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क्या बजट 2026 में पूंजीगत व्यय 15 प्रतिशत बढ़ेगा, राजकोषीय घाटा 4.2 प्रतिशत पर रहेगा?

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क्या बजट 2026 में पूंजीगत व्यय 15 प्रतिशत बढ़ेगा, राजकोषीय घाटा 4.2 प्रतिशत पर रहेगा?

सारांश

क्या भारत का बजट 2026 पूंजीगत व्यय में वृद्धि और राजकोषीय घाटे के नए मानक स्थापित करेगा? जानें इस रिपोर्ट में संभावनाएं और सरकार की नीति के प्रभाव।

मुख्य बातें

बजट 2026 में पूंजीगत व्यय 15 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है।
राजकोषीय घाटा 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
सरकार दीर्घकालिक संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्राथमिकता रहेगी।
ब्याज भुगतान एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सरकार केंद्रीय बजट 2026 में कुल मिलाकर लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रही है। इस बजट में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर), जैसे कि सड़कें, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे पर होने वाला खर्च लगभग 15 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। सरकार का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 4.2 प्रतिशत रहने की संभावना है।

गुरुवार को जारी निवेश प्रबंधन फर्म ओमनीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 9 प्रतिशत नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के आधार पर वित्त वर्ष 2027 में कर राजस्व में साल-दर-साल लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स के अलावा होने वाली आय भी करीब 10 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह सरकारी कंपनियों से होने वाला लाभ और लाभांश सामान्य स्तर पर रहना है। इस अनुमान में आरबीआई से किसी खास अतिरिक्त राशि को शामिल नहीं किया गया है।

वहीं, सरकार के उधार में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, जो साल-दर-साल करीब 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा 4.1 से 4.2 प्रतिशत के बीच रह सकता है, जो सरकार की घाटा कम करने की नीति के अनुरूप है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में केंद्रीय बजट का स्वरूप काफी बदला है। वित्त वर्ष 2016 में कुल बजट का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत व्यय पर जाता था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 30.6 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है।

पूंजीगत व्यय में लगातार बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि सरकार अब लंबे समय की संपत्तियां बनाने और भविष्य की आर्थिक वृद्धि पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

पिछले दस वर्षों में पूंजीगत व्यय औसतन 15 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ा है, जबकि रोजमर्रा के खर्च यानी राजस्व खर्च की वृद्धि दर करीब 8.8 प्रतिशत रही है।

इसका मतलब है कि सरकार सिर्फ खर्च बढ़ाने की बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, कामकाज की क्षमता बढ़ाने और निजी निवेश को आकर्षित करने पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

अनुमानित पूंजीगत व्यय में राज्यों को दी जाने वाली सहायता और पूंजीगत संपत्तियों के लिए अनुदान भी शामिल हैं। वित्त वर्ष 2027 में कुल सार्वजनिक पूंजीगत व्यय करीब 17 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास को मजबूती मिलेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, बजट में रक्षा और मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च सरकार की प्राथमिकता बना रहेगा। हालांकि, धीरे-धीरे तकनीक, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान बढ़ाया जा सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्याज भुगतान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिससे खर्च में ज्यादा लचीलापन रखना आसान नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा। ऐसे में, यह बजट आने वाले वर्षों में स्थिरता और विकास का आधार बन सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बजट 2026 में पूंजीगत व्यय में वृद्धि का क्या महत्व है?
पूंजीगत व्यय में वृद्धि से बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।
राजकोषीय घाटा क्या होता है?
राजकोषीय घाटा उस स्थिति को दर्शाता है जब सरकार की खर्च की राशि उसकी आय से अधिक होती है।
राष्ट्र प्रेस
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