28 अगस्त 2026
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रक्षाबंधन पर बानिहाल की छात्राओं ने सेना के जवानों को बांधी राखी, बोलीं— हम भी हैं आपकी बहनें

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रक्षाबंधन पर बानिहाल की छात्राओं ने सेना के जवानों को बांधी राखी, बोलीं— हम भी हैं आपकी बहनें

सारांश

बानिहाल की स्कूली छात्राओं ने रक्षाबंधन पर सेना के कैंप पहुँचकर जवानों को राखी बांधी और कहा— 'हम भी आपकी बहनें हैं।' घर से दूर ड्यूटी पर तैनात जवानों के लिए यह पल किसी पारिवारिक त्योहार से कम नहीं था।

मुख्य बातें

बानिहाल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर सेना के जवानों को राखी बांधी।
छात्राएं तिलक की थाली और राखी लेकर सेना के कैंप पहुँचीं और जवानों का तिलक कर उनकी कलाई पर राखी बांधी।
छात्रा शिल्पा , आलिया फारूक और काजल देवी ने जवानों को अपना भाई बताते हुए भावुक संदेश दिए।
जम्मू-कश्मीर में तैनात जवान त्योहारों पर भी ड्यूटी के कारण परिवार से दूर रहते हैं।
इस आयोजन ने नागरिक-सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

जम्मू-कश्मीर के बानिहाल में 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर बानिहाल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने भारतीय सेना के जवानों की कलाइयों पर राखी बांधकर एक भावपूर्ण परंपरा को जीवंत किया। घर से दूर सीमा पर तैनात जवानों के लिए यह पल किसी पारिवारिक उत्सव से कम नहीं था — और इन बेटियों ने यह साबित किया कि पूरा देश ही उनका परिवार है।

मुख्य घटनाक्रम

छात्राएं हाथों में राखी और तिलक की थाली लेकर सेना के कैंप पहुँचीं। उन्होंने जवानों को तिलक लगाया, राखी बांधी और उनके दीर्घायु की कामना की। इस दौरान जवानों के चेहरे पर भावुकता और खुशी दोनों साफ नजर आई। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव था, बल्कि नागरिक-सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक भी बना।

छात्राओं की आवाज़

छात्रा शिल्पा ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, 'मुझे अपने आर्मी भाइयों को राखी बांधकर बहुत खुशी महसूस हुई। मैं चाहती थी कि उन्हें लगे कि भले ही उनकी बहनें दूर हैं, लेकिन हम भी उनकी बहनें हैं। उनकी कलाई पर राखी बांधना एक अद्भुत एहसास था।'

एक अन्य छात्रा आलिया फारूक ने कहा, 'आज रक्षाबंधन पर हमने अपने आर्मी ब्रदर्स को राखी बांधी। उन्हें ये नहीं सोचना चाहिए कि वो घर से दूर हैं तो त्योहार नहीं मना पाएंगे। हम भी उनकी बहनें हैं — वैसे भी वो हमारी रक्षा करते हैं।'

काजल देवी ने बताया, 'हमने अपने देश के जवानों को राखी बांधी। त्योहार पर भी वो ड्यूटी करते हैं, उन्हें घर जाने की छुट्टी तक नहीं मिलती। इसलिए हमने उनके साथ यह त्योहार मनाया।'

सेना और समाज का भावनात्मक जुड़ाव

भारतीय सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए परिवारों से दूर कठिन इलाकों में वर्षभर तैनात रहते हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है, जहाँ त्योहारों पर भी ड्यूटी से छुट्टी मिलना दुर्लभ होता है। गौरतलब है कि इस तरह के नागरिक-सैनिक मेलजोल के आयोजन बानिहाल जैसे क्षेत्र में सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी देते हैं।

आम जनता पर असर

बानिहाल की इन छात्राओं की पहल ने स्थानीय समुदाय में सेना के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को और गहरा किया है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जम्मू-कश्मीर के युवा देश की सुरक्षा में लगे जवानों को अपना मानते हैं। ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और सेना के मनोबल को भी बल देते हैं।

क्या होगा आगे

इस भावपूर्ण आयोजन की तस्वीरें और संदेश व्यापक स्तर पर साझा हो रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले त्योहारों पर भी इस तरह की पहल जारी रहेगी, जो नागरिकों और सेना के बीच के बंधन को और मजबूत करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ की बेटियों का स्वेच्छा से कैंप पहुँचकर राखी बांधना एक सशक्त सांकेतिक संदेश है। यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विभिन्न नामों वाली छात्राएं — शिल्पा, आलिया फारूक, काजल देवी — एक साथ शामिल हैं, जो क्षेत्र की सामासिक संस्कृति को दर्शाता है। मुख्यधारा की कवरेज इसे केवल भावनात्मक खबर के रूप में पेश करती है, लेकिन असल मायने में यह नागरिक-सेना संबंधों के बदलते परिदृश्य का एक सूक्ष्म लेकिन सार्थक दस्तावेज है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बानिहाल में रक्षाबंधन पर क्या हुआ?
28 अगस्त को बानिहाल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने भारतीय सेना के कैंप पहुँचकर जवानों को तिलक लगाया और राखी बांधी। छात्राओं ने जवानों को अपना भाई बताते हुए कहा कि घर से दूर होने के बावजूद वे उनकी बहनें हैं।
इस आयोजन में कौन-सी छात्राओं ने हिस्सा लिया?
शिल्पा, आलिया फारूक और काजल देवी सहित बानिहाल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की कई छात्राओं ने इस आयोजन में भाग लिया। तीनों ने सेना के जवानों के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
जवानों के लिए यह पल क्यों खास था?
जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना के जवान त्योहारों पर भी ड्यूटी के कारण परिवार से दूर रहते हैं और अक्सर घर जाने की छुट्टी नहीं मिलती। ऐसे में छात्राओं का कैंप में आकर राखी बांधना उनके लिए पारिवारिक उत्सव जैसा अनुभव था।
यह आयोजन समाज के लिए क्या संदेश देता है?
यह आयोजन नागरिकों और सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। बानिहाल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की पहल सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती है और यह संदेश देती है कि पूरा देश ही सेना का परिवार है।
क्या जम्मू-कश्मीर में इस तरह के नागरिक-सेना आयोजन पहले भी हुए हैं?
जम्मू-कश्मीर में समय-समय पर नागरिक-सेना सद्भाव के आयोजन होते रहे हैं, विशेषकर राष्ट्रीय त्योहारों के अवसर पर। बानिहाल की छात्राओं की यह पहल उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है और युवा पीढ़ी की भागीदारी को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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