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मद्रास हाई कोर्ट का सवाल: शराब दुकानों जितनी फ़िक्र पहाड़ियों की क्यों नहीं?

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मद्रास हाई कोर्ट का सवाल: शराब दुकानों जितनी फ़िक्र पहाड़ियों की क्यों नहीं?

सारांश

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने पेरायुर की ओनन कराडु पहाड़ी पर खनन मामले में सरकार को घेरा — 'शराब की दुकानों जितनी चिंता पहाड़ियों की क्यों नहीं?' पुरातात्विक अवशेषों और भूजल स्रोत से समृद्ध इस पहाड़ी को बचाने की माँग पर राज्य को तीन सप्ताह में जवाब देना है।

मुख्य बातें

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने ओनन कराडु पहाड़ी पर अवैध पत्थर खनन मामले में तमिलनाडु सरकार से जवाब माँगा।
जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के.
रामकृष्णन की पीठ ने कहा — प्राकृतिक संरचनाएँ एक बार नष्ट हुईं तो दोबारा नहीं बनाई जा सकतीं।
याचिका नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने दाखिल की; पहाड़ी पुरातात्विक अवशेषों और भूजल पुनर्भरण का स्रोत है।
अदालत ने राज्य सरकार को विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित।

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने 7 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से तीखे सवाल पूछे — कि जब राज्य शराब की दुकानों की सुरक्षा पर इतनी सतर्कता बरतता है, तो प्राकृतिक पहाड़ियों के संरक्षण में वही तत्परता क्यों नहीं दिखती? अदालत पेरायुर के निकट ओनन कराडु पहाड़ी पर जारी अवैध पत्थर खनन को रोकने की माँग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका का आधार और पहाड़ी का महत्व

नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने मदुरै पीठ के समक्ष यह जनहित याचिका (PIL) दायर की। याचिका में बताया गया कि सलुप्पेन कराडु, ओनन कराडु और पेरुमल मलाई — ये तीनों पहाड़ियाँ पेरायुर इलाके के शंकरलिंगपुरम गाँव के निकट स्थित हैं।

इनमें सबसे महत्वपूर्ण ओनन कराडु है, जो पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। याचिकाकर्ता के अनुसार इस पहाड़ी पर प्राचीन सभ्यता के अवशेष मौजूद हैं, जो उस काल के लोगों की जीवन-शैली और दफ़नाने की परंपराओं का प्रमाण देते हैं। इसके अतिरिक्त, यह पहाड़ी प्राकृतिक जल संग्रह और भूजल पुनर्भरण के स्रोत के रूप में भी काम करती है।

खनन की अनुमति और याचिकाकर्ता की आपत्ति

याचिका में आरोप लगाया गया कि इतने संवेदनशील स्थल पर पत्थर की खदान चलाने की अनुमति दे दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि खनन गतिविधियाँ जारी रहीं तो पहाड़ी पर मौजूद सभी पुरातात्विक अवशेष स्थायी रूप से नष्ट हो जाएंगे।

उन्होंने अदालत से माँग की कि ओनन कराडु पर खनन तत्काल रोका जाए, क्योंकि यह स्थान पुरातात्विक, ऐतिहासिक और जैव-विविधता की दृष्टि से अपूरणीय महत्व रखता है।

अदालत की तीखी टिप्पणी

मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सीधे सवाल उठाए। पीठ ने कहा, 'सरकार शराब की दुकानों की सुरक्षा को लेकर तो चिंता दिखाती है, लेकिन पहाड़ियों की सुरक्षा को लेकर क्यों नहीं? ऐसी प्राकृतिक संरचनाओं को दोबारा नहीं बनाया जा सकता। अगर हम इनके प्रति बेपरवाह रहे तो क्या होगा?'

यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि यह महज़ पर्यावरण नीति की आलोचना नहीं है — यह राज्य की शासन-प्राथमिकताओं पर एक न्यायिक आईना है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में राज्य सरकार शराब व्यापार का संचालन सीधे करती है, और शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनाती एक स्थापित प्रशासनिक प्रथा है।

अदालत का निर्देश और आगे की सुनवाई

खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। सुनवाई की अगली तारीख तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में खनन गतिविधियों को लेकर न्यायालयों का हस्तक्षेप लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार का अगला कदम और हलफनामे का आधार यह तय करेगा कि ओनन कराडु पहाड़ी को संरक्षण मिलता है या खनन जारी रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए उन दुकानों की सुरक्षा उसके वित्तीय हित में है — पहाड़ियों की नहीं। ओनन कराडु जैसे स्थल पुरातात्विक, पारिस्थितिक और जलवायु की दृष्टि से अपूरणीय हैं, फिर भी खनन की अनुमति मिल जाती है। यह केवल तमिलनाडु की समस्या नहीं — यह पूरे देश में उस नीतिगत अंधेपन का प्रतिबिंब है जो विकास के नाम पर अपरिवर्तनीय प्राकृतिक संपदा की बलि देता रहता है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी किस मामले में की?
यह टिप्पणी पेरायुर के निकट ओनन कराडु पहाड़ी पर अवैध पत्थर खनन रोकने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने यह PIL मदुरै पीठ के समक्ष दाखिल की थी।
ओनन कराडु पहाड़ी इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
ओनन कराडु पहाड़ी पर प्राचीन काल के पुरातात्विक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवशेष मौजूद हैं, जो उस दौर के लोगों की जीवन-शैली और दफ़नाने की परंपराओं का प्रमाण देते हैं। यह पहाड़ी प्राकृतिक जल संग्रह और भूजल पुनर्भरण का भी महत्वपूर्ण स्रोत है।
अदालत ने सरकार को क्या निर्देश दिया?
मदुरै पीठ ने तमिलनाडु राज्य सरकार को मामले में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है।
इस मामले में याचिकाकर्ता की मुख्य माँग क्या है?
याचिकाकर्ता ने अदालत से माँग की है कि ओनन कराडु पहाड़ी पर तत्काल खनन गतिविधियाँ रोकी जाएँ। उनका तर्क है कि खनन जारी रहा तो पहाड़ी के सभी पुरातात्विक अवशेष स्थायी रूप से नष्ट हो जाएंगे और जैव-विविधता को अपूरणीय क्षति होगी।
इस मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। दोनों जजों ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए जवाबी हलफनामे का निर्देश दिया।
राष्ट्र प्रेस
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