पंचदर्ला अवैध खनन: वाईएसआरसीपी ने संसद में मुद्दा उठाने की चेतावनी दी, ₹250 करोड़ जुर्माने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 12 अगस्त को केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर चेतावनी दी कि यदि आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली ज़िले की पवित्र पहाड़ी पंचदर्ला को स्थायी 'नो-माइनिंग जोन' घोषित करने का सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ, तो पार्टी संसद में अवैध खनन का मुद्दा उठाएगी। पार्टी नेताओं के अनुसार, खनन गतिविधियों से पवित्र जल धाराएँ प्रभावित हो रही हैं और स्वीकृत योजना से लगभग दो लाख टन अतिरिक्त बजरी निकाली जा चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्यसभा सांसद गोला बाबूराव, अराकू सांसद गुम्मा तनुजा रानी, पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ, पूर्व विधायक करनम धर्मश्री और वाईएसआरसीपी अनाकापल्ली ज़िला अध्यक्ष बोड्डेटी प्रसाद ने केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर लिखित शिकायतें सौंपीं। गोला बाबूराव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य में गठबंधन सरकार के नेता प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं और पुराने विशाखापत्तनम ज़िले में पहाड़ियों तथा मंदिरों के आस-पास के इलाकों को बर्बाद किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पंचदर्ला को स्थायी सुरक्षा नहीं मिलती, पार्टी यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाती रहेगी।
केंद्रीय मंत्रियों का आश्वासन
तनुजा रानी ने बताया कि केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को स्थिति की जानकारी दी गई। दोनों मंत्रियों ने आश्वासन दिया कि एक केंद्रीय टीम खनन गतिविधियों की जाँच करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह आश्वासन कितना कारगर होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
जाँच में सामने आए तथ्य
पार्टी नेताओं के अनुसार, आधिकारिक जाँच में पाया गया है कि खनन और ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन का असर पंचदर्ला की पवित्र जल धाराओं पर पड़ रहा है। इसके अलावा, स्वीकृत खनन योजना की सीमा से अधिक लगभग दो लाख टन बजरी निकाली जा चुकी है — जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
गुडीवाड़ा अमरनाथ ने कहा कि नियमों के तहत इस अवैध खनन के लिए लगभग ₹250 करोड़ का जुर्माना बनता है। उन्होंने अनाकापल्ली सांसद सी.एम. रमेश की भूमिका की सीबीआई जाँच की माँग करते हुए कहा कि ज़िम्मेदारी केवल निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित करने से तय नहीं होती — रमेश को इस्तीफा देना चाहिए।
आंदोलन की आगे की राह
करनम धर्मश्री ने चेतावनी दी कि जब तक 'नो-माइनिंग जोन' का स्थायी सरकारी आदेश जारी नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। बोड्डेटी प्रसाद ने कहा कि पंचदर्ला से शुरू हुआ यह आंदोलन अब दिल्ली तक पहुँच चुका है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होने तक यह और तेज़ होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में खनन नीति और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। केंद्रीय टीम की जाँच रिपोर्ट और उस पर सरकार की प्रतिक्रिया इस विवाद की अगली दिशा तय करेगी।