13 अक्टूबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की जांच-खबरों पर रोक वाली याचिका की तत्काल सुनवाई से किया इनकार

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की जांच-खबरों पर रोक वाली याचिका की तत्काल सुनवाई से किया इनकार

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की वह याचिका तत्काल नहीं सुनी, जिसमें जांच एजेंसियों द्वारा मीडिया को लीक की जा रही जानकारियों पर रोक माँगी गई थी। CBI, ED और CID की जांच झेल रहे बनर्जी का 'मीडिया ट्रायल' का आरोप अब नवंबर-दिसंबर तक टला।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर 2026 को अभिषेक बनर्जी की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा कि सुनवाई नियमित वाद सूची के अनुसार, संभवतः नवंबर या दिसंबर 2026 में होगी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि CBI, ED और CID जांच से जुड़ी जानकारियाँ मीडिया को लीक कर रहे हैं।
इससे पहले न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था।
याचिका में निजता के अधिकार और प्रतिष्ठा को नुकसान का हवाला देते हुए जांच-संबंधी खबरों पर रोक की माँग की गई है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनके विरुद्ध चल रही विभिन्न राज्य एवं केंद्रीय एजेंसियों की जांच से संबंधित खबरों के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका पर सुनवाई नियमित वाद सूची के अनुसार होगी, जो संभवतः नवंबर या दिसंबर 2026 में निर्धारित होगी।

मुख्य घटनाक्रम

पिछले सप्ताह अभिषेक बनर्जी ने न्यायमूर्ति कृष्ण राव की अध्यक्षता वाली एकल पीठ के समक्ष यह याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति राव ने मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया, हालांकि याचिका खारिज नहीं की और बनर्जी को उचित पीठ के समक्ष जाने की सलाह दी। इसके बाद बनर्जी के वकील ने न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई की माँग की, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

याचिका में क्या दलीलें दी गईं

अभिषेक बनर्जी के वकील का तर्क था कि जांच एजेंसियाँ पूछताछ के दौरान पूछे गए सवालों सहित संवेदनशील जानकारियाँ मीडिया को लीक कर रही हैं, जिससे उनके मुवक्किल को कथित तौर पर 'मीडिया ट्रायल' का सामना करना पड़ रहा है। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्राओं और निजी मामलों से जुड़ी जानकारियाँ भी सार्वजनिक हो रही हैं, जिनका जांच से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। याचिका में कहा गया है कि इस प्रकार की खबरों के प्रकाशन से उनके निजता के अधिकार, गरिमा और प्रतिष्ठा का उल्लंघन हो रहा है।

जांच एजेंसियों की पृष्ठभूमि

अभिषेक बनर्जी पिछले कुछ समय से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर रहे हैं। इस वर्ष की शुरुआत में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के पश्चात आपराधिक जांच विभाग (CID) समेत राज्य की अन्य एजेंसियों ने भी उनसे जुड़े मामलों में जांच शुरू कर दी। CID अधिकारी डायमंड हार्बर के सांसद से कई बार पूछताछ कर चुके हैं।

अदालत का रुख

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने तत्काल सुनवाई की माँग को स्वीकार नहीं करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मामले को सूची से बाहर रखकर प्राथमिकता से सुनना संभव नहीं है। अदालत ने कोई अंतरिम राहत या स्थगन आदेश भी नहीं दिया। यह ऐसे समय में आया है जब प्रेस की स्वतंत्रता और किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार के बीच संतुलन से जुड़े मुद्दे न्यायिक बहस के केंद्र में हैं।

आगे की राह

याचिका पर अब नियमित प्रक्रिया के तहत वाद सूची में शामिल होने के बाद सुनवाई होगी। गौरतलब है कि जब तक अदालत इस याचिका पर कोई आदेश नहीं देती, तब तक जांच से संबंधित खबरों के प्रकाशन पर कोई कानूनी रोक लागू नहीं होगी। यह मामला मीडिया रिपोर्टिंग, जांच की गोपनीयता और सार्वजनिक हस्तियों के निजता के अधिकार के बीच की जटिल सीमारेखा को भी उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जांच-खबरों पर व्यापक रोक लगाने की माँग प्रेस की स्वतंत्रता और जनहित के नज़रिये से गंभीर सवाल उठाती है। यह भी उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य एजेंसियाँ भी सक्रिय हुई हैं — जो दर्शाता है कि जांच का दायरा अब केवल केंद्रीय एजेंसियों तक सीमित नहीं है। अदालत का तत्काल सुनवाई से इनकार करना संकेत देता है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों में जल्दबाज़ी में हस्तक्षेप के प्रति सतर्क है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में क्या याचिका दायर की थी?
अभिषेक बनर्जी ने याचिका दायर कर उनके विरुद्ध चल रही राज्य एवं केंद्रीय एजेंसियों की जांच से संबंधित खबरों के प्रकाशन पर रोक लगाने की माँग की थी। उनके वकील का आरोप है कि जांच एजेंसियाँ संवेदनशील जानकारियाँ मीडिया को लीक कर रही हैं, जिससे उन्हें 'मीडिया ट्रायल' का सामना करना पड़ रहा है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से क्यों इनकार किया?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मामले की तत्काल सुनवाई संभव नहीं है और यह याचिका नियमित वाद सूची में शामिल होगी। अदालत ने कोई अंतरिम आदेश या राहत भी नहीं दी।
अब इस याचिका पर सुनवाई कब होगी?
अदालत की वाद सूची के अनुसार, इस याचिका पर नवंबर या दिसंबर 2026 में सुनवाई होने की संभावना है। तब तक जांच-संबंधी खबरों पर कोई कानूनी रोक लागू नहीं होगी।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कौन-सी एजेंसियाँ जांच कर रही हैं?
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले से ही अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विभिन्न मामलों में जांच कर रहे हैं। इस वर्ष पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने भी जांच शुरू की और उनसे कई बार पूछताछ की है।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने मामले से खुद को क्यों अलग किया?
न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने बिना कारण सार्वजनिक किए इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया, हालांकि याचिका खारिज नहीं की। उन्होंने अभिषेक बनर्जी को उचित पीठ के समक्ष जाने की सलाह दी, जिसके बाद वकील न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के पास पहुँचे।
राष्ट्र प्रेस
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