क्या राहुल द्रविड़ के 'द वॉल' बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है?

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क्या राहुल द्रविड़ के 'द वॉल' बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है?

सारांश

राहुल द्रविड़ की कहानी, जो उन्हें 'द वॉल' बनाती है, क्रिकेट में धैर्य और समर्पण का अद्धितीय उदाहरण है। जानिए कैसे एक युवा क्रिकेटर ने अपने विकेट की कीमत समझी और भारतीय क्रिकेट में अपनी खास पहचान बनाई।

Key Takeaways

  • राहुल द्रविड़ का 'द वॉल' उपनाम उनके धैर्य और समर्पण का प्रतीक है।
  • उन्होंने अपने विकेट की कीमत को समझकर महानता हासिल की।
  • राहुल की करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं, जैसे 13,288 टेस्ट रन।
  • वे एक सफल कोच भी रहे हैं, जिन्होंने अंडर-19 विश्व कप जीता।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और क्रिकेट के इतिहास में सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में गिने जाने वाले राहुल द्रविड़ को 'द वॉल' के नाम से जाना जाता है। यह उपाधि उनके लिए केवल एक नाम नहीं है, बल्कि उनके पूरे करियर में दिखाए गए समर्पण और धैर्य का प्रतीक है, जिसने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई है।

राहुल द्रविड़ ने अपनी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट यात्रा में लगातार जीवटता का प्रदर्शन किया है, जिसके फलस्वरूप उन्हें 'द वॉल' का नाम मिला। उनकी यह कहानी युवा अवस्था से ही शुरू होती है, जब उनके एक मित्र ने पहले अपने लिंक्डइन पर साझा की थी।

उनके मित्र ने बताया, "राहुल कभी नियमित रूप से कक्षा में नहीं आते थे। हमेशा नेट्स में अभ्यास करते दिखाई देते थे। एक बार कक्षा में आए और ग्लव्स पहनकर नोट्स लिखने लगे। यह देखकर हमें अजीब लगा, लेकिन उन्होंने एक घंटा ऐसा किया। एक घंटे बाद, राहुल मेरे पास आए और पूछा, 'क्या मैं आपके अकाउंट्स के नोट्स ले सकता हूं? एग्जाम पास आ रहा है और मैंने ज्यादा नोट्स नहीं लिखे हैं।'"

राहुल के मित्र ने पूछा, "लेकिन तुमने ग्लव्स पहनकर क्यों लिखा?" राहुल ने जवाब दिया, "पिछले दो रणजी मैचों में मैंने पुराने ग्लव्स पहने थे, जो बहुत ढीले थे। गेंदबाज की गेंद मेरे ग्लव्स से निकल गई और मुझे आउट दे दिया गया। मैंने निर्णय लिया कि यह जारी नहीं रह सकता। इसलिए मैंने नए ग्लव्स खरीदे और उन्हें पहनने की आदत डालना चाहता था। अगले दो दिनों तक मैं इन्हें नहीं उतारूंगा।"

राहुल का यह उत्तर एक युवा क्रिकेटर से भारतीय क्रिकेट के 'द वॉल' बनने की उनकी शानदार यात्रा का सार है। उन्होंने अपने विकेट की कीमत को समझा, यही वजह है कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में से एक माना जाता है।

राहुल द्रविड़ 11 जनवरी 2026 को 53 वर्ष के हो गए। उनका जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने कर्नाटक के लिए घरेलू क्रिकेट खेला और 1996 में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए डेब्यू किया।

1996 से 2012 के बीच उन्होंने 164 टेस्ट मैचों की 286 पारियों में 36 शतक और 63 अर्धशतक बनाते हुए 13,288 रन बनाए। उनका औसत 52.31 है। वहीं, 344 वनडे मैचों की 318 पारियों में 12 शतक और 83 अर्धशतक की मदद से उन्होंने 10,889 रन बनाए। एकमात्र टी20 मैच में उनके नाम 31 रन हैं। एक कोच के रूप में भी राहुल द्रविड़ सफल रहे हैं। उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने अंडर-19 विश्व कप जीता है और टी20 विश्व कप 2024 भी उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने जीता था।

Point of View

बल्कि सभी के लिए धैर्य और समर्पण का सबक भी है। एक राष्ट्रीय संपादक के रूप में, हमें हमेशा ऐसे नायकों पर गर्व होना चाहिए जो अपने देश का नाम रोशन करते हैं।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

राहुल द्रविड़ को 'द वॉल' क्यों कहा जाता है?
राहुल द्रविड़ को 'द वॉल' इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने करियर में धैर्य और समर्पण का प्रदर्शन किया है, जो उन्हें एक मजबूत बल्लेबाज बनाता है।
राहुल द्रविड़ की उपलब्धियां क्या हैं?
राहुल द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में 13,288 रन और वनडे में 10,889 रन बनाए हैं।
राहुल द्रविड़ का जन्म कब हुआ?
राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ।
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