मद्रास हाई कोर्ट का सवाल: शराब दुकानों जितनी फ़िक्र पहाड़ियों की क्यों नहीं?
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने 7 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से तीखे सवाल पूछे — कि जब राज्य शराब की दुकानों की सुरक्षा पर इतनी सतर्कता बरतता है, तो प्राकृतिक पहाड़ियों के संरक्षण में वही तत्परता क्यों नहीं दिखती? अदालत पेरायुर के निकट ओनन कराडु पहाड़ी पर जारी अवैध पत्थर खनन को रोकने की माँग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका का आधार और पहाड़ी का महत्व
नम्मलवार नेचर कंजर्वेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष पेथथानन ने मदुरै पीठ के समक्ष यह जनहित याचिका (PIL) दायर की। याचिका में बताया गया कि सलुप्पेन कराडु, ओनन कराडु और पेरुमल मलाई — ये तीनों पहाड़ियाँ पेरायुर इलाके के शंकरलिंगपुरम गाँव के निकट स्थित हैं।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण ओनन कराडु है, जो पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। याचिकाकर्ता के अनुसार इस पहाड़ी पर प्राचीन सभ्यता के अवशेष मौजूद हैं, जो उस काल के लोगों की जीवन-शैली और दफ़नाने की परंपराओं का प्रमाण देते हैं। इसके अतिरिक्त, यह पहाड़ी प्राकृतिक जल संग्रह और भूजल पुनर्भरण के स्रोत के रूप में भी काम करती है।
खनन की अनुमति और याचिकाकर्ता की आपत्ति
याचिका में आरोप लगाया गया कि इतने संवेदनशील स्थल पर पत्थर की खदान चलाने की अनुमति दे दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि खनन गतिविधियाँ जारी रहीं तो पहाड़ी पर मौजूद सभी पुरातात्विक अवशेष स्थायी रूप से नष्ट हो जाएंगे।
उन्होंने अदालत से माँग की कि ओनन कराडु पर खनन तत्काल रोका जाए, क्योंकि यह स्थान पुरातात्विक, ऐतिहासिक और जैव-विविधता की दृष्टि से अपूरणीय महत्व रखता है।
अदालत की तीखी टिप्पणी
मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस वेलमुरुगन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सीधे सवाल उठाए। पीठ ने कहा, 'सरकार शराब की दुकानों की सुरक्षा को लेकर तो चिंता दिखाती है, लेकिन पहाड़ियों की सुरक्षा को लेकर क्यों नहीं? ऐसी प्राकृतिक संरचनाओं को दोबारा नहीं बनाया जा सकता। अगर हम इनके प्रति बेपरवाह रहे तो क्या होगा?'
यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि यह महज़ पर्यावरण नीति की आलोचना नहीं है — यह राज्य की शासन-प्राथमिकताओं पर एक न्यायिक आईना है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में राज्य सरकार शराब व्यापार का संचालन सीधे करती है, और शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनाती एक स्थापित प्रशासनिक प्रथा है।
अदालत का निर्देश और आगे की सुनवाई
खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। सुनवाई की अगली तारीख तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में खनन गतिविधियों को लेकर न्यायालयों का हस्तक्षेप लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार का अगला कदम और हलफनामे का आधार यह तय करेगा कि ओनन कराडु पहाड़ी को संरक्षण मिलता है या खनन जारी रहता है।