13 अगस्त 2026
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पंचदारला हेरिटेज साइट के पास माइनिंग पर वाईएसआरसीपी का राज्यसभा में हंगामा, केंद्र से तत्काल दखल की मांग

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पंचदारला हेरिटेज साइट के पास माइनिंग पर वाईएसआरसीपी का राज्यसभा में हंगामा, केंद्र से तत्काल दखल की मांग

सारांश

पंचदारला में संरक्षित बौद्ध स्थल और प्राचीन मंदिर के पास खनन का मामला राज्यसभा तक पहुँचा। वाईएसआरसीपी ने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप माँगा और जाँच में स्वीकृत सीमा से दो लाख टन अधिक बजरी निकालने का खुलासा हुआ — हेरिटेज बनाम खनन की यह लड़ाई अब केंद्रीय टीम की रिपोर्ट पर टिकी है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी नेता वाईवी.
सुब्बा रेड्डी ने राज्यसभा में पंचदारला हेरिटेज क्षेत्र के पास माइनिंग का मुद्दा उठाया और केंद्र से तत्काल दखल की माँग की।
आधिकारिक जाँच में खुलासा हुआ कि स्वीकृत योजना से लगभग दो लाख टन अधिक बजरी निकाली गई है।
ब्लास्टिंग और माइनिंग से उत्पन्न कंपन का असर पाँच पवित्र जल धाराओं पर पड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्रियों जी.
किशन रेड्डी और गजेंद्र सिंह शेखावत ने 10 दिनों में केंद्रीय टीम की जाँच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ ने अनाकापल्ली सांसद की भूमिका की सीबीआई जाँच की माँग की।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के नेता वाईवी. सुब्बा रेड्डी ने 14 अगस्त 2026 को राज्यसभा में आंध्र प्रदेश के पंचदारला हेरिटेज क्षेत्र के निकट हो रही माइनिंग गतिविधियों का मुद्दा तीखे तेवरों के साथ उठाया और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने संरक्षित बौद्ध स्थल एवं प्राचीन धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर के आसपास बढ़ती खनन गतिविधियों को लेकर गहरी चिंता जताई।

मुख्य घटनाक्रम

मिनरल्स अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान सुब्बा रेड्डी ने सदन का ध्यान पंचदारला की उस विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की ओर दिलाया, जो मंदिर परिसर से निकलने वाली पाँच प्राकृतिक जल धाराओं से अभिन्न रूप से जुड़ी है। उन्होंने माँग की कि जब तक इलाके का पूर्ण निरीक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव का व्यापक आकलन और जल धाराओं का वैज्ञानिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन संपन्न न हो जाए, तब तक सभी माइनिंग गतिविधियाँ और उनसे जुड़ी योजनाएँ तत्काल प्रभाव से रोकी जाएँ।

उन्होंने यह भी माँग की कि क्षेत्र में दी गई सभी कानूनी एवं पर्यावरणीय मंजूरियों की विस्तृत जाँच की जाए।

अधिकारिक जाँच में चौंकाने वाले खुलासे

वाईएसआरसीपी सांसद अराकू की सांसद गुम्मा तनुजा रानी ने सदन को बताया कि केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पहले ही इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि दोनों मंत्रियों ने आश्वासन दिया है कि एक केंद्रीय जाँच टीम माइनिंग गतिविधियों की समीक्षा करेगी और रिपोर्ट के आधार पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू की जाएगी।

तनुजा रानी ने यह भी बताया कि आधिकारिक जाँच में पाया गया है कि माइनिंग और ब्लास्टिंग से उत्पन्न कंपन का सीधा असर पवित्र जल धाराओं पर पड़ रहा है। इससे भी गंभीर बात यह है कि स्वीकृत माइनिंग योजना से कहीं अधिक — लगभग दो लाख टन बजरी — अवैध रूप से निकाली जा चुकी है।

विपक्षी सांसदों की अन्य माँगें

इससे पहले वाईएसआरसीपी सांसद गोला बाबूराव, तनुजा रानी, पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ और अन्य नेताओं ने केंद्रीय मंत्रियों को माइनिंग के मुद्दे पर लिखित शिकायतें सौंपी थीं।

बाबूराव ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के नेता प्राकृतिक संसाधनों का बेतहाशा दोहन कर रहे हैं और पुराने विशाखापत्तनम जिले में पहाड़ियों तथा मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। गुडीवाड़ा अमरनाथ ने अनाकापल्ली सांसद सी.एम. की भूमिका की सीबीआई जाँच की माँग भी की।

खनन नीति पर व्यापक सवाल

मिनरल्स अमेंडमेंट बिल पर अपनी बात रखते हुए सुब्बा रेड्डी ने कहा कि खनिज संपदा जनता की है और इसके प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक विकास के लिए माइनिंग का एक स्पष्ट नियामक ढाँचा जरूरी है, लेकिन इससे राज्यों के राजस्व, स्थानीय लोगों की आजीविका या पर्यावरण संरक्षण से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि खनन अधिकारों का राष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक केंद्रीकरण जमीनी स्तर पर अवैध और पर्यावरण-विरोधी माइनिंग के खिलाफ राज्यों की कार्रवाई को कमजोर कर सकता है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में उठा है जब देशभर में हेरिटेज स्थलों के आसपास खनन गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर संसदीय बहस तेज हो रही है।

आगे क्या होगा

केंद्रीय मंत्रियों के आश्वासन के बाद अब सभी की निगाहें उस केंद्रीय जाँच टीम पर हैं जो पंचदारला में माइनिंग गतिविधियों की समीक्षा करेगी। 10 दिनों की समयसीमा में केंद्र की कार्रवाई यह तय करेगी कि हेरिटेज संरक्षण और खनन हितों के बीच संतुलन किस दिशा में जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या केंद्रीय टीम की रिपोर्ट वास्तविक कार्रवाई में बदलती है या महज एक और फाइल बनकर रह जाती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचदारला हेरिटेज साइट के पास माइनिंग विवाद क्या है?
आंध्र प्रदेश के पंचदारला क्षेत्र में संरक्षित बौद्ध स्थल और प्राचीन धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर के निकट माइनिंग गतिविधियाँ चल रही हैं। आधिकारिक जाँच में पाया गया है कि स्वीकृत योजना से लगभग दो लाख टन अधिक बजरी निकाली जा चुकी है और ब्लास्टिंग से मंदिर की पाँच पवित्र जल धाराएँ प्रभावित हो रही हैं।
वाईएसआरसीपी ने राज्यसभा में क्या माँगें रखीं?
वाईएसआरसीपी नेता वाईवी. सुब्बा रेड्डी ने माँग की कि जब तक इलाके का निरीक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और जल धाराओं का हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन पूरा न हो, तब तक सभी माइनिंग गतिविधियाँ रोकी जाएँ। साथ ही सभी कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरियों की जाँच की भी माँग की गई।
केंद्र सरकार ने इस मामले पर क्या कहा?
केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आश्वासन दिया है कि एक केंद्रीय जाँच टीम माइनिंग गतिविधियों की समीक्षा करेगी और रिपोर्ट के आधार पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग क्यों उठी?
पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ ने अनाकापल्ली सांसद सी.एम. की कथित भूमिका की सीबीआई जाँच की माँग की। वाईएसआरसीपी सांसद गोला बाबूराव ने आरोप लगाया कि राज्य की गठबंधन सरकार के नेता प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।
मिनरल्स अमेंडमेंट बिल 2026 और इस विवाद का क्या संबंध है?
राज्यसभा में मिनरल्स अमेंडमेंट बिल 2026 पर चर्चा के दौरान ही यह मुद्दा उठाया गया। वाईएसआरसीपी का तर्क है कि यह बिल खनन अधिकारों को अत्यधिक केंद्रीकृत करता है, जिससे राज्यों की अवैध माइनिंग के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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