2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या जेएनयू में वामपंथी गुटों ने देशविरोधी कृत्य किया?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या जेएनयू में वामपंथी गुटों ने देशविरोधी कृत्य किया?

सारांश

जेएनयू में हाल ही में वामपंथी गुटों द्वारा उठाए गए विवादित नारों पर एबीवीपी ने कड़ी निंदा की है। इसने राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और जेएनयू प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। क्या यह केवल एक घटना है या एक व्यापक समस्या का संकेत है?

मुख्य बातें

जेएनयू में वामपंथी गुटों की नारेबाजी ने देशविरोधी मानसिकता को उजागर किया।
एबीवीपी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है।
संविधान और न्यायपालिका के प्रति सम्मान की आवश्यकता है।
जेएनयू प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना जरूरी है।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जेएनयू कैंपस में उठाए गए विवादित नारों की कड़ी निंदा की है। एबीवीपी ने राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, यह कहते हुए कि जेएनयू परिसर में किसी भी हालात में हिंसा, घृणा और भारत-विरोधी एजेंडे को पनपने नहीं दिया जाना चाहिए।

एबीवीपी की दिल्ली इकाई ने एक बयान में कहा, "जेएनयू कैंपस में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर वही पुरानी देशविरोधी मानसिकता सामने आई, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को ठेस पहुंचाती रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रविरोधी और हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद कुछ वामपंथी और तथाकथित 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' से जुड़े तत्वों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करने के बजाय खुलेआम उग्र नारेबाजी की।"

एबीवीपी ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं है, बल्कि 2016 से 2020 और उसके बाद तक जेएनयू में बार-बार सामने आती रही उसी विचारधारा की निरंतरता है, जिसने पहले भी आतंकवादियों के समर्थन, भारत की एकता-अखंडता पर हमले और संवैधानिक व्यवस्था को बदनाम करने का प्रयास किया है।

बयान में कहा गया है, "अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली का यह स्पष्ट मत है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया निर्णय भारत की स्वतंत्र, निष्पक्ष और सशक्त न्यायिक परंपरा का प्रमाण है। न्यायपालिका ने तथ्यों, साक्ष्यों और संविधान के दायरे में रहकर निर्णय दिया है, न कि किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव, अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा या सड़कों पर की जाने वाली नारेबाजी के आधार पर। इसके बावजूद जिस प्रकार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के वामपंथी नेतृत्व द्वारा इस निर्णय के विरोध में उग्र और हिंसक भाषा का प्रयोग किया गया, वह न सिर्फ न्यायालय की अवमानना की मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि लोकतांत्रिक असहमति की आड़ में अराजकता फैलाने का प्रयास भी है।"

एबीवीपी ने कहा कि जेएनयू में बार-बार वामपंथी और टुकड़े-टुकड़े गैंग की ओर से देश की एकता-अखंडता पर सवाल उठाने, आतंकवाद के आरोपियों का महिमामंडन करने और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की जो परंपरा बनाई गई है, उसका अब स्पष्ट रूप से विरोध किया जाना जरूरी है। वहीं जेएनयू प्रशासन के इस लापरवाह रवैए पर भी सवाल उठता है।

एबीवीपी की दिल्ली इकाई के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों की ओर से की गई नारेबाजी पूरी तरह से देशविरोधी मानसिकता को दर्शाती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी जिस प्रकार संवैधानिक पदों और राष्ट्रविरोधी भाषा का प्रयोग किया गया, वह अस्वीकार्य है। अभाविप जेएनयू इकाई ऐसे हर देशविरोधी कृत्य की कड़ी निंदा करती है और इसे छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित अराजकता मानती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह देश की एकता और अखंडता से भी जुड़ा हुआ है। हमें ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है जो देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर कर रहे हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में विवादित नारेबाजी क्यों हुई?
यह नारेबाजी सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के खिलाफ हुई, जिसमें कुछ वामपंथी तत्वों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान नहीं किया।
एबीवीपी का इस पर क्या कहना है?
एबीवीपी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
क्या यह समस्या केवल जेएनयू तक सीमित है?
नहीं, यह समस्या अन्य विश्वविद्यालयों में भी देखने को मिलती है, जहाँ विचारधाराओं की लड़ाई चल रही है।
क्या इस मुद्दे पर सरकार को कदम उठाने चाहिए?
हां, सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और देश की एकता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
वामपंथी गुटों का यह कृत्य क्यों हो रहा है?
यह एक निरंतरता है जो पिछले वर्षों से चल रही है, जहाँ इन तत्वों ने आतंकवाद के समर्थन और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले