20 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जादवपुर विश्वविद्यालय के बाहर एसएफआई-एबीवीपी झड़प, नंदलाल बोस का ऐतिहासिक प्रतीक चिन्ह क्षतिग्रस्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जादवपुर विश्वविद्यालय के बाहर एसएफआई-एबीवीपी झड़प, नंदलाल बोस का ऐतिहासिक प्रतीक चिन्ह क्षतिग्रस्त

सारांश

जादवपुर विश्वविद्यालय एक बार फिर छात्र राजनीति की हिंसा की चपेट में है। एसएफआई और एबीवीपी की आमने-सामने की भिड़ंत में नंदलाल बोस द्वारा डिज़ाइन किया गया विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक प्रतीक चिन्ह क्षतिग्रस्त हो गया, और पुलिस ने एकतरफा एफआईआर में 11 एसएफआई कार्यकर्ताओं को नामज़द किया है।

मुख्य बातें

20 अगस्त 2026 को जादवपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर एसएफआई और एबीवीपी के बीच दो अलग-अलग झड़पें हुईं।
प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस द्वारा डिज़ाइन किया गया विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक उत्कीर्ण प्रतीक चिन्ह कथित तौर पर क्षतिग्रस्त हुआ।
जादवपुर पुलिस ने बुधवार रात की झड़प के लिए बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की — सभी एसएफआई या वामपंथी संगठनों से जुड़े।
कोलकाता पुलिस और सीएपीएफ की संयुक्त तैनाती के बावजूद दोनों समूहों ने बैरिकेड तोड़े।
एसएफआई महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने एबीवीपी को लोकतांत्रिक चुनाव के ज़रिए ताकत दिखाने की चुनौती दी।

जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू), कोलकाता के मुख्य द्वार के बाहर 20 अगस्त 2026 को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं के बीच ताज़ा हिंसक झड़पें हुईं। एक रात पहले परिसर के भीतर हुई इसी तरह की झड़प में कई छात्र घायल हो चुके थे, और अब यह विवाद सड़कों पर आ गया।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात परिसर में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए दोनों छात्र संगठनों ने अलग-अलग विरोध रैलियाँ निकालीं। एसएफआई की रैली 8बी बस स्टैंड क्रॉसिंग से और एबीवीपी की रैली गोलपार्क क्रॉसिंग से शुरू हुई।

कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की संयुक्त टुकड़ी ने बैरिकेड लगाकर एसएफआई की रैली को शुरुआती बिंदु पर ही रोक दिया, जबकि एबीवीपी की रैली को जादवपुर पुलिस स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति मिली — हालाँकि वहाँ भी बैरिकेड लगाए गए।

तनाव तब चरम पर पहुँचा जब एबीवीपी कार्यकर्ताओं के एक समूह ने बैरिकेड तोड़कर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसकी सूचना मिलते ही 8बी क्रॉसिंग पर रुके एसएफआई कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस घेरा तोड़ने का प्रयास किया, जिनमें से कुछ सफल भी रहे।

दो अलग-अलग झड़पें

इसके बाद दो मोर्चों पर हिंसा भड़की। पहली झड़प 8बी बस स्टैंड क्रॉसिंग पर एसएफआई कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई। दूसरी और अधिक गंभीर झड़प जेयू के मुख्य द्वार के सामने एसएफआई और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई।

इसी दूसरी झड़प के दौरान प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस द्वारा डिज़ाइन किया गया जादवपुर विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक उत्कीर्ण प्रतीक चिन्ह कथित तौर पर क्षतिग्रस्त हो गया — एक घटना जिसने शैक्षणिक और सांस्कृतिक हलकों में गहरी नाराज़गी पैदा की है।

पुलिस कार्रवाई और एफआईआर

जादवपुर पुलिस ने बुधवार रात परिसर के भीतर हुई झड़प के सिलसिले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पुलिस के अनुसार सभी 11 आरोपी एसएफआई या अन्य वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े हैं। गौरतलब है कि अभी तक एबीवीपी से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, जिस पर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं।

दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप

एसएफआई ने एबीवीपी पर बाहरी तत्वों को परिसर में लाकर छात्रों पर हमला करवाने का आरोप लगाया है। एसएफआई के महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने एबीवीपी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे छात्र संघ पर नियंत्रण चाहते हैं, तो हिंसा की बजाय लोकतांत्रिक चुनावों के ज़रिए अपनी ताकत दिखाएँ।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में छात्र राजनीति पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुज़र रही है, और जादवपुर विश्वविद्यालय — जो अपनी वामपंथी छात्र राजनीति की परंपरा के लिए जाना जाता है — अब एक नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया है।

आगे क्या

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। सुरक्षा बल परिसर के बाहर तैनात हैं। नंदलाल बोस के प्रतीक चिन्ह को हुई क्षति की जाँच और मरम्मत को लेकर माँगें उठ रही हैं। स्थिति पर नज़र बनाए रखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ एबीवीपी दशकों पुरानी वामपंथी पकड़ को चुनौती दे रही है। सवाल यह है कि पुलिस ने एफआईआर में केवल एसएफआई कार्यकर्ताओं को क्यों नामज़द किया, जबकि एबीवीपी ने भी बैरिकेड तोड़े — यह चयनात्मक कार्रवाई राज्य की तटस्थता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है। नंदलाल बोस के प्रतीक चिन्ह को नुकसान पहुँचना महज़ संपत्ति क्षति नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक पर हमला है जो इस संघर्ष की गहराई को दर्शाता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जादवपुर विश्वविद्यालय में एसएफआई और एबीवीपी के बीच झड़प क्यों हुई?
बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात परिसर के भीतर हुई हिंसा की निंदा करने के लिए दोनों संगठनों ने अलग-अलग विरोध रैलियाँ निकालीं, जो बाद में आपस में टकरा गईं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगाया है।
नंदलाल बोस का प्रतीक चिन्ह कौन सा है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह जादवपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर उत्कीर्ण वह प्रतीक चिन्ह है जिसे प्रसिद्ध बंगाली चित्रकार नंदलाल बोस ने डिज़ाइन किया था। यह विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसके क्षतिग्रस्त होने पर व्यापक नाराज़गी है।
पुलिस ने किसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की?
जादवपुर पुलिस ने बुधवार रात परिसर के भीतर हुई झड़प के सिलसिले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पुलिस के अनुसार सभी 11 आरोपी एसएफआई या अन्य वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े हैं।
एसएफआई ने एबीवीपी पर क्या आरोप लगाया?
एसएफआई ने आरोप लगाया कि एबीवीपी ने बाहरी लोगों को परिसर में लाकर छात्रों पर हमला करवाया। एसएफआई महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने एबीवीपी को हिंसा छोड़कर लोकतांत्रिक छात्र संघ चुनावों के ज़रिए अपनी ताकत साबित करने की चुनौती दी।
इस घटना के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय में सुरक्षा की क्या स्थिति है?
कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की संयुक्त टुकड़ी परिसर के बाहर तैनात है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 8 घंटे पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले