क्या एस जयशंकर ने फ्रांस और लक्जमबर्ग दौरे पर भारत और यूरोप के बीच आपसी हितों पर जोर दिया?

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क्या एस जयशंकर ने फ्रांस और लक्जमबर्ग दौरे पर भारत और यूरोप के बीच आपसी हितों पर जोर दिया?

सारांश

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में फ्रांस और लक्जमबर्ग का दौरा किया, जहाँ उन्होंने दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण चर्चाएँ हुईं, जो भारत और यूरोप के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सहायक साबित होंगी।

Key Takeaways

  • भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति।
  • लक्जमबर्ग के साथ आर्थिक और राजनीतिक सहयोग की समीक्षा।
  • नवाचार और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम।
  • ग्लोबल और क्षेत्रीय विकास पर विचारों का आदान-प्रदान।
  • भारतीय समुदाय के योगदान की मान्यता।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 4 से 9 जनवरी 2026 तक फ्रांस और लक्जमबर्ग की यात्रा पर थे। यह इस वर्ष का उनका पहला विदेश दौरा था।

विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस यात्रा के दौरान ईएएम जयशंकर ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की। उन्होंने फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री जीन नोएल बैरोट के साथ विशेष क्षेत्रों में आपसी संबंधों में प्रगति और आगामी उच्च स्तरीय राजनीतिक कार्यक्रमों पर द्विपक्षीय चर्चा की।

भारत-फ्रांस नवाचार के वर्ष के संदर्भ में, उन्होंने नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप्स, स्वास्थ्य, शिक्षा और मोबिलिटी के क्षेत्र में संबंधों को और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, नागरिक परमाणु और समुद्री सुरक्षा, और आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के बारे में भी विचार साझा किए।

दोनों देशों के समकक्षों के बीच वैश्विक और क्षेत्रीय विकास पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। एस. जयशंकर ने फ्रांस के राजदूतों की 31वीं कॉन्फ्रेंस में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में संबोधित किया, जिसमें उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिवर्तनों पर जोर दिया और स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी के महत्व को रेखांकित किया।

यह ध्यान देने योग्य है कि एस. जयशंकर इस कॉन्फ्रेंस में गेस्ट ऑफ ऑनर बनने वाले पहले गैर-यूरोपीय विदेश मंत्री हैं।

इस दौरान उन्होंने पहली इंडिया-वाइमर विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया, जिसमें फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के विदेश मंत्री शामिल थे। बैठक के दौरान ईएएम जयशंकर ने भारत-यूरोप और भारत-ईयू संबंधों को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके साथ ही, भारत के विदेश मंत्री ने भारत-फ्रांस मैत्री समूहों और संसदीय रक्षा एवं विदेश मामलों की समिति के सदस्यों के साथ फ्रांसीसी सांसदों से भी बातचीत की।

उन्होंने इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के कार्यकारी निदेशक मिस्टर फतिह बिरोल और यूनेस्को के महासचिव मिस्टर खालिद अल-एनानी से भी मुलाकात की।

विदेश यात्रा के दूसरे चरण में, जयशंकर लक्जमबर्ग के ग्रैंड डची पहुंचे, जहाँ उन्होंने एचआरएच ड्यूक गिलौम लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रीडेन से बातचीत की। इसके साथ ही, उन्होंने उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों तथा विदेश व्यापार मंत्री जेवियर बेटेल के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इन बैठकों में भारत-लक्जमबर्ग संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने भारत और लक्जमबर्ग के बीच राजनीतिक सहयोग, व्यापार, निवेश, आर्थिक सेवाएं, नवाचार, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष और जनसंपर्क की समीक्षा की। इसके अलावा, आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर विचारों का भी आदान-प्रदान हुआ।

लक्जमबर्ग में, विदेश मंत्री ने भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित किया और भारत और लक्जमबर्ग के बीच रिश्तों को मजबूत करने में उनके योगदान को मान्यता दी।

इन दोनों देशों की यात्रा से यह स्पष्ट है कि भारत फ्रांस और लक्जमबर्ग के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों और यूरोपीय संघ के साथ अपनी महत्वपूर्ण साझेदारी को कितना महत्व देता है। ईएएम की इस यात्रा पर बदलते वैश्विक माहौल में भारत और यूरोप के बीच बढ़ते हितों पर भी जोर दिया गया।

Point of View

NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

एस जयशंकर का यह दौरा कब हुआ?
यह दौरा 4 से 9 जनवरी 2026 तक हुआ।
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना था।
क्या एस जयशंकर ने किसी सम्मेलन में भाग लिया?
हाँ, उन्होंने फ्रांस के राजदूतों की 31वीं कॉन्फ्रेंस में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में भाग लिया।
लक्जमबर्ग में एस जयशंकर ने किससे मुलाकात की?
उन्होंने लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रीडेन और अन्य नेताओं से मुलाकात की।
इस दौरे का भारत-यूरोप संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस दौरे से भारत-यूरोप संबंधों को और सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
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