12 अगस्त 2026
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पंचधारला खनन विवाद: वाईएसआरसीपी ने केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी से की हस्तक्षेप की मांग, बौद्ध धरोहर खतरे में

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पंचधारला खनन विवाद: वाईएसआरसीपी ने केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी से की हस्तक्षेप की मांग, बौद्ध धरोहर खतरे में

सारांश

वाईएसआरसीपी ने केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी से माँग की है कि पंचधारला में पहली सदी के बौद्ध स्थल और 10वीं सदी के मंदिर के निकट चल रही कथित अवैध खुदाई तुरंत रोकी जाए। ब्लास्टिंग से पुरातात्विक अवशेषों और भूजल प्रणाली को खतरा बताया जा रहा है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने 11 अगस्त को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी.
किशन रेड्डी से मिलकर पंचधारला के आसपास खनन रोकने की माँग की।
ASI -संरक्षित 'धनादिब्बालु' बौद्ध स्थल ( पहली सदी CE, सातवाहन काल ) और 'श्री धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर' ( 10वीं सदी CE ) के निकट बड़े पैमाने पर पत्थर निकालने का काम जारी बताया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि ब्लास्टिंग से पुरातात्विक अवशेष नष्ट हो सकते हैं और पंचधारला पहाड़ी की भूवैज्ञानिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
माँगों में खनन की तत्काल रोक, विशेषज्ञ टीम से जाँच और दोषियों पर कार्रवाई शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल में सांसद गोला बाबूराव , मेडा रघुनाधा रेड्डी , पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 11 अगस्त को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में पंचधारला के आसपास चल रही कथित अवैध और अनधिकृत बजरी खुदाई को तत्काल रोका जाए, ताकि सदियों पुराने ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित किया जा सके। पार्टी के एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात कर इस मामले में तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप की माँग रखी।

मुख्य घटनाक्रम

वाईएसआरसीपी प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान दो अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर स्थलों की ओर दिलाया — आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा संरक्षित 'धनादिब्बालु' बौद्ध पुरातात्विक स्थल और 'श्री धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर'। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इन दोनों स्थलों के खतरनाक निकट तक पत्थर निकालने का काम पहुँच चुका है।

गौरतलब है कि 'धनादिब्बालु' बौद्ध स्थल पहली सदी (CE) के सातवाहन काल का है, जबकि 'श्री धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर' 10वीं सदी (CE) का ऐतिहासिक मंदिर है। दोनों स्थल पुरातात्विक और सांस्कृतिक दृष्टि से अमूल्य विरासत माने जाते हैं।

खनन से धरोहर को खतरा

प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि अंधाधुंध खुदाई और ब्लास्टिंग से बौद्ध स्थल पर मौजूद पुरातात्विक अवशेषों को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है। इसके अलावा, सदियों पुराने मंदिर की संरचनात्मक अखंडता भी खतरे में पड़ सकती है।

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इन खनन गतिविधियों से पंचधारला पहाड़ी की भूवैज्ञानिक स्थिरता बिगड़ने और क्षेत्र की भूजल तथा प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की भी आशंका है।

वाईएसआरसीपी की माँगें

प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार के समक्ष तीन प्रमुख माँगें रखीं — पहली, पत्थर निकालने की सभी गतिविधियों को तत्काल रोका जाए; दूसरी, विशेषज्ञों की एक टीम गठित की जाए जो स्थल का निरीक्षण करे और यह जाँचे कि खनन कार्य तय सीमाओं, मंजूर गहराई या निर्धारित मात्रा से अधिक हुआ है या नहीं; तीसरी, नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रतिनिधिमंडल में कौन थे शामिल

वाईएसआरसीपी प्रतिनिधिमंडल में सांसद गोला बाबूराव, मेडा रघुनाधा रेड्डी, गुम्मा तनुजा रानी और मड्डिला गुरुमूर्ति, पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ तथा पार्टी नेता करणम धर्मश्री शामिल थे।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में विरासत स्थलों के संरक्षण को लेकर बहस पहले से तेज है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों की टीम के गठन और खनन वैधता की जाँच पर केंद्र का अगला कदम इस विवाद की दिशा तय करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचधारला खनन विवाद क्या है?
विशाखापत्तनम जिले के पंचधारला क्षेत्र में ASI-संरक्षित 'धनादिब्बालु' बौद्ध स्थल और 'श्री धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर' के निकट कथित तौर पर अवैध और अनधिकृत बजरी व पत्थर खुदाई हो रही है। वाईएसआरसीपी का आरोप है कि यह खनन संरक्षित सीमाओं का उल्लंघन कर रहा है और धरोहर स्थलों को नुकसान पहुँचा रहा है।
धनादिब्बालु बौद्ध स्थल कितना पुराना है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
'धनादिब्बालु' बौद्ध स्थल पहली सदी (CE) के सातवाहन काल का है और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा संरक्षित है। यह दक्षिण भारत की प्रारंभिक बौद्ध सभ्यता का महत्वपूर्ण साक्ष्य है, जिसके पुरातात्विक अवशेष अमूल्य ऐतिहासिक जानकारी देते हैं।
वाईएसआरसीपी ने केंद्र से क्या-क्या माँगें रखी हैं?
पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पंचधारला में सभी खनन गतिविधियों की तत्काल रोक, स्थल की जाँच के लिए विशेषज्ञ टीम का गठन, और नियमों का उल्लंघन सिद्ध होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई।
इस खनन से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, गहरी खुदाई और ब्लास्टिंग से बौद्ध स्थल के पुरातात्विक अवशेष नष्ट हो सकते हैं, 10वीं सदी के मंदिर की संरचना कमजोर हो सकती है, पंचधारला पहाड़ी की भूवैज्ञानिक स्थिरता बिगड़ सकती है और क्षेत्र की भूजल व जल निकासी प्रणाली पर बुरा असर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार ने इस माँग पर अब तक क्या कदम उठाए हैं?
अभी तक केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वाईएसआरसीपी प्रतिनिधिमंडल ने 11 अगस्त को उनसे मुलाकात की और तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया; आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
राष्ट्र प्रेस
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