गुजरात जेलों के 44 कैदियों ने जीएसईबी परीक्षा पास की, शिक्षा से बदली ज़िंदगी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात की विभिन्न जेलों में बंद 44 कैदियों ने गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसईबी) की कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की परीक्षाएँ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कीं। 24 मई को घोषित इन परिणामों ने जेल प्रशासन की शिक्षा-आधारित पुनर्वास पहल को एक नई पहचान दी है।
परिणाम का विवरण
उत्तीर्ण 44 कैदियों में से 22 ने कक्षा 10वीं और शेष 22 ने कक्षा 12वीं की परीक्षा पास की। गुजरात कारागार और सुधार प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, इन कैदियों को परीक्षा प्रपत्र भरने से लेकर पाठ्यपुस्तकें, अध्ययन सामग्री और विषयवार कक्षाओं तक हर सुविधा जेल परिसर के भीतर ही उपलब्ध कराई गई। जेल परिसर में ही परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए, जिससे कैदियों को परिचित और सुरक्षित वातावरण में परीक्षा देने का अवसर मिला।
पुलिस प्रमुख की प्रतिक्रिया
गुजरात पुलिस प्रमुख केएलन राव ने इस अवसर पर कहा, 'शिक्षा के माध्यम से गुजरात की जेलों में बंद कैदियों ने अवसाद पर काबू पाया और मुख्यधारा में फिर से लौटे।' उन्होंने बताया कि सफल कैदियों को जेल विभाग द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
कैदियों के अनुभव
शिक्षा की इस परिवर्तनकारी यात्रा को कैदियों ने अपने शब्दों में बयान किया। एक कैदी ने कहा, 'सजा मिलने के बाद मुझे ऐसा लगा कि मेरी ज़िंदगी खत्म हो गई हो, लेकिन रेडियो प्रिजन, कल्याण कार्यालय और जेल अधिकारियों से मिली प्रेरणा ने मुझे पढ़ाई में वापस लौटने के लिए प्रेरित किया। आज परीक्षा में सफल होने के बाद मुझे कई सालों बाद फिर से जीने का एहसास हो रहा है।' एक अन्य कैदी ने बताया कि पारिवारिक आर्थिक तंगी के कारण उसे पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी, और जेल में अवसाद का शिकार होने के बावजूद जेल अधिकारियों के प्रोत्साहन ने उसे दोबारा किताबें उठाने की हिम्मत दी।
एक तीसरे कैदी ने कहा, 'जेल में होने के बावजूद मेरे सपने अभी भी जीवित हैं। मैं सप्ताह में दो बार संगीत सीखने जाता हूँ और रिहाई के बाद गायक बनने की आकांक्षा रखता हूँ।'
जेल प्रशासन की पहल
कारागार विभाग ने जेल परिसरों में आधुनिक पुस्तकालय स्थापित किए हैं, जहाँ मुद्रित पुस्तकों के साथ-साथ ऑडियोबुक की सुविधा भी उपलब्ध है। विभाग नियमित रूप से विशेष व्याख्यानों का आयोजन करता है, जिनमें स्कूल और कॉलेज के शिक्षक जेलों का दौरा कर कैदियों को पाठ्यक्रम-आधारित मार्गदर्शन देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास पर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।
आगे की राह
जेल प्रशासन के अनुसार, इन 44 कैदियों की सफलता केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति का जीवंत प्रमाण है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र में और अधिक कैदियों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की योजना है, ताकि पुनर्वास का यह मॉडल और व्यापक रूप ले सके।