रक्षाबंधन पर बानिहाल की छात्राओं ने सेना के जवानों को बांधी राखी, बोलीं— हम भी हैं आपकी बहनें
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बानिहाल में 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर बानिहाल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने भारतीय सेना के जवानों की कलाइयों पर राखी बांधकर एक भावपूर्ण परंपरा को जीवंत किया। घर से दूर सीमा पर तैनात जवानों के लिए यह पल किसी पारिवारिक उत्सव से कम नहीं था — और इन बेटियों ने यह साबित किया कि पूरा देश ही उनका परिवार है।
मुख्य घटनाक्रम
छात्राएं हाथों में राखी और तिलक की थाली लेकर सेना के कैंप पहुँचीं। उन्होंने जवानों को तिलक लगाया, राखी बांधी और उनके दीर्घायु की कामना की। इस दौरान जवानों के चेहरे पर भावुकता और खुशी दोनों साफ नजर आई। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव था, बल्कि नागरिक-सेना के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक भी बना।
छात्राओं की आवाज़
छात्रा शिल्पा ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, 'मुझे अपने आर्मी भाइयों को राखी बांधकर बहुत खुशी महसूस हुई। मैं चाहती थी कि उन्हें लगे कि भले ही उनकी बहनें दूर हैं, लेकिन हम भी उनकी बहनें हैं। उनकी कलाई पर राखी बांधना एक अद्भुत एहसास था।'
एक अन्य छात्रा आलिया फारूक ने कहा, 'आज रक्षाबंधन पर हमने अपने आर्मी ब्रदर्स को राखी बांधी। उन्हें ये नहीं सोचना चाहिए कि वो घर से दूर हैं तो त्योहार नहीं मना पाएंगे। हम भी उनकी बहनें हैं — वैसे भी वो हमारी रक्षा करते हैं।'
काजल देवी ने बताया, 'हमने अपने देश के जवानों को राखी बांधी। त्योहार पर भी वो ड्यूटी करते हैं, उन्हें घर जाने की छुट्टी तक नहीं मिलती। इसलिए हमने उनके साथ यह त्योहार मनाया।'
सेना और समाज का भावनात्मक जुड़ाव
भारतीय सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए परिवारों से दूर कठिन इलाकों में वर्षभर तैनात रहते हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है, जहाँ त्योहारों पर भी ड्यूटी से छुट्टी मिलना दुर्लभ होता है। गौरतलब है कि इस तरह के नागरिक-सैनिक मेलजोल के आयोजन बानिहाल जैसे क्षेत्र में सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी देते हैं।
आम जनता पर असर
बानिहाल की इन छात्राओं की पहल ने स्थानीय समुदाय में सेना के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को और गहरा किया है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जम्मू-कश्मीर के युवा देश की सुरक्षा में लगे जवानों को अपना मानते हैं। ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और सेना के मनोबल को भी बल देते हैं।
क्या होगा आगे
इस भावपूर्ण आयोजन की तस्वीरें और संदेश व्यापक स्तर पर साझा हो रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले त्योहारों पर भी इस तरह की पहल जारी रहेगी, जो नागरिकों और सेना के बीच के बंधन को और मजबूत करेगी।