क्या जेएनयू में तोड़फोड़ करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है?

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क्या जेएनयू में तोड़फोड़ करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है?

सारांश

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जेएनयू में अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिषद का कहना है कि प्रशासन का रवैया पक्षपाती है, और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। इस मामले में वे उठाए गए जुर्माने की वापसी की मांग कर रहे हैं।

Key Takeaways

  • जेएनयू में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर चयनात्मक कार्रवाई
  • राष्ट्रवादी विचारधारा के छात्रों के खिलाफ असमान व्यवहार
  • वामपंथी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की कमी
  • 4.64 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है
  • बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाना जरूरी है

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही चयनात्मक कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रसंघ की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। परिषद का कहना है कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े छात्रों के साथ असमान व्यवहार किया जा रहा है।

हाल ही में अभाविप के कार्यकर्ताओं पर प्रति छात्र 19,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जो कुल मिलाकर लगभग 1.5 लाख रुपए तक पहुंचता है। परिषद के अनुसार, इस प्रकार की कार्रवाई छात्रों की वैचारिक अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने वाली है।

अभाविप ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि पुस्तकालय और डीन ऑफ स्टूडेंट्स कार्यालय में हुई तोड़फोड़ जैसी घटनाओं में शामिल वामपंथी संगठनों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जबकि दूसरी ओर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई की गई।

परिषद के अनुसार, फरवरी 2022 से जनवरी 2026 के बीच अभाविप कार्यकर्ताओं पर कुल लगभग 4.64 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है तथा 8 से 10 छात्रों को निष्कासित कर उनकी डिग्रियां रोकी गई हैं, जिससे कई मेधावी छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हुआ है।

एबीवीपी जेएनयू इकाई अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि जेएनयू परिसर में कुछ संगठनों को बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने की सुविधा दी जाती है, जबकि राष्ट्रवादी विषयों से जुड़े कार्यक्रमों को प्रशासन द्वारा रद्द कर दिया जाता है। पुस्तकालय और डीन कार्यालय में तोड़फोड़ करने वालों पर कार्रवाई नहीं होना और बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाने वाले अभाविप कार्यकर्ताओं का पंजीकरण रोकना प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने कहा कि परिसर में अनुशासन भंग करने वाले तत्वों के मामलों में प्रशासन का रवैया अलग दिखाई देता है, जबकि ‘वंदे मातरम’ जैसे नारों के साथ अपनी बात रखने वाले छात्रों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। जेएनयू छात्रसंघ की चुप्पी भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रश्नचिह्न लगाती है। एबीवीपी मांग करती है कि कार्यकर्ताओं पर लगाए गए जुर्माने तत्काल वापस लिए जाएं, अन्यथा संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।

Point of View

यह महत्वपूर्ण है कि हम विश्वविद्यालयों में विचारों की स्वतंत्रता और समानता के अधिकार की रक्षा करें। सभी छात्रों को समान व्यवहार का हक है, और कोई भी पक्षपात इस लोकतंत्र के लिए खतरा है।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

एबीवीपी ने किस मुद्दे पर प्रशासन से सवाल उठाए हैं?
एबीवीपी ने जेएनयू में अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही चयनात्मक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
जेएनयू में क्यों जुर्माना लगाया गया है?
अभाविप के कार्यकर्ताओं पर प्रति छात्र 19,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
क्या प्रशासन ने वामपंथी संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है?
नहीं, प्रशासन ने वामपंथी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
एबीवीपी की क्या मांग है?
एबीवीपी ने कार्यकर्ताओं पर लगाए गए जुर्माने की वापसी की मांग की है।
क्या यह मामला प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है?
हाँ, यह मामले प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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