क्या जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के अभाव का संकट है?

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क्या जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के अभाव का संकट है?

सारांश

जम्मू-कश्मीर में ठंड का मौसम जारी है, लेकिन बर्फबारी का अभाव चिंता का विषय है। क्या यह मौसम कृषि और जल स्रोतों पर असर डाल रहा है? जानिए इस लेख में श्रीनगर और अन्य क्षेत्रों का हाल।

Key Takeaways

  • जम्मू-कश्मीर में ठंड का मौसम जारी है।
  • बर्फबारी का अभाव कृषि और जल स्रोतों के लिए चिंताजनक है।
  • डॉक्टरों ने ठंड से प्रभावित लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

श्रीनगर, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू और कश्मीर में रविवार को भी कड़ाके की सूखी ठंड का सिलसिला जारी रहा, घाटी में रात का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे बना रहा।

साफ आसमान में सर्दियों की हल्की धूप के साथ सूरज निकला। पानी के नल और सड़क के गड्ढों में पानी पूरी तरह जम गया था, जबकि श्रीनगर शहर की डल झील भी कुछ हिस्सों में जम गई थी।

सुबह लोग नलों के चारों ओर छोटी-छोटी आग जलाते हुए पानी को पिघलाते देखे गए। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 5.2 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग स्की रिज़ॉर्ट में माइनस 6.2 और पहलगाम में माइनस 7.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस, कटरा में 4.4, बटोटे में 3, बनिहाल में 7.1 और भद्रवाह में माइनस 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू और कश्मीर, खासकर घाटी के लिए चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि मौसम विभाग ने 20 जनवरी तक ठंडे, सूखे मौसम का अनुमान लगाया है।

अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर भी कम हो गया है, क्योंकि शनिवार को श्रीनगर में अधिकतम तापमान 10.9 डिग्री सेल्सियस और जम्मू शहर में 15.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

वहीं, लगातार सूखे की वजह से पूरे केंद्र शासित प्रदेश में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेती, बागवानी और पीने के पानी की जरूरतें जिन सभी जल स्रोतों पर निर्भर हैं, वे 'चिल्लई कलां' कहे जाने वाले 40 दिनों की कड़ाके की ठंड के दौरान भारी बर्फबारी पर निर्भर करते हैं।

यह अहम 40 दिनों का समय पहले ही आधे से ज़्यादा बीत चुका है, और घाटी के मैदानी इलाकों में इस मौसम की पहली बर्फबारी अभी तक नहीं हुई है।

चिल्लई कलां 30 जनवरी को खत्म होता है। फरवरी और मार्च में होने वाली बर्फबारी का ज्यादा असर नहीं होता क्योंकि यह जल्दी पिघल जाती है और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में बारहमासी पानी के जलाशयों को भरने में मदद नहीं करती।

डॉक्टरों का कहना है कि ठंडे, सूखे मौसम के कारण सीने और दिल से जुड़ी बीमारियां फिर से बढ़ रही हैं। सीने और दिल से जुड़ी बीमारियों का इतिहास रखने वाले लोगों को डॉक्टरों ने ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी है, और ऐसे कमज़ोर लोगों को सलाह दी गई है कि वे कड़ाके की ठंड की लहर की स्थिति में अपने घरों से बाहर न निकलें।

Point of View

बल्कि यह कृषि और जल स्रोतों के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को जल्द ही प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

जम्मू-कश्मीर में इस समय का तापमान क्या है?
श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 5.2 डिग्री सेल्सियस है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह माइनस 6.2 से माइनस 7.6 डिग्री सेल्सियस के बीच है।
क्या जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी की उम्मीद है?
मौसम विभाग के अनुसार, इस समय बर्फबारी की कोई संभावना नहीं है, और 20 जनवरी तक सूखे मौसम का अनुमान है।
चिल्लई कलां क्या है?
चिल्लई कलां 40 दिनों की अवधि होती है, जिसमें कड़ाके की ठंड और बर्फबारी की आशा होती है। यह 30 जनवरी को समाप्त होती है।
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