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राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 26 में जीडीपी का 4.4%, लक्ष्य पर खरी उतरी केंद्र सरकार

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राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 26 में जीडीपी का 4.4%, लक्ष्य पर खरी उतरी केंद्र सरकार

सारांश

भारत का वित्त वर्ष 2026 का राजकोषीय घाटा ₹15.19 लाख करोड़ यानी जीडीपी का 4.4% रहा — ठीक बजट लक्ष्य पर। राजस्व घाटा 1.7% से घटकर 1.55% हुआ और पूंजीगत खर्च लक्ष्य का 97.6% हासिल हुआ। वित्त वर्ष 27 के लिए घाटे का लक्ष्य 4.3% तय किया गया है।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4% यानी ₹15.19 लाख करोड़ रहा — बजट लक्ष्य के अनुरूप।
राजस्व घाटा वित्त वर्ष 25 के 1.7% से घटकर वित्त वर्ष 26 में 1.55% हो गया।
पूंजीगत व्यय ₹10.69 लाख करोड़ रहा — संशोधित लक्ष्य का 97.6% ।
शुद्ध कर राजस्व ₹26.2 लाख करोड़ ; सकल कर राजस्व ₹40.2 लाख करोड़ रहा।
राज्यों को वित्त वर्ष 26 में ₹13.9 लाख करोड़ हस्तांतरित किए गए।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3% निर्धारित।

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) ने 2 जून 2026 को जारी आँकड़ों में बताया कि भारत का वित्त वर्ष 2025-26 का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा, जो केंद्र सरकार के बजट में निर्धारित लक्ष्य के ठीक अनुरूप है। मूल्य के लिहाज़ से यह घाटा ₹15.19 लाख करोड़ रहा। इस उपलब्धि को राजकोषीय समेकन की दिशा में सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है।

राजकोषीय घाटा क्या है और यह क्यों अहम है

राजकोषीय घाटा किसी वित्त वर्ष में सरकार के कुल खर्च और कुल आय के बीच के अंतर को दर्शाता है। जब यह घाटा बजट लक्ष्य के दायरे में रहता है, तो यह संकेत देता है कि सरकार ने अपनी उधारी और व्यय को अनुशासित तरीके से प्रबंधित किया है। वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत का यह आँकड़ा निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

राजस्व घाटे में उल्लेखनीय सुधार

वित्त वर्ष 2026 में राजस्व घाटा घटकर जीडीपी का 1.55 प्रतिशत रह गया, जो वित्त वर्ष 2025 के 1.7 प्रतिशत से कम है। राजस्व घाटा सरकार के राजस्व व्यय और राजस्व प्राप्तियों के बीच का अंतर होता है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट को सार्वजनिक वित्त की गुणवत्ता में सुधार माना जाता है — यह दर्शाता है कि सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा दैनिक परिचालन व्यय के बजाय पूंजी निर्माण की ओर मोड़ा जा रहा है।

पूंजीगत खर्च और कर राजस्व का प्रदर्शन

केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026 में पूंजीगत खर्च के लक्ष्य के करीब रही। वास्तविक पूंजीगत व्यय ₹10.69 लाख करोड़ रहा, जो संशोधित लक्ष्य ₹10.96 लाख करोड़ का 97.6 प्रतिशत है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने पूंजीगत व्यय का लक्ष्य ₹12.2 लाख करोड़ रखा है, जो पिछले वर्ष के वास्तविक आँकड़े से 14.1 प्रतिशत अधिक है।

कर राजस्व के मोर्चे पर, शुद्ध कर राजस्व ₹26.2 लाख करोड़ रहा, जो संशोधित अनुमान का 98 प्रतिशत है। हालाँकि, सकल कर राजस्व ₹40.2 लाख करोड़ रहा, जो संशोधित अनुमान ₹40.8 लाख करोड़ से कुछ कम है। केंद्र ने राज्यों को वित्त वर्ष 2026 में ₹13.9 लाख करोड़ हस्तांतरित किए।

आगे की राह: वित्त वर्ष 27 का लक्ष्य

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3 प्रतिशत निर्धारित किया है — यानी एक और कदम नीचे। यह क्रमिक समेकन की नीति को दर्शाता है जिसे सरकार पिछले कुछ वर्षों से अपना रही है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2024 में यह घाटा 5.6 प्रतिशत था, जो तब से लगातार कम होता आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि पूंजीगत व्यय का 97.6% हासिल होने के बावजूद ज़मीनी बुनियादी ढाँचे पर इसका असर कहाँ दिखा। सकल कर राजस्व का संशोधित अनुमान से कम रहना — ₹40.2 लाख करोड़ बनाम ₹40.8 लाख करोड़ — यह संकेत देता है कि राजस्व पक्ष पर दबाव बना हुआ है। वित्त वर्ष 27 में 4.3% का लक्ष्य तभी टिकाऊ होगा जब कर आधार का विस्तार हो और राज्यों को हस्तांतरण के साथ केंद्रीय व्यय की गुणवत्ता दोनों बनी रहें।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का वित्त वर्ष 2026 का राजकोषीय घाटा कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत यानी ₹15.19 लाख करोड़ रहा। यह आँकड़ा केंद्र सरकार के बजट में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप है, जैसा कि CGA ने जारी किया।
राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा में क्या अंतर है?
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और कुल आय के बीच का अंतर है, जबकि राजस्व घाटा केवल राजस्व व्यय और राजस्व प्राप्तियों के बीच का अंतर दर्शाता है। वित्त वर्ष 26 में राजस्व घाटा 1.55% रहा, जो पिछले वर्ष के 1.7% से कम है।
वित्त वर्ष 2026 में सरकार का पूंजीगत खर्च कितना रहा?
वित्त वर्ष 2026 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय ₹10.69 लाख करोड़ रहा, जो संशोधित लक्ष्य ₹10.96 लाख करोड़ का 97.6 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 27 के लिए यह लक्ष्य बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है।
वित्त वर्ष 27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य क्या है?
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत निर्धारित किया है, जो वित्त वर्ष 26 के 4.4 प्रतिशत से एक पायदान नीचे है। यह राजकोषीय समेकन की क्रमिक नीति को दर्शाता है।
राजस्व घाटे में कमी क्यों सकारात्मक मानी जाती है?
राजस्व घाटे में कमी यह दर्शाती है कि सरकारी खर्च का अधिक हिस्सा दैनिक परिचालन व्यय के बजाय पूंजी निर्माण — जैसे सड़क, बंदरगाह, रेलवे — पर खर्च हो रहा है। इसे सार्वजनिक वित्त की गुणवत्ता में सुधार का सूचक माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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