23 सितंबर 2026
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पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा पर दिलीप घोष का तीखा बयान, TMC-CPM पर लगाया आरोप

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पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा पर दिलीप घोष का तीखा बयान, TMC-CPM पर लगाया आरोप

सारांश

पश्चिम बंगाल में TMC विधायक और CPM नेता पर कथित हमलों के बाद BJP नेता दिलीप घोष ने तीखा बयान दिया — राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को TMC-CPM की देन बताया। लेकिन विपक्ष का आरोप BJP पर ही है। बंगाल की पुरानी राजनीतिक हिंसा का चक्र एक बार फिर केंद्र में है।

मुख्य बातें

BJP नेता दिलीप घोष ने 23 सितंबर 2026 को कहा कि वे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को और नहीं देखना चाहते।
नाओडा के विधायक हुमायूं कबीर और TMC नेत्री उपासना चौधरी पर कथित तौर पर BJP -समर्थित उपद्रवियों ने हमला किया।
बारुईपुर कोर्ट में CPM नेता-वकील सायन बनर्जी पर कथित तौर पर अंडे फेंके गए।
घोष ने मुकुंदापुर घटना को 'ड्रामा' बताया और विपक्षी दलों पर सहानुभूति बटोरने का आरोप लगाया।
घोष ने TMC और CPM को राज्य में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति शुरू करने वाला बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने 23 सितंबर 2026 को कोलकाता में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की जो संस्कृति चल रही है, उसे अब समाप्त होना चाहिए। घोष का यह बयान उन घटनाओं के एक दिन बाद आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और नेताओं पर कथित हमले की खबरें सामने आईं।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को कोलकाता में कई स्थानों पर राजनीतिक तनाव देखा गया। नाओडा के विधायक हुमायूं कबीर — जो ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के पूर्व नेता भी हैं — और TMC नेत्री उपासना चौधरी पर कथित तौर पर BJP-समर्थित उपद्रवियों ने हमला किया। आरोप है कि ईस्ट जादवपुर पुलिस स्टेशन के बाहर कबीर की कथित तौर पर पिटाई की गई, जब वे शिकायत दर्ज कराने पहुँचे थे।

इसके अलावा, बारुईपुर कोर्ट परिसर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता और वकील सायन बनर्जी पर कथित तौर पर अंडे फेंके गए। कोलकाता के बाहरी इलाके मुकुंदापुर में भी TMC पार्टी कार्यालयों पर कब्जे को लेकर तनाव रहा।

दिलीप घोष की प्रतिक्रिया

इन घटनाओं की आलोचना करते हुए घोष ने कहा, 'राजनीतिक टकराव की भी एक सीमा होनी चाहिए। इस संस्कृति की शुरुआत उस पार्टी ने की थी जो इस साल की शुरुआत तक राज्य में सत्ता में थी। अब वे विपक्ष में हैं, लेकिन फिर भी उसी संस्कृति को बनाए हुए हैं।' उन्होंने सीधे CPM और तृणमूल कांग्रेस को इस 'राजनीतिक हिंसा की संस्कृति' की जड़ बताया।

घोष ने पुलिस पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह देखना पुलिस की जिम्मेदारी थी कि कोई कोर्ट परिसर में अंडे लेकर कैसे प्रवेश कर सकता है।

मुकुंदापुर घटना पर 'ड्रामा' का आरोप

घोष ने मुकुंदापुर की घटना को 'ड्रामा' करार देते हुए सवाल किया कि आखिर हुमायूं कबीर को निशाना क्यों बनाया गया, जो न तो TMC के हैं और न ही BJP के। उन्होंने आरोप लगाया कि हताश विपक्षी दल आपस में लड़ रहे हैं और अपने ही कार्यालय नष्ट कर अभियान में सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक पुनर्गठन का दौर चल रहा है और विभिन्न दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में दशकों से राजनीतिक हिंसा एक संवेदनशील मुद्दा रही है। CPM के लंबे शासन और उसके बाद TMC के कार्यकाल — दोनों में ही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हिंसक रूप लेती रही है। आलोचकों का कहना है कि सत्ता बदलने के बाद भी यह चक्र थमता नहीं, बल्कि नए दलों के हाथ में चला जाता है।

आगे क्या होगा

इन घटनाओं के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा। विपक्षी दलों ने निष्पक्ष जाँच की माँग की है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में इन घटनाओं को लेकर विधानसभा में भी हंगामे की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंपरा नहीं। असली सवाल यह है कि क्या राज्य की पुलिस और प्रशासन निष्पक्ष जाँच करेंगे, या यह भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट जाएगा। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर बयानों पर टिकी रहती है — जबकि ज़मीनी स्तर पर पीड़ितों को न्याय मिलना और जिम्मेदारी तय होना ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा को लेकर क्या कहा?
BJP नेता दिलीप घोष ने 23 सितंबर 2026 को कहा कि वे राज्य में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति को और नहीं देखना चाहते। उन्होंने इस संस्कृति की शुरुआत के लिए TMC और CPM को जिम्मेदार ठहराया।
हुमायूं कबीर पर हमला कहाँ और कैसे हुआ?
नाओडा के विधायक हुमायूं कबीर पर कथित तौर पर ईस्ट जादवपुर पुलिस स्टेशन के बाहर उस समय पिटाई की गई जब वे शिकायत दर्ज कराने पहुँचे थे। आरोप है कि यह BJP-समर्थित उपद्रवियों ने किया।
मुकुंदापुर में क्या हुआ था?
कोलकाता के बाहरी इलाके मुकुंदापुर में TMC पार्टी कार्यालयों पर कब्जे को लेकर तनाव भड़का। BJP पर AITC के जुलूस पर हमला करने का आरोप लगाया गया। दिलीप घोष ने इसे 'ड्रामा' करार दिया।
बारुईपुर कोर्ट में CPM नेता पर क्या हुआ?
बारुईपुर कोर्ट परिसर में CPM नेता और वकील सायन बनर्जी पर कथित तौर पर अंडे फेंके गए। घोष ने कहा कि यह देखना पुलिस की जिम्मेदारी थी कि कोई कोर्ट में अंडे लेकर कैसे घुस सकता है।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की पृष्ठभूमि क्या है?
पश्चिम बंगाल में CPM के दशकों के शासन से लेकर TMC के कार्यकाल तक राजनीतिक हिंसा एक पुरानी समस्या रही है। आलोचकों का कहना है कि सत्ता बदलने के साथ हिंसा की संस्कृति खत्म नहीं होती, बल्कि नई पार्टी के हाथों में चली जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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