले कोलकाता पुलिस अलर्ट, SFI से झड़प के बाद तनाव

सारांश

जादवपुर यूनिवर्सिटी के पास ABVP की रैली और SFI से हालिया झड़पें — यह टकराव महज छात्र विवाद नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में दशकों पुरानी वामपंथी छात्र राजनीति और राष्ट्रीय संगठनों के बीच बढ़ते संघर्ष की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

ABVP ने 24 अगस्त, सोमवार को जादवपुर यूनिवर्सिटी के निकट 'राष्ट्र-विरोधी वामपंथी गतिविधियों' के खिलाफ रैली निकाली।
रैली ढाकुरिया क्रॉसिंग से जादवपुर 8बी बस स्टैंड तक थी; ABVP ने कैंपस में प्रवेश न करने का आश्वासन दिया।
पिछले सप्ताह ABVP और SFI के बीच दो बार हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें दोनों पक्षों के कई छात्र घायल हुए।
जांच समिति के प्रमुख शुभा शंकर सरकार ने ईमेल भेजकर अध्यक्षता से इनकार किया, जिससे समिति के भविष्य पर संकट।
विश्वविद्यालय प्रशासन के पास नए अध्यक्ष की नियुक्ति या पूर्णतः नई समिति गठित करने के दो विकल्प।
2011 से 2026 तक TMC सरकार के 15 वर्षों में भी जादवपुर यूनिवर्सिटी में वामपंथी छात्र संगठनों का वर्चस्व बना रहा।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कोलकाता में जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर के निकट 24 अगस्त, सोमवार को एक रैली आयोजित की, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालय में कथित 'राष्ट्र-विरोधी वामपंथी गतिविधियों' पर अंकुश लगाने की मांग करना था। रैली से पहले ही कोलकाता पुलिस ने व्यापक एहतियाती सुरक्षा प्रबंध कर लिए थे, क्योंकि पिछले सप्ताह ABVP और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ताओं के बीच दो बार हिंसक झड़पें हो चुकी थीं, जिनमें दोनों पक्षों के कई छात्र घायल हुए थे।

रैली का मार्ग और पुलिस की तैयारी

ABVP की यह रैली दक्षिण कोलकाता के ढाकुरिया क्रॉसिंग से शुरू होकर जादवपुर 8बी बस स्टैंड पर समाप्त हुई। रैली का मार्ग जादवपुर यूनिवर्सिटी के कैंपस के बगल से गुज़रता था। ABVP नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह पूर्णतः शांतिपूर्ण मार्च था और संगठन का कैंपस परिसर में प्रवेश करने का कोई इरादा नहीं था। इसके बावजूद, कोलकाता पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए।

पिछले हफ्ते की झड़पें और जांच समिति का संकट

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ABVP और SFI कार्यकर्ताओं के बीच दो अलग-अलग मौकों पर हुई झड़पों के बाद जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति के अध्यक्ष के रूप में नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति शुभा शंकर सरकार को नियुक्त किया गया था। हालांकि, सरकार ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ईमेल भेजकर यह जांच समिति की अध्यक्षता करने में अपनी अनिच्छा व्यक्त कर दी, जिससे समिति के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए।

समिति के अन्य दो सदस्यों में बाबासाहेब अंबेडकर एजुकेशन यूनिवर्सिटी के कुलपति अरुणाशीष गोस्वामी और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (IQAC) के निदेशक सौमेंदु चट्टोपाध्याय शामिल थे। यह भी बताया गया कि सोमवार को ही जांच समिति के भविष्य को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन कोई घोषणा कर सकता है।

प्रशासन के सामने दो विकल्प

विश्वविद्यालय प्रशासन के पास फिलहाल दो रास्ते हैं — पहला, शुभा शंकर सरकार की जगह किसी नए अध्यक्ष को नियुक्त किया जाए; दूसरा, पूरी तरह नए सदस्यों के साथ एक नई जांच समिति का गठन किया जाए। प्रशासन किस विकल्प को चुनता है, यह आने वाले घंटों में स्पष्ट होने की संभावना है।

जादवपुर यूनिवर्सिटी: वामपंथी छात्र राजनीति का ऐतिहासिक गढ़

यह ऐसे समय में आया है जब जादवपुर यूनिवर्सिटी दशकों से वामपंथी छात्र संगठनों का मजबूत केंद्र रही है — ठीक वैसे ही जैसे नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU)। उल्लेखनीय है कि 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के 15 वर्षों के दौरान भी इस विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों पर TMC अपना प्रभाव स्थापित करने में नाकाम रही। इस पृष्ठभूमि में ABVP की इस रैली को एक बड़े राजनीतिक संघर्ष की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या

जांच समिति के पुनर्गठन पर विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय और पुलिस की तैनाती के बाद स्थिति की निगरानी जारी है। छात्र संगठनों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए कोलकाता पुलिस सतर्क बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे ABVP अब सीधे चुनौती दे रही है — और यह रैली उसी रणनीति का हिस्सा है। जांच समिति के प्रमुख का इस्तीफा यह भी संकेत देता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस राजनीतिक दबाव के बीच तटस्थ रहना कठिन पा रहा है। बिना निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के, यह विवाद और गहरा होने का जोखिम रखता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जादवपुर यूनिवर्सिटी के पास ABVP की रैली क्यों निकाली गई?
ABVP ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में कथित 'राष्ट्र-विरोधी वामपंथी गतिविधियों' को समाप्त करने की मांग को लेकर 24 अगस्त को यह रैली आयोजित की। रैली ढाकुरिया क्रॉसिंग से जादवपुर 8बी बस स्टैंड तक निकाली गई और संगठन ने कैंपस में प्रवेश न करने का आश्वासन दिया था।
ABVP और SFI के बीच झड़पें कब और कैसे हुईं?
पिछले सप्ताह जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर के आसपास ABVP और CPI(M) के छात्र संगठन SFI के कार्यकर्ताओं के बीच दो अलग-अलग मौकों पर हिंसक झड़पें हुईं। इन झड़पों में दोनों पक्षों के कई छात्र घायल हो गए थे।
जादवपुर यूनिवर्सिटी की जांच समिति पर संकट क्यों आया?
झड़पों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति के अध्यक्ष और नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति शुभा शंकर सरकार ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ईमेल भेजकर इस पद पर बने रहने में अपनी अनिच्छा जताई। इससे पूरी समिति के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हो गई।
जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास अब क्या विकल्प हैं?
प्रशासन के सामने दो रास्ते हैं — पहला, शुभा शंकर सरकार की जगह किसी नए अध्यक्ष को नियुक्त कर मौजूदा समिति को बनाए रखा जाए; दूसरा, पूर्णतः नए सदस्यों के साथ एक नई जांच समिति का गठन किया जाए।
जादवपुर यूनिवर्सिटी में वामपंथी छात्र संगठनों का इतिहास क्या है?
जादवपुर यूनिवर्सिटी दशकों से वामपंथी छात्र संगठनों का मजबूत केंद्र रही है, ठीक JNU की तरह। उल्लेखनीय है कि 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल में TMC सरकार के 15 वर्षों के दौरान भी तृणमूल कांग्रेस इस विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों पर अपना प्रभाव स्थापित नहीं कर सकी।
राष्ट्र प्रेस
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