क्या सुकांत मजूमदार ने सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले की निंदा की?

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क्या सुकांत मजूमदार ने सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले की निंदा की?

सारांश

कोलकाता में केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि बंगाल में लोकतंत्र का अंत हो चुका है। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी पर हुए हमले की निंदा करते हुए राज्य की पुलिस की निष्क्रियता को भी उजागर किया। जानिए इस गंभीर स्थिति के बारे में और क्या कहा गया।

Key Takeaways

  • सुवेंदु अधिकारी पर हमले की कड़ी निंदा।
  • पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पतन।
  • पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल।
  • राजनीतिक अस्थिरता का बढ़ता खतरा।
  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना।

कोलकाता, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर यह आरोप लगाया कि राज्य में लोकतंत्र पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।

मजूमदार के अनुसार, नंदीग्राम के विधायक और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी पर चंद्रकोना रोड में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के हथियारबंद कार्यकर्ताओं ने हमला किया।

डॉ. सुकांत मजूमदार ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पूर्ण पतन अब बहस का विषय नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के असफल और तानाशाह शासन में हर दिन यह स्थिति खुलकर सामने आ रही है, जिसमें उनका पूरी तरह से पक्षपाती, अक्षम और रीढ़विहीन पुलिस प्रशासन उनका साथ दे रहा है।

उन्होंने कहा, "शनिवार सुबह नंदीग्राम के विधायक और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर एक हिंसक और सोची-समझी हमले का शिकार हुए। पुरुलिया में एक पूर्व निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रम से लौटते समय चंद्रकोना रोड क्षेत्र में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के हथियारबंद गुंडों ने उनके काफिले पर बेरहमी से हमला किया।"

उन्होंने कहा, "इस घटना को और भी शर्मनाक यह बनाता है कि यह हमला पश्चिम बंगाल पुलिस की उपस्थिति में खुलेआम हुआ है। बांस की लाठियों, डंडों और लोहे की छड़ों से लैस टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी पर बेरहमी से हमला किया, जबकि राज्य पुलिस खड़ी होकर देखती रही। हमलावरों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उनकी सुरक्षा के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों के त्वरित और निर्णायक हस्तक्षेप के कारण ही विपक्ष के नेता को बचाया जा सका और सुरक्षित निकाला जा सका।"

डॉ. सुकांत मजूमदार ने सीएम पर निशाना साधते हुए कहा, "मैं तृणमूल के गुंडा ब्रिगेड द्वारा पुलिस को जानबूझकर निष्क्रिय करके किए गए इस काम के लिए राज्य की ओर से प्रायोजित हमले की कड़ी निंदा करता हूं। कुछ ही दिन पहले सत्तारूढ़ पार्टी ने उत्तर बंगाल में भाजपा के सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को खत्म करने की साजिश रची थी।"

जिस राज्य में विपक्ष के नेता, चुने हुए प्रतिनिधि भी सुरक्षित नहीं हैं, वहां लोकतंत्र के भविष्य के बारे में कोई भ्रम नहीं रह सकता। पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र न केवल कमजोर हुआ है, बल्कि उसका बेरहमी से गला घोंट दिया गया है। मैं नाकाम मुख्यमंत्री और उनकी चापलूस, अक्षम और नैतिक रूप से दिवालिया पुलिस मशीनरी की कड़ी निंदा करता हूं।

Point of View

हमें यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र का संरक्षण हर नागरिक का कर्तव्य है। इस प्रकार की हिंसक घटनाएँ केवल राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी बनाती हैं। राज्य की पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठते हैं, जब वे ऐसी घटनाओं को रोकने में असफल होते हैं।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

सुवेंदु अधिकारी पर हमला कब हुआ?
यह हमला 11 जनवरी को चंद्रकोना रोड में हुआ।
सुकांत मजूमदार ने इस हमले पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पतन हो चुका है और इस हमले की कड़ी निंदा की।
हमले के समय पुलिस की क्या भूमिका थी?
हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ, लेकिन पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
इस हमले के पीछे किस पार्टी का हाथ है?
हमले में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का हाथ होने का आरोप है।
क्या यह घटना राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाती है?
हाँ, यह घटना पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता और लोकतंत्र के संकट को दर्शाती है।
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