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यूपी जेलों में शिक्षा क्रांति: हाईस्कूल में 98.53% परिणाम, 67 बंदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण

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यूपी जेलों में शिक्षा क्रांति: हाईस्कूल में 98.53% परिणाम, 67 बंदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण

सारांश

यूपी जेलों में 2026 बोर्ड परीक्षा में बंदी परीक्षार्थियों ने इतिहास रचा — हाईस्कूल में 98.53% और इंटरमीडिएट में 84.44% परिणाम। 23 जनपदों में शत-प्रतिशत सफलता। योगी सरकार की जेल शिक्षा नीति जमीन पर दिखा रही असर।

मुख्य बातें

हाईस्कूल परीक्षा 2026 में 68 में से 67 बंदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण, परिणाम दर 98.53% ।
इंटरमीडिएट में 135 में से 114 बंदी सफल, परिणाम दर 84.44% ।
23 जनपदों में हाईस्कूल और 14 जनपदों में इंटरमीडिएट का शत-प्रतिशत परिणाम।
योगी सरकार की जेल शिक्षा नीति के तहत बंदियों को बोर्ड परीक्षाओं में शामिल कराया जा रहा है।
जेलों को सुधार, शिक्षा और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने का मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय बन रहा है।
यह उपलब्धि बंदियों के समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापन की दिशा में ठोस कदम है।

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026 — उत्तर प्रदेश की जेलों ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए शिक्षा सुधार का नया अध्याय लिखा है। हाईस्कूल परीक्षा में 68 बंदी परीक्षार्थियों में से 67 सफल रहे, जिससे परिणाम दर 98.53 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं इंटरमीडिएट में 135 में से 114 परीक्षार्थियों ने सफलता पाई और परिणाम 84.44 प्रतिशत रहा।

23 जनपदों में शत-प्रतिशत परिणाम

हाईस्कूल परीक्षा में प्रदेश के 23 जनपदों के बंदी परीक्षार्थियों ने शत-प्रतिशत सफलता दर्ज की। इनमें आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, फतेहपुर, इटावा, अयोध्या और जौनपुर शामिल हैं।

यह भौगोलिक विस्तार यह साबित करता है कि योगी सरकार की जेल शिक्षा नीति केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक प्रभावी रूप से लागू हो रही है।

इंटरमीडिएट में 14 जनपदों का शानदार प्रदर्शन

इंटरमीडिएट परीक्षा में 14 जनपदोंमैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, रामपुर, उन्नाव, कानपुर नगर, फतेहपुर, इटावा, हमीरपुर, जौनपुर और भदोही — के सभी बंदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इंटरमीडिएट स्तर पर पाठ्यक्रम की जटिलता अधिक होती है, फिर भी बंदियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।

जेल सुधार की दिशा में योगी सरकार की रणनीति

उत्तर प्रदेश सरकार ने जेलों को पारंपरिक दंड-स्थल की परिभाषा से बाहर निकालकर उन्हें शिक्षा, सुधार और पुनर्वास के संगठित केंद्र के रूप में विकसित किया है। बंदियों को बोर्ड परीक्षाओं में शामिल कराना, नियमित अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना और प्रेरणा आधारित शिक्षण वातावरण तैयार करना इस रणनीति के मूल स्तंभ हैं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में यूपी जेल विभाग ने बंदियों के लिए कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और औपचारिक शिक्षा कार्यक्रमों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है। इस समग्र दृष्टिकोण का परिणाम अब बोर्ड परीक्षाओं के आंकड़ों में स्पष्ट दिख रहा है।

व्यापक सामाजिक प्रभाव और राष्ट्रीय संदर्भ

यह मॉडल केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं है। शिक्षित बंदी जब समाज में लौटते हैं तो उनके पुनः अपराध में लिप्त होने की संभावना कम होती है — यह अंतरराष्ट्रीय अपराध-शास्त्र का एक स्थापित तथ्य है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी यह संकेत देते हैं कि शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पुनरावृत्ति अपराध दर को घटाने में सहायक होते हैं।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों ने भी जेल शिक्षा कार्यक्रम चलाए हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश का यह परिणाम — जनसंख्या और जेल बंदियों की संख्या के अनुपात में — विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यूपी देश की सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है और यहाँ की जेलों में बंदियों की संख्या भी सर्वाधिक है।

आने वाले समय में यदि यह मॉडल और अधिक जनपदों तक विस्तारित होता है और बंदियों की उच्च शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित की जाती है, तो यह उत्तर प्रदेश के जेल सुधार को राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय उदाहरण बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह दर्शाता है कि राज्य की罰 दंड प्रणाली धीरे-धीरे पुनर्वास-केंद्रित हो रही है — जो आधुनिक न्याय-शास्त्र की माँग है। हालाँकि, एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी उठता है कि जेलों में शिक्षा की पहुँच अभी कितने प्रतिशत बंदियों तक है और क्या यह सुविधा समान रूप से सभी वर्गों को मिल रही है। मुख्यधारा की कवरेज जश्न मनाती है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये शिक्षित बंदी रिहाई के बाद समाज में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित हो पाते हैं या नहीं — उसके लिए एक व्यापक पुनर्वास तंत्र की जरूरत है जिस पर अभी काम बाकी है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी जेलों में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम क्या रहा?
उत्तर प्रदेश की जेलों में हाईस्कूल परीक्षा 2026 में 68 बंदी परीक्षार्थियों में से 67 सफल हुए, जिससे परिणाम दर 98.53 प्रतिशत रही। यह राज्य की जेल शिक्षा नीति की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इंटरमीडिएट परीक्षा में यूपी के बंदी परीक्षार्थियों का प्रदर्शन कैसा रहा?
इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में 135 बंदी परीक्षार्थियों में से 114 उत्तीर्ण हुए और परिणाम 84.44 प्रतिशत रहा। 14 जनपदों में सभी बंदी परीक्षार्थी सफल रहे।
किन जनपदों में बंदी परीक्षार्थियों का शत-प्रतिशत परिणाम आया?
हाईस्कूल में 23 जनपदों — आगरा, मेरठ, लखनऊ, अयोध्या, जौनपुर सहित — में शत-प्रतिशत परिणाम दर्ज हुआ। इंटरमीडिएट में मैनपुरी, कानपुर नगर, भदोही सहित 14 जनपदों में सभी बंदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण रहे।
योगी सरकार ने जेलों में शिक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
योगी सरकार ने जेलों को दंड-स्थल से सुधार, शिक्षा और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित किया है। बंदियों को बोर्ड परीक्षाओं में शामिल कराना, अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना और कौशल विकास कार्यक्रम चलाना इसके प्रमुख उपाय हैं।
जेलों में शिक्षा से समाज को क्या फायदा होता है?
शिक्षित बंदियों के पुनः अपराध में लिप्त होने की संभावना कम होती है, जिससे समाज में अपराध दर घटती है। यह बंदियों को मुख्यधारा में पुनर्स्थापित करने और उनके परिवारों को स्थिरता देने में भी सहायक होता है।
राष्ट्र प्रेस
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