22 सितंबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने फरार खदान कारोबारी तुलु मंडल की गिरफ्तारी सुरक्षा याचिका खारिज की

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने फरार खदान कारोबारी तुलु मंडल की गिरफ्तारी सुरक्षा याचिका खारिज की

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने फरार खदान कारोबारी तुलु मंडल की संरक्षण याचिका ठुकरा दी। राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड के अनुसार वह 23 मई को देश छोड़ चुका है। ₹220 करोड़ की संपत्ति जब्त, 400 बीघा भूमि चिह्नित, और इंटरपोल नोटिस जारी — मामला अब और गहरा होता जा रहा है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 22 सितंबर 2026 को फरार कारोबारी तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन की अंतरिम संरक्षण याचिका खारिज की।
राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड के अनुसार, मंडल 23 मई को देश छोड़कर फरार हो गया था।
पुलिस ने मंडल की ₹220 करोड़ की संपत्ति (नकदी और सोना) पहले ही जब्त कर ली है।
जाँचकर्ताओं ने लगभग 400 बीघा (करीब 125 एकड़) भूमि का भी पता लगाया है।
बीरभूम जिला न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट के अलावा इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी।
कुछ राज्य सरकारी अधिकारी भी कर चोरी मामले में जाँच के दायरे में आए।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 22 सितंबर 2026 को फरार पत्थर खदान कारोबारी तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन की अंतरिम संरक्षण याचिका खारिज कर दी। याचिका में उन्होंने पुलिस की कठोर कार्रवाई और बीरभूम जिला न्यायालय द्वारा पहले जारी गिरफ्तारी वारंट के अमल से राहत की मांग की थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया।

अदालत में क्या हुआ

मंगलवार दोपहर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई हुई। राज्य सरकार के वकील ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी 23 मई को देश छोड़कर फरार हो गया था। वकील ने कहा, 'राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड से हमें पता चला है कि आरोपी 23 मई को देश छोड़कर चला गया था। उस पर लगे आरोप काफी गंभीर हैं, इसलिए वह अभी फरार है। अगर उसे अभी अंतरिम सुरक्षा दी जाती है, तो वह ऐसे अपराध दोहरा सकता है।' न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने राज्य पुलिस की प्रगति रिपोर्ट का अध्ययन किया और इसके बाद याचिका खारिज कर दी।

संपत्ति जब्ती और जाँच का दायरा

पुलिस अब तक मंडल की ₹220 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है, जिसमें नकदी और सोना शामिल हैं। हालांकि जाँच अधिकारियों का मानना है कि यह उनकी कुल संपत्ति का एक छोटा हिस्सा मात्र हो सकता है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, लगभग 400 बीघा (करीब 125 एकड़) भूमि भी चिह्नित की गई है, जो मंडल के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्वामित्व में बताई जाती है।

कर चोरी का आरोप और राज्य अधिकारियों पर नज़र

जाँचकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल के दौरान पत्थर खदानों द्वारा नकली कार्बन कॉपी के उपयोग से करोड़ों रुपए की राज्य कर चोरी से जुड़ी विशिष्ट जानकारी जुटाई है। सूत्रों के अनुसार, इस कर चोरी प्रक्रिया में शामिल कुछ राज्य सरकारी अधिकारी भी जाँच के दायरे में आ गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बीरभूम जिले में खनन से जुड़े अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

इंटरपोल नोटिस और गिरफ्तारी वारंट

बीरभूम जिला न्यायालय द्वारा पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है और निचली अदालत ने आरोपी को 14 सितंबर को पेश होने का निर्देश दिया था, जिसका उन्होंने पालन नहीं किया। इसके अतिरिक्त, मंडल के विरुद्ध इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है, जिससे उनकी अंतर्राष्ट्रीय तलाश का दायरा व्यापक हो गया है।

आगे की राह

कलकत्ता हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मंडल की कानूनी राहत की संभावनाएँ और सीमित हो गई हैं। इंटरपोल नोटिस और जिला वारंट के सक्रिय रहते हुए जाँच एजेंसियाँ उनकी वापसी और गिरफ्तारी के प्रयास जारी रखेंगी। विश्लेषकों के अनुसार, संपत्ति जब्ती का दायरा आगे और बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जाँच एजेंसियाँ इसे कहाँ तक खींचती हैं।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलु मंडल कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पत्थर खदान कारोबारी हैं। उन पर नकली कार्बन कॉपी के ज़रिए राज्य कर चोरी और अन्य गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोप हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड के अनुसार आरोपी 23 मई को देश छोड़ चुका है और आरोप गंभीर हैं। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पुलिस की प्रगति रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अंतरिम संरक्षण देने से इनकार कर दिया।
तुलु मंडल की कितनी संपत्ति जब्त हुई है?
पुलिस ने अब तक मंडल की ₹220 करोड़ की संपत्ति जब्त की है, जिसमें नकदी और सोना शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 400 बीघा (करीब 125 एकड़) भूमि भी चिह्नित की गई है, जो उनके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्वामित्व में बताई जाती है।
इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस क्या होता है और इसका क्या असर होगा?
इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस किसी फरार व्यक्ति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ढूँढने और गिरफ्तार करने के लिए जारी किया जाता है। इससे मंडल के लिए किसी भी सदस्य देश में बिना कानूनी कार्रवाई के रहना बेहद कठिन हो जाता है।
क्या इस मामले में राज्य सरकारी अधिकारी भी जाँच के दायरे में हैं?
सूत्रों के अनुसार, खदानों की कर चोरी प्रक्रिया में भागीदार रहे कुछ राज्य सरकारी अधिकारी भी जाँच के दायरे में आए हैं। हालांकि अभी तक किसी अधिकारी का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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