15 अक्टूबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की मीडिया रोक याचिका वेकेशन बेंच को भेजने से किया इनकार

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की मीडिया रोक याचिका वेकेशन बेंच को भेजने से किया इनकार

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका को वेकेशन बेंच के पास भेजने से इनकार करते हुए साफ कह दिया — वेकेशन बेंच 'डंपिंग ग्राउंड' नहीं है। CBI, ED और अब राज्य CID की जांच झेल रहे TMC सांसद को अब दिसंबर तक इंतजार करना होगा।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को अभिषेक बनर्जी की याचिका वेकेशन बेंच को भेजने से इनकार किया।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि वेकेशन बेंच कोई 'डंपिंग ग्राउंड' नहीं है।
याचिका में जांच एजेंसियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के प्रकाशन पर रोक की मांग की गई है।
मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2026 में निर्धारित है।
बनर्जी CBI , ED और राज्य की CID — तीनों एजेंसियों की जांच का सामना कर रहे हैं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को डायमंड हार्बर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका को अवकाशकालीन पीठ के पास भेजने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। बनर्जी ने इस याचिका में विभिन्न राज्य एवं केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि वेकेशन बेंच कोई 'डंपिंग ग्राउंड' नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

13 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की बेंच ने याचिका स्वीकार तो कर ली थी, लेकिन तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। मामले की अगली निर्धारित सुनवाई दिसंबर में होनी है। गुरुवार को बनर्जी के वकील ने दलील दी कि जांच से जुड़ी खबरें लगभग प्रतिदिन मीडिया में प्रकाशित हो रही हैं, इसलिए इस मामले को तत्काल किसी वेकेशन बेंच के पास भेजा जाए।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह अनुरोध तत्काल खारिज करते हुए कहा कि वेकेशन बेंच छुट्टियों के दौरान अत्यंत जरूरी मामलों के लिए होती है और उसे सामान्य मामलों की सुनवाई के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।

याचिका की पृष्ठभूमि

इससे पहले, बनर्जी ने यह याचिका न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ के समक्ष रखी थी। न्यायमूर्ति राव ने मामले से स्वयं को अलग कर लिया, हालाँकि याचिका को खारिज नहीं किया। उन्होंने बनर्जी को उचित पीठ के समक्ष जाने की सलाह दी, क्योंकि याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि जांच एजेंसियाँ मीडिया को जानकारी लीक कर रही हैं। इसके बाद एक डिवीजन बेंच के माध्यम से यह मामला न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की बेंच के पास पहुँचा।

याचिका में क्या माँगा गया है

अभिषेक बनर्जी के वकील के अनुसार, जांच के दौरान पूछे गए सवालों सहित पूछताछ की जानकारी कथित तौर पर मीडिया को लीक की जा रही है। याचिका में बनर्जी की विदेश यात्राओं और अन्य निजी मामलों पर आई रिपोर्टों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है, जिनका जांच के तहत चल रहे मुकदमों से कोई सीधा संबंध नहीं है।

वकील ने तर्क दिया कि ऐसी रिपोर्टें बनर्जी के निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती हैं और उनकी गरिमा व प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाती हैं। याचिका में जांच से जुड़ी रिपोर्टों के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की गई है।

जांच का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी कुछ समय से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कई मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बदलने के बाद राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने भी उनसे जुड़े अन्य मामलों में जांच शुरू कर दी है। CID अधिकारियों ने इन जांचों के सिलसिले में डायमंड हार्बर के सांसद से कई बार पूछताछ की है।

आगे क्या होगा

फिलहाल मामले की सुनवाई दिसंबर तक के लिए निर्धारित है। बनर्जी के पास वेकेशन बेंच के बजाय अन्य कानूनी विकल्प तलाशने या दिसंबर की सुनवाई का इंतजार करने के अलावा सीमित रास्ते हैं। न्यायालय के इस निर्णय से स्पष्ट है कि अदालती प्रक्रिया अपनी निर्धारित गति से आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यापक राजनीतिक परिदृश्य की अभिव्यक्ति है — जहाँ पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद TMC नेताओं पर केंद्र और राज्य दोनों स्तरों की जांच एक साथ चल रही है। मीडिया लीक रोकने की माँग सार्वजनिक प्रतिष्ठा की रक्षा का प्रयास हो सकता है, लेकिन न्यायालय ने प्रक्रियागत रास्ते को बंद करके यह भी संकेत दिया कि त्वरित राहत इस मार्ग से संभव नहीं। असली सवाल यह है कि क्या जांच एजेंसियों द्वारा मीडिया को जानकारी लीक करने के आरोपों की न्यायिक जाँच होगी — यह पहलू दिसंबर की सुनवाई में केंद्रीय महत्व का होगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में क्या याचिका दाखिल की है?
अभिषेक बनर्जी ने याचिका में मांग की है कि उनके खिलाफ चल रही CBI, ED और CID जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के प्रकाशन पर रोक लगाई जाए। उनके वकील का तर्क है कि पूछताछ के दौरान पूछे गए सवाल और निजी जानकारियाँ कथित तौर पर जांच एजेंसियों द्वारा मीडिया को लीक की जा रही हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने वेकेशन बेंच को मामला भेजने से क्यों इनकार किया?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि वेकेशन बेंच केवल अत्यंत जरूरी मामलों के लिए होती है और उसे सामान्य याचिकाओं के लिए 'डंपिंग ग्राउंड' की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि यह मामला पहले से ही दो बेंचों से होते हुए उनके पास पहुँचा है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली निर्धारित सुनवाई दिसंबर 2026 में है। न्यायालय ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए बनर्जी को निर्धारित तिथि का इंतजार करने को कहा है।
अभिषेक बनर्जी किन-किन जांच एजेंसियों की जांच का सामना कर रहे हैं?
अभिषेक बनर्जी केंद्रीय स्तर पर CBI और ED की जांच का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, 2026 में पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद राज्य की CID ने भी उनसे जुड़े कुछ मामलों में जांच शुरू कर दी है और कई बार पूछताछ की है।
याचिका में निजता के उल्लंघन का दावा क्यों किया गया है?
बनर्जी के वकील का कहना है कि उनकी विदेश यात्राओं और अन्य निजी मामलों की रिपोर्टें मीडिया में आ रही हैं, जिनका जांच के मुकदमों से कोई सीधा संबंध नहीं है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह संविधान के तहत मिले निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और इससे उनकी गरिमा व प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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