सिंहस्थ कुंभ के लिए CM मोहन यादव का पुश्तैनी घर तोड़ा जाएगा, बोले— 'मुआवजा नहीं लेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों के तहत रविवार को तोड़े जाने वाले अपने पुश्तैनी घर में आखिरी बार पूजा-अर्चना की और स्पष्ट किया कि वे इस मकान के लिए कोई मुआवजा नहीं लेंगे। उनकी बहन कलावती के घर का एक हिस्सा भी इस विकास कार्य में बाधा बन रहा है। यह कदम उज्जैनवासियों के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ पूरे मोहल्ले के लोग अपने-अपने आशियाने स्वेच्छा से छोड़ रहे हैं।
पूजा-अर्चना और भावुक विदाई
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं अपने पुश्तैनी मकान पहुँचे और विधिवत पूजा-अर्चना की। यह वह घर है जो उनके पिता ने अपनी मेहनत से बनाया था और जिसमें मुख्यमंत्री का पूरा बचपन बीता। यादव ने इसे 'भावुक क्षण' बताया और कहा कि इस घर से उनकी जड़ें जुड़ी हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, 'यह मकान पिताजी ने अपनी मेहनत से बनाया था, जब हम आँख भी नहीं खोले थे तब से यह मकान है और इससे एक लगाव है। घर से बचपन की यादें जुड़ी हैं, थोड़ा भावुक क्षण है।'
नेता को खुद उदाहरण बनना चाहिए
मुख्यमंत्री यादव ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा, '1982 में साइंस कॉलेज से पहला चुनाव जीता — चाहे वह जॉइंट सेक्रेटरी का हो, प्रेसिडेंट का हो या विधायक का — उसके बाद जितने भी चुनाव लड़े, उन सभी का गवाह यह इलाका और यह घर रहा है।' उन्होंने जोड़ा कि यदि कोई नेता बना है तो उसे खुद उदाहरण बनना चाहिए।
उन्होंने संस्कारों का हवाला देते हुए कहा, 'हमारे माता-पिता ने हमें समाज के लिए जरूरी होने पर ऐसी चीजों के लिए तैयार रहने के संस्कार दिए हैं। कर्तव्य की वेदी पर हमें दृढ़ता से तैयार रहना चाहिए।'
मुआवजा न लेने का ऐलान
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, 'हम अपने घर का कोई मुआवजा नहीं लेंगे, इसकी जरूरत नहीं है। यह हमारी अपनी जिम्मेदारी है।' यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत बड़े पैमाने पर मकान और देवस्थान हटाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि उज्जैन की वर्तमान आबादी लगभग 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ कुंभ के दौरान दुनियाभर से 30-40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इतनी विशाल तादाद के लिए शहर के बुनियादी ढाँचे को नए सिरे से तैयार करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
सामूहिक सहभागिता और सरकार पर विश्वास
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि उज्जैन में बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों ने अपने-अपने देवस्थान और मकान स्वेच्छा से पीछे हटाए हैं। उन्होंने कहा, 'इसी से सरकार के प्रति लोगों का विश्वास बनता है। पूरे उज्जैन में बड़ा अच्छा संदेश जा रहा है।'
उन्होंने इस अभियान के लिए अपनी पार्टी और प्रधानमंत्री का भी आभार जताया और कहा कि राज्य में इस तरह के बड़े निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व की वजह से संभव हो पा रहे हैं। अवंतिका (उज्जैन का प्राचीन नाम) में लाखों वर्षों की आतिथ्य परंपरा का उल्लेख करते हुए यादव ने इसे एक गर्व का क्षण बताया।
आगे क्या
रविवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी होने के बाद सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों में और तेजी आने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री यादव की यह पहल आने वाले समय में अन्य निवासियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है और प्रशासन को स्वैच्छिक पुनर्वास में मदद मिल सकती है।