अभिषेक बनर्जी की जांच लीक याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार, सही बेंच जाने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी को 8 अक्टूबर 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय से कोई तत्काल राहत नहीं मिली। जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने याचिका पर फ़ौरी हस्तक्षेप से इनकार करते हुए अभिषेक बनर्जी के वकील को उचित अधिकार क्षेत्र वाली पीठ के समक्ष जाने का निर्देश दिया।
याचिका में क्या था आरोप
अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी और कुछ निजी मीडिया संस्थान जांच से जुड़ी गोपनीय सूचनाएँ सार्वजनिक कर रहे हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच रहा है। याचिका में कहा गया कि तलाशी अभियान और पूछताछ में पूछे जाने वाले प्रश्न तक मीडिया में लीक हो रहे हैं।
बनर्जी के वकील ने कोर्ट के समक्ष दलील पेश करते हुए कहा, 'मेरे मुवक्किल के खिलाफ जांच चल रही है। उन्हें यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक न हो। जांच की प्रगति या तलाशी अभियान से जुड़ी जानकारी का मीडिया में खुलासा होना अनुचित है।' वकील ने आगे कहा, 'जांचकर्ताओं द्वारा पूछे जा रहे सवाल भी लीक हो रहे हैं और मेरे मुवक्किल की गरिमा को दांव पर लगाकर फुटेज तैयार किए जा रहे हैं।'
जस्टिस कृष्णा राव की टिप्पणी
जस्टिस कृष्णा राव ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया, 'क्या इस कोर्ट को इसमें दखल देना चाहिए? इस बेंच के पास इस मामले का अधिकार क्षेत्र नहीं है। अगर यह पुलिस से जुड़ा मामला है तो यह कोर्ट इसकी सुनवाई नहीं कर सकता।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे मामला खारिज नहीं कर रहे, बल्कि सही बेंच के समक्ष उल्लेख करने का निर्देश दे रहे हैं।
गौरतलब है कि मीडिया लीक और जांच की गोपनीयता भंग होने पर इस प्रकार की याचिकाएँ भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों में पूर्व में भी दाखिल होती रही हैं, लेकिन अधिकार क्षेत्र का प्रश्न हर बार निर्णायक भूमिका निभाता है।
चीफ जस्टिस की पीठ से मौखिक अनुरोध
जस्टिस राव के निर्देश के बाद अभिषेक बनर्जी के वकील ने चीफ जस्टिस की खंडपीठ से मौखिक रूप से अनुरोध किया कि इस मामले की जल्द सुनवाई सुनिश्चित की जाए। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने इस संदर्भ में लिखित आवेदन जमा करने का संकेत दिया है।
यह ऐसे समय में आया है जब अभिषेक बनर्जी की जांच से जुड़े घटनाक्रम लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं और मीडिया कवरेज पर उनके पक्ष की आपत्तियाँ बार-बार सामने आ रही हैं।
आगे क्या होगा
अब अभिषेक बनर्जी के वकीलों को उचित अधिकार क्षेत्र की पीठ के समक्ष लिखित आवेदन दाखिल करना होगा। इसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि मामले की नियमित सुनवाई कब और किस पीठ के समक्ष होगी। न्यायालय ने मामले को अभी खारिज नहीं किया है, अतः याचिका जीवित है और उचित मंच पर सुनी जाएगी।