रक्षाबंधन पर साध्वी निरंजन ज्योति ने नकवी को बांधी राखी, 35 साल पुराने भाई-बहन के बंधन का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में रक्षाबंधन 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी और राज्यसभा सदस्य एवं पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी को राखी बांधी। इस भावपूर्ण अवसर पर साध्वी ने कहा कि वे पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से नकवी को राखी बांध रही हैं — एक ऐसा बंधन जो धर्म और राजनीति की सीमाओं से परे है।
भाई-बहन के बंधन पर साध्वी का संदेश
इस मौके पर साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा, 'आज बहुत महत्वपूर्ण दिन है, जब एक धागे से भाई-बहन के बीच का बंधन मजबूत होता है। ये सिर्फ धागे नहीं हैं बल्कि प्यार के बंधन हैं जो भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि साधु जीवन हो, राजनीतिक जीवन हो या गृहस्थ जीवन — हर क्षेत्र में रिश्तों का महत्व सर्वोपरि है। उनके अनुसार, 'अगर रिश्ते मजबूत हैं, तो हर परिस्थिति में जी सकते हैं; अगर रिश्ते अच्छे नहीं हैं, तो मन खुश नहीं रह सकता।'
नकवी का प्रतिसाद: सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक
मुख्तार अब्बास नकवी ने इस अवसर पर कहा कि साध्वी निरंजन ज्योति का प्यार और स्नेह 'सालों से नहीं बल्कि दशकों से' चला आ रहा है। उन्होंने रक्षाबंधन को भारतीय सभ्यता की व्यापकता का प्रतीक बताते हुए कहा, 'हमारा भारत दुनिया की सबसे पुरानी, सबसे मजबूत, सबसे अर्थपूर्ण और सबसे व्यापक सभ्यता है। इसीलिए हमारी सभ्यता के संदेश और शिक्षाएं पूरी दुनिया में व्यापक रूप से स्वीकार की जाती हैं।' नकवी ने साध्वी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इसी तरह 'पूरी ताकत और शक्ति के साथ' अपने कार्य में लगी रहें।
सुधांशु त्रिवेदी का ऐतिहासिक संदर्भ
राज्यसभा सदस्य एवं BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राखी बंधवाने के बाद कहा कि प्राचीन काल से ही समाज की रक्षा का दायित्व संभालने वाले शासकों को यह धागा बांधा जाता रहा है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए कहा कि संपत्ति में बहनों को हिस्सा देने का पहला उदाहरण मनुस्मृति में मिलता है — जहाँ कहा गया है कि बहनों को कुल हिस्से का एक-चौथाई हिस्सा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने 24 फरवरी 1949 को भारत की संसद में इसका उल्लेख किया था।
सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक
यह ध्यान देने योग्य है कि साध्वी निरंजन ज्योति और मुख्तार अब्बास नकवी के बीच यह रक्षाबंधन का सिलसिला तीन दशकों से भी अधिक पुराना है। एक हिंदू साध्वी और मुस्लिम नेता के बीच यह भाई-बहन का बंधन सामाजिक सौहार्द का एक उल्लेखनीय उदाहरण माना जाता है। गौरतलब है कि नकवी BJP में अल्पसंख्यक मामलों के पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।
आगे का संदर्भ
इस आयोजन ने रक्षाबंधन के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक नई परत दी। त्रिवेदी की टिप्पणियाँ इस बात का संकेत देती हैं कि BJP भारतीय संस्कृति की सकारात्मक विरासत को सार्वजनिक विमर्श में केंद्रीय स्थान देने की रणनीति पर काम कर रही है।