जादवपुर विश्वविद्यालय में रामनवमी आयोजन पर हंगामा, एबीवीपी और वामपंथी छात्र भिड़े
सारांश
Key Takeaways
- रामनवमी का आयोजन विवाद का कारण बना।
- एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच तीखी नारेबाजी हुई।
- वाइस चांसलर ने अनुमति न मिलने की बात कही।
- वामपंथी छात्र संगठनों ने धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
- एबीवीपी ने अपने अधिकारों की रक्षा की मांग की।
कोलकाता, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय में रामनवमी के आयोजन को लेकर हंगामा उत्पन्न हुआ है। इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वामपंथी छात्र संगठन आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
सूत्रों के अनुसार, एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में रामनवमी का आयोजन किया था, जिसमें वे पूजा-पाठ में संलग्न थे। इसी दौरान वामपंथी छात्र संगठनों ने नारेबाजी शुरू कर दी। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने भी इसका जवाब दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
वाइस चांसलर ने कहा कि पूजा के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी। इसी मुद्दे पर वामपंथी छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बिना अनुमति किसी भी धार्मिक गतिविधि का आयोजन नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे शैक्षणिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
वामपंथी छात्र ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यदि विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक आयोजन राजनीतिक हिंसा फैलाने के इरादे से किया जा रहा है, तो वे इसके खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन जानबूझकर माहौल को राजनीतिक और सांप्रदायिक बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय एक शिक्षा का स्थान है और यहां धर्म के नाम पर विभाजन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दूसरी ओर, एबीवीपी के एक कार्यकर्ता ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि एबीवीपी के छात्र वाइस चांसलर के पास अनुमति मांगने गए थे, लेकिन उनकी मांग को खारिज कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भगवान राम की पूजा करने से किसी को आपत्ति हो सकती है। प्रभु श्री राम हमारे आराध्य हैं। यदि राम की पूजा पर आपत्ति है, तो राज्य में विभिन्न स्थलों पर नमाज पढ़ने पर कोई आपत्ति नहीं होती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुर्गा पूजा के दौरान मोटरसाइकिल चालकों को रोका जाता है, लेकिन ईद-मोहर्रम पर बिना हेलमेट के चालान नहीं होता। आज यदि विश्वविद्यालय में पूजा का आयोजन होता है तो अनुमति लेनी होती है। रामनवमी पर पूजा के लिए भी अनुमति आवश्यक होती है। राज्य में हिंदुओं को अपने त्योहारों के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।