कीर्ति आजाद को सुप्रीम कोर्ट से झटका: जबरन वसूली मामले में याचिका पर सुनवाई से इनकार, अर्जी वापस ली
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 नवंबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर कीर्ति आजाद की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनके वकील ने अर्जी वापस ले ली। कीर्ति आजाद ने अपने खिलाफ दर्ज कथित जबरन वसूली के मामले को चुनौती देते हुए अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया इनकार
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह इस याचिका पर सुनवाई की अनुमति इसलिए नहीं देगा क्योंकि गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण की मांग को लेकर कीर्ति आजाद की अर्जी पहले से ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित है। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय उन्हें पहले ही अंतरिम राहत दे चुका है।
इस पर कीर्ति आजाद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि वे याचिका वापस ले रहे हैं। गौरतलब है कि जब उच्च न्यायालय किसी मामले में पहले से ही संज्ञान ले चुका हो और राहत प्रदान कर चुका हो, तो सर्वोच्च न्यायालय आमतौर पर समानांतर अनुच्छेद 32 याचिकाओं पर सुनवाई से परहेज करता है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय से मिली राहत
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में कीर्ति आजाद को कथित जबरन वसूली के मामले में छह महीने तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। यह संरक्षण अभी भी प्रभावी है और उनकी अर्जी उच्च न्यायालय में विचाराधीन बनी रहेगी।
मामले की पृष्ठभूमि
कीर्ति आजाद पर एक कारोबारी को धमकाने, उनसे कथित तौर पर जबरन वसूली की रकम माँगने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप हैं। इस संदर्भ में पश्चिम बंगाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। आरोप अभी कथित तौर पर हैं और न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं।
कीर्ति आजाद: राजनीति और क्रिकेट का संगम
कीर्ति आजाद वर्तमान में पश्चिम बंगाल की बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद हैं। क्रिकेट में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है — वे 1983 के ऐतिहासिक विश्व कप विजेता भारतीय दल के सदस्य रहे हैं और उन्होंने 7 टेस्ट तथा 25 वनडे मैच खेले। उनका टेस्ट डेब्यू 1981 में वेलिंगटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुआ था।
राजनीति उनके लिए विरासत में आई — उनके पिता भागवत झा आजाद स्वतंत्रता सेनानी, केंद्रीय मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके थे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक कानूनी विवाद लगातार सुर्खियों में हैं।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय से याचिका वापस लेने के बाद अब कीर्ति आजाद का मामला पूरी तरह कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष है। छह महीने का अंतरिम संरक्षण तब तक प्रभावी रहेगा जब तक उच्च न्यायालय अंतिम फैसला नहीं सुनाता। मामले की अगली सुनवाई की तारीख अभी सामने नहीं आई है।