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क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि ने गुजरात के पतंग महोत्सव को वैश्विक पहचान दिलाई?

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क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि ने गुजरात के पतंग महोत्सव को वैश्विक पहचान दिलाई?

सारांश

आज गुजरात का अहमदाबाद शहर एक ऐतिहासिक पतंग महोत्सव का गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रेडरिक मर्ज ने इस उत्सव में भाग लेकर एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का संदेश दिया। जानिए कैसे यह महोत्सव वैश्विक पहचान बना।

मुख्य बातें

गुजरात का पतंग महोत्सव वैश्विक पहचान बना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि ने इसे साकार किया।
मकर संक्रांति पर हर जगह उत्सव का माहौल।
अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत जैसे शहरों ने अंतरराष्ट्रीय संवाद में योगदान दिया।
पतंगें प्रेम और एकता का प्रतीक।

अहमदाबाद, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज गुजरात का अहमदाबाद शहर एक ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को यहाँ 'अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव' में भाग लिया। साबरमती रिवरफ्रंट पर दोनों नेताओं ने पतंग उड़ाकर आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश दिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मोदी स्टोरी ने 'गुजरात पतंग महोत्सव' का एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में न केवल मकर संक्रांति और पतंग महोत्सव के महत्व को दर्शाया गया, बल्कि यह भी बताया गया कि कैसे नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते गुजरात का यह उत्सव वैश्विक स्तर पर फैल गया।

वीडियो के माध्यम से बताया गया कि गुजरात में पतंग उड़ाना सदियों पुरानी परंपरा है। मकर संक्रांति पर हर छत, आंगन और गली उत्सव में तब्दील हो जाती है। पूरा गुजरात मानों आकाश से संवाद करने लगता है, लेकिन इस परंपरा को स्थानीय उत्सव से वैश्विक मंच पर लाने की दूरदृष्टि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार हुई।

मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने समझा कि गुजरात की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर दिखाना सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त करने का एक तरीका है।

उनकी पहल से गुजरात का अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव एक नया स्वरूप प्राप्त कर चुका है। अब देश के साथ-साथ विदेशों से भी पतंगबाज और संस्कृति प्रेमी गुजरात आने लगे हैं। अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत जैसे शहर अब अंतरराष्ट्रीय संवाद के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।

आज, गुजरात का पतंग महोत्सव विश्व के अनेक देशों में भारत की पहचान बन चुका है। यह उत्सव आकाश में उड़ती पतंगों के माध्यम से भारत की संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है। हर पतंग अपने साथ सकारात्मकता और आनंद का संदेश लेकर उड़ती है। नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि ने गुजरात की इस परंपरा को एक वैश्विक पहचान दी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस खुशी के पल की कुछ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के दौरान अहमदाबाद का आकाश रंगों और जीवन्तता से भर गया।

उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के दौरान यह महोत्सव आकाश को रंगों और उत्सव से भरा करता है। पतंगें नई शुरुआत और साझा खुशी का प्रतीक बन जाती हैं।

उन्होंने लिखा कि आज, पतंग महोत्सव एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसने गुजरात के पतंग महोत्सव को एक वैश्विक पहचान दिलाई है। यह एक सकारात्मक कदम है जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव कब मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है।
इस महोत्सव का उद्देश्य क्या है?
इस महोत्सव का उद्देश्य गुजरात की संस्कृति और परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना है।
पतंग महोत्सव में कौन शामिल हो सकता है?
इस महोत्सव में सभी उम्र के लोग, खासकर पतंगबाज, कलाकार, और संस्कृति प्रेमी शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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