कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को ₹1 करोड़ जबरन वसूली मामले में दी सशर्त अंतरिम जमानत
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को ₹1 करोड़ की जबरन वसूली के एक मामले में सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की। दत्ता को 8 जून 2026 को बिधाननगर-नॉर्थ पुलिस स्टेशन द्वारा 2018 के उस पुराने प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें एक स्थानीय व्यवसायी ने उन पर जबरन धनराशि वसूलने का आरोप लगाया था।
अदालत का निर्देश और जमानत की शर्तें
न्यायमूर्ति चैताली चट्टोपाध्याय की पीठ ने जमानत देते हुए यह स्पष्ट निर्देश दिया कि सब्यसाची दत्ता जमानत की अवधि के दौरान जाँच अधिकारी के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे। यह जमानत 'सशर्त' और 'अंतरिम' प्रकृति की है, अर्थात आरोपी के आचरण और सहयोग के आधार पर इसकी समीक्षा की जा सकती है।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता व्यवसायी का आरोप है कि दत्ता ने अपने सहयोगियों को उसके पास ₹1 करोड़ वसूलने के लिए भेजा था। व्यवसायी कथित तौर पर केवल ₹2.30 लाख ही दे सका, जिसके बाद शेष राशि के लिए उस पर दबाव बनाया जाता रहा। दत्ता ने शुरू से ही अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है।
गिरफ्तारी के बाद जाँच एजेंसियों ने पूर्व विधायक के कई ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस ने गिरफ्तारी के 57 दिन बाद, 5 अगस्त 2026 को, उत्तर 24 परगना जिले की बारासात अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
ईडी की जाँच और पीएमएलए का दायरा
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज करते हुए इस मामले में अपनी स्वतंत्र जाँच शुरू की। ईडी अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर तलाशी और छापेमारी अभियान भी चलाया। गौरतलब है कि मामला अब दोहरी जाँच के दायरे में है — राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसी दोनों की नज़र इस पर है।
समानांतर न्यायिक घटनाक्रम
दत्ता को जमानत उस दिन मिली जब उसी अदालत में न्यायमूर्ति तीर्थंकर बोस की एक अन्य एकल पीठ ने पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका खारिज कर दी। सुजीत बोस को ईडी ने पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपए के नगर पालिका नौकरी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में TMC से जुड़े कई नेताओं के खिलाफ जाँच एजेंसियों की कार्रवाई एक साथ जारी है।
आगे की राह
दत्ता के लिए यह राहत फिलहाल अंतरिम है और मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी। ईडी की PMLA जाँच अलग ट्रैक पर चलती रहेगी, जिसका दायरा राज्य पुलिस की जाँच से स्वतंत्र है। विशेषज्ञों के अनुसार, PMLA के तहत जमानत की शर्तें कहीं अधिक कठिन होती हैं, इसलिए ईडी के मामले में दत्ता की कानूनी लड़ाई अभी लंबी चल सकती है।