पंचधारला खनन विवाद: वाईएसआरसीपी ने केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी से की हस्तक्षेप की मांग, बौद्ध धरोहर खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 11 अगस्त को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में पंचधारला के आसपास चल रही कथित अवैध और अनधिकृत बजरी खुदाई को तत्काल रोका जाए, ताकि सदियों पुराने ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित किया जा सके। पार्टी के एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात कर इस मामले में तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप की माँग रखी।
मुख्य घटनाक्रम
वाईएसआरसीपी प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान दो अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर स्थलों की ओर दिलाया — आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा संरक्षित 'धनादिब्बालु' बौद्ध पुरातात्विक स्थल और 'श्री धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर'। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इन दोनों स्थलों के खतरनाक निकट तक पत्थर निकालने का काम पहुँच चुका है।
गौरतलब है कि 'धनादिब्बालु' बौद्ध स्थल पहली सदी (CE) के सातवाहन काल का है, जबकि 'श्री धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर' 10वीं सदी (CE) का ऐतिहासिक मंदिर है। दोनों स्थल पुरातात्विक और सांस्कृतिक दृष्टि से अमूल्य विरासत माने जाते हैं।
खनन से धरोहर को खतरा
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि अंधाधुंध खुदाई और ब्लास्टिंग से बौद्ध स्थल पर मौजूद पुरातात्विक अवशेषों को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है। इसके अलावा, सदियों पुराने मंदिर की संरचनात्मक अखंडता भी खतरे में पड़ सकती है।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इन खनन गतिविधियों से पंचधारला पहाड़ी की भूवैज्ञानिक स्थिरता बिगड़ने और क्षेत्र की भूजल तथा प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की भी आशंका है।
वाईएसआरसीपी की माँगें
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार के समक्ष तीन प्रमुख माँगें रखीं — पहली, पत्थर निकालने की सभी गतिविधियों को तत्काल रोका जाए; दूसरी, विशेषज्ञों की एक टीम गठित की जाए जो स्थल का निरीक्षण करे और यह जाँचे कि खनन कार्य तय सीमाओं, मंजूर गहराई या निर्धारित मात्रा से अधिक हुआ है या नहीं; तीसरी, नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रतिनिधिमंडल में कौन थे शामिल
वाईएसआरसीपी प्रतिनिधिमंडल में सांसद गोला बाबूराव, मेडा रघुनाधा रेड्डी, गुम्मा तनुजा रानी और मड्डिला गुरुमूर्ति, पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ तथा पार्टी नेता करणम धर्मश्री शामिल थे।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में विरासत स्थलों के संरक्षण को लेकर बहस पहले से तेज है। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों की टीम के गठन और खनन वैधता की जाँच पर केंद्र का अगला कदम इस विवाद की दिशा तय करेगा।