9 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुजरात जेलों के 44 कैदियों ने जीएसईबी परीक्षा पास की, शिक्षा से बदली ज़िंदगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुजरात जेलों के 44 कैदियों ने जीएसईबी परीक्षा पास की, शिक्षा से बदली ज़िंदगी

सारांश

गुजरात की जेलों में बंद 44 कैदियों ने जीएसईबी की 10वीं और 12वीं परीक्षाएँ पास कर साबित किया कि सलाखों के पीछे भी सपने ज़िंदा रहते हैं। जेल प्रशासन की शिक्षा-आधारित पुनर्वास पहल — पुस्तकालय, ऑडियोबुक, विषयवार कक्षाएँ और परिसर में परीक्षा केंद्र — ने अवसाद को उम्मीद में बदल दिया।

मुख्य बातें

गुजरात की विभिन्न जेलों में बंद 44 कैदियों ने जीएसईबी की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं — 22 ने कक्षा 10वीं और 22 ने कक्षा 12वीं ।
गुजरात कारागार और सुधार प्रशासन ने परीक्षा प्रपत्र, पाठ्यपुस्तकें, विषयवार कक्षाएँ और जेल परिसर में परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराए।
गुजरात पुलिस प्रमुख केएलन राव ने कहा कि शिक्षा के ज़रिए कैदियों ने अवसाद पर काबू पाया और मुख्यधारा में वापसी की राह बनाई।
सफल कैदियों को जेल विभाग द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
जेल परिसरों में आधुनिक पुस्तकालय और ऑडियोबुक सुविधा स्थापित की गई है; शिक्षक नियमित रूप से जेलों का दौरा कर मार्गदर्शन देते हैं।

गुजरात की विभिन्न जेलों में बंद 44 कैदियों ने गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसईबी) की कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की परीक्षाएँ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कीं। 24 मई को घोषित इन परिणामों ने जेल प्रशासन की शिक्षा-आधारित पुनर्वास पहल को एक नई पहचान दी है।

परिणाम का विवरण

उत्तीर्ण 44 कैदियों में से 22 ने कक्षा 10वीं और शेष 22 ने कक्षा 12वीं की परीक्षा पास की। गुजरात कारागार और सुधार प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, इन कैदियों को परीक्षा प्रपत्र भरने से लेकर पाठ्यपुस्तकें, अध्ययन सामग्री और विषयवार कक्षाओं तक हर सुविधा जेल परिसर के भीतर ही उपलब्ध कराई गई। जेल परिसर में ही परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए, जिससे कैदियों को परिचित और सुरक्षित वातावरण में परीक्षा देने का अवसर मिला।

पुलिस प्रमुख की प्रतिक्रिया

गुजरात पुलिस प्रमुख केएलन राव ने इस अवसर पर कहा, 'शिक्षा के माध्यम से गुजरात की जेलों में बंद कैदियों ने अवसाद पर काबू पाया और मुख्यधारा में फिर से लौटे।' उन्होंने बताया कि सफल कैदियों को जेल विभाग द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

कैदियों के अनुभव

शिक्षा की इस परिवर्तनकारी यात्रा को कैदियों ने अपने शब्दों में बयान किया। एक कैदी ने कहा, 'सजा मिलने के बाद मुझे ऐसा लगा कि मेरी ज़िंदगी खत्म हो गई हो, लेकिन रेडियो प्रिजन, कल्याण कार्यालय और जेल अधिकारियों से मिली प्रेरणा ने मुझे पढ़ाई में वापस लौटने के लिए प्रेरित किया। आज परीक्षा में सफल होने के बाद मुझे कई सालों बाद फिर से जीने का एहसास हो रहा है।' एक अन्य कैदी ने बताया कि पारिवारिक आर्थिक तंगी के कारण उसे पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी, और जेल में अवसाद का शिकार होने के बावजूद जेल अधिकारियों के प्रोत्साहन ने उसे दोबारा किताबें उठाने की हिम्मत दी।

एक तीसरे कैदी ने कहा, 'जेल में होने के बावजूद मेरे सपने अभी भी जीवित हैं। मैं सप्ताह में दो बार संगीत सीखने जाता हूँ और रिहाई के बाद गायक बनने की आकांक्षा रखता हूँ।'

जेल प्रशासन की पहल

कारागार विभाग ने जेल परिसरों में आधुनिक पुस्तकालय स्थापित किए हैं, जहाँ मुद्रित पुस्तकों के साथ-साथ ऑडियोबुक की सुविधा भी उपलब्ध है। विभाग नियमित रूप से विशेष व्याख्यानों का आयोजन करता है, जिनमें स्कूल और कॉलेज के शिक्षक जेलों का दौरा कर कैदियों को पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास पर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।

आगे की राह

जेल प्रशासन के अनुसार, इन 44 कैदियों की सफलता केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति का जीवंत प्रमाण है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र में और अधिक कैदियों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की योजना है, ताकि पुनर्वास का यह मॉडल और व्यापक रूप ले सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस ढाँचागत प्रतिबद्धता का प्रमाण है जो अधिकांश राज्यों में अभी भी नदारद है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े बताते हैं कि भारतीय जेलों में बंद बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदी हैं जिनके पास शिक्षा तक पहुँच नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह मॉडल केवल एक मौसमी पहल बनकर रह जाता है या इसे नीतिगत स्तर पर संस्थागत रूप दिया जाता है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात जेलों के कितने कैदियों ने जीएसईबी परीक्षा पास की?
कुल 44 कैदियों ने जीएसईबी परीक्षा उत्तीर्ण की — 22 ने कक्षा 10वीं और 22 ने कक्षा 12वीं। यह सफलता गुजरात कारागार और सुधार प्रशासन की शिक्षा-आधारित पुनर्वास पहल का परिणाम है।
गुजरात जेल प्रशासन ने कैदियों को पढ़ाई के लिए क्या सुविधाएँ दीं?
जेल प्रशासन ने परीक्षा प्रपत्र भरने में सहायता, पाठ्यपुस्तकें, अध्ययन सामग्री, विषयवार कक्षाएँ और जेल परिसर के भीतर परीक्षा केंद्र स्थापित किए। इसके अलावा आधुनिक पुस्तकालय और ऑडियोबुक की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
इस कार्यक्रम से कैदियों को क्या फायदा हुआ?
कैदियों के अनुसार शिक्षा ने उन्हें अवसाद से उबरने और आत्मविश्वास पुनः प्राप्त करने में मदद की। कई कैदियों ने बताया कि जेल अधिकारियों के प्रोत्साहन ने उन्हें वर्षों बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करने की प्रेरणा दी।
सफल कैदियों को क्या पुरस्कार मिलेगा?
गुजरात पुलिस प्रमुख केएलन राव के अनुसार, परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कैदियों को जेल विभाग द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
क्या यह कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा?
जेल प्रशासन के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र में अधिक कैदियों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की योजना है। विभाग नियमित रूप से शिक्षकों द्वारा जेल दौरे और विशेष व्याख्यान भी आयोजित करता रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले