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सिंहस्थ कुंभ के लिए CM मोहन यादव का पुश्तैनी घर तोड़ा जाएगा, बोले— 'मुआवजा नहीं लेंगे'

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सिंहस्थ कुंभ के लिए CM मोहन यादव का पुश्तैनी घर तोड़ा जाएगा, बोले— 'मुआवजा नहीं लेंगे'

सारांश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के चलते अपना पुश्तैनी मकान तोड़े जाने से पहले वहाँ पूजा-अर्चना की और मुआवजा न लेने का ऐलान किया — एक ऐसा कदम जो उज्जैन में 30-40 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी में नेतृत्व की नज़ीर पेश करता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव का उज्जैन स्थित पुश्तैनी घर सिंहस्थ कुंभ विकास कार्यों के तहत रविवार को तोड़ा जाएगा।
उनकी बहन कलावती के घर का एक हिस्सा भी इस विकास कार्य की राह में आ रहा है।
मुख्यमंत्री ने ध्वस्तीकरण से पहले पुश्तैनी मकान में पूजा-अर्चना की और इसे भावुक क्षण बताया।
यादव ने स्पष्ट किया कि वे इस मकान के लिए कोई मुआवजा नहीं लेंगे ।
उज्जैन की आबादी 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ कुंभ में 30-40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
पूरे मोहल्ले के लोग स्वेच्छा से अपने मकान और देवस्थान पीछे हटा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों के तहत रविवार को तोड़े जाने वाले अपने पुश्तैनी घर में आखिरी बार पूजा-अर्चना की और स्पष्ट किया कि वे इस मकान के लिए कोई मुआवजा नहीं लेंगे। उनकी बहन कलावती के घर का एक हिस्सा भी इस विकास कार्य में बाधा बन रहा है। यह कदम उज्जैनवासियों के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ पूरे मोहल्ले के लोग अपने-अपने आशियाने स्वेच्छा से छोड़ रहे हैं।

पूजा-अर्चना और भावुक विदाई

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं अपने पुश्तैनी मकान पहुँचे और विधिवत पूजा-अर्चना की। यह वह घर है जो उनके पिता ने अपनी मेहनत से बनाया था और जिसमें मुख्यमंत्री का पूरा बचपन बीता। यादव ने इसे 'भावुक क्षण' बताया और कहा कि इस घर से उनकी जड़ें जुड़ी हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, 'यह मकान पिताजी ने अपनी मेहनत से बनाया था, जब हम आँख भी नहीं खोले थे तब से यह मकान है और इससे एक लगाव है। घर से बचपन की यादें जुड़ी हैं, थोड़ा भावुक क्षण है।'

नेता को खुद उदाहरण बनना चाहिए

मुख्यमंत्री यादव ने अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा, '1982 में साइंस कॉलेज से पहला चुनाव जीता — चाहे वह जॉइंट सेक्रेटरी का हो, प्रेसिडेंट का हो या विधायक का — उसके बाद जितने भी चुनाव लड़े, उन सभी का गवाह यह इलाका और यह घर रहा है।' उन्होंने जोड़ा कि यदि कोई नेता बना है तो उसे खुद उदाहरण बनना चाहिए।

उन्होंने संस्कारों का हवाला देते हुए कहा, 'हमारे माता-पिता ने हमें समाज के लिए जरूरी होने पर ऐसी चीजों के लिए तैयार रहने के संस्कार दिए हैं। कर्तव्य की वेदी पर हमें दृढ़ता से तैयार रहना चाहिए।'

मुआवजा न लेने का ऐलान

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, 'हम अपने घर का कोई मुआवजा नहीं लेंगे, इसकी जरूरत नहीं है। यह हमारी अपनी जिम्मेदारी है।' यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत बड़े पैमाने पर मकान और देवस्थान हटाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि उज्जैन की वर्तमान आबादी लगभग 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ कुंभ के दौरान दुनियाभर से 30-40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इतनी विशाल तादाद के लिए शहर के बुनियादी ढाँचे को नए सिरे से तैयार करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

सामूहिक सहभागिता और सरकार पर विश्वास

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि उज्जैन में बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों ने अपने-अपने देवस्थान और मकान स्वेच्छा से पीछे हटाए हैं। उन्होंने कहा, 'इसी से सरकार के प्रति लोगों का विश्वास बनता है। पूरे उज्जैन में बड़ा अच्छा संदेश जा रहा है।'

उन्होंने इस अभियान के लिए अपनी पार्टी और प्रधानमंत्री का भी आभार जताया और कहा कि राज्य में इस तरह के बड़े निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व की वजह से संभव हो पा रहे हैं। अवंतिका (उज्जैन का प्राचीन नाम) में लाखों वर्षों की आतिथ्य परंपरा का उल्लेख करते हुए यादव ने इसे एक गर्व का क्षण बताया।

आगे क्या

रविवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी होने के बाद सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों में और तेजी आने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री यादव की यह पहल आने वाले समय में अन्य निवासियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है और प्रशासन को स्वैच्छिक पुनर्वास में मदद मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि उज्जैन में बड़े पैमाने पर विस्थापित हो रहे आम निवासियों के पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और न्यायसंगत है। नेता का स्वैच्छिक बलिदान सरकारी तंत्र की जवाबदेही का विकल्प नहीं बन सकता। 30-40 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार करना निश्चित रूप से बड़ा काम है, पर जिन परिवारों की रोज़ी-रोटी और छत दोनों इस प्रक्रिया में जा रही है, उनकी आवाज़ें इस 'आदर्श उदाहरण' की कवरेज में प्रायः अनसुनी रह जाती हैं।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM मोहन यादव का पुश्तैनी घर क्यों तोड़ा जा रहा है?
सिंहस्थ कुंभ के विकास कार्यों के तहत उज्जैन में बुनियादी ढाँचे के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी बहन कलावती के घर का एक हिस्सा बाधक बन रहा है, इसलिए इसे तोड़ा जा रहा है। रविवार को यह ध्वस्तीकरण कार्रवाई की जाएगी।
CM मोहन यादव मुआवजा क्यों नहीं लेंगे?
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह उनकी अपनी जिम्मेदारी है और एक नेता को खुद उदाहरण बनना चाहिए। उन्होंने इसे समाज के प्रति कर्तव्य बताते हुए मुआवजे की जरूरत से इनकार किया।
सिंहस्थ कुंभ में कितने श्रद्धालु आने का अनुमान है?
अनुमान के अनुसार उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के दौरान दुनियाभर से 30 से 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, जबकि शहर की मौजूदा आबादी केवल 8 लाख है। इसी को देखते हुए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया जा रहा है।
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के लिए और क्या तैयारियाँ हो रही हैं?
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत बड़े पैमाने पर मकान और देवस्थान स्वेच्छा से हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार पूरे मोहल्ले के लोग बिना किसी भेदभाव के इस अभियान में शामिल हो रहे हैं।
मोहन यादव का उज्जैन से क्या राजनीतिक संबंध है?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1982 में उज्जैन के साइंस कॉलेज से अपना पहला चुनाव जीता था। उन्होंने कहा कि उनके जीते गए सभी चुनावों का गवाह यही इलाका और यही पुश्तैनी घर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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