13 अक्टूबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को ₹1 करोड़ जबरन वसूली मामले में दी सशर्त अंतरिम जमानत

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को ₹1 करोड़ जबरन वसूली मामले में दी सशर्त अंतरिम जमानत

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को ₹1 करोड़ जबरन वसूली मामले में सशर्त अंतरिम जमानत दी — उसी दिन जब एक अन्य पीठ ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका खारिज की। ईडी की PMLA जाँच अलग ट्रैक पर जारी है।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति चैताली चट्टोपाध्याय की पीठ ने 13 अक्टूबर 2026 को TMC के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को सशर्त अंतरिम जमानत दी।
दत्ता को 8 जून 2026 को 2018 के ₹1 करोड़ जबरन वसूली मामले में गिरफ्तार किया गया था; शिकायतकर्ता व्यवसायी केवल ₹2.30 लाख दे सका था।
पुलिस ने गिरफ्तारी के 57 दिन बाद 5 अगस्त 2026 को बारासात अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
ईडी ने PMLA के तहत ECIR दर्ज कर स्वतंत्र जाँच शुरू की है।
उसी दिन न्यायमूर्ति तीर्थंकर बोस की पीठ ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस की नगर पालिका नौकरी घोटाले में जमानत याचिका खारिज की।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को ₹1 करोड़ की जबरन वसूली के एक मामले में सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की। दत्ता को 8 जून 2026 को बिधाननगर-नॉर्थ पुलिस स्टेशन द्वारा 2018 के उस पुराने प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें एक स्थानीय व्यवसायी ने उन पर जबरन धनराशि वसूलने का आरोप लगाया था।

अदालत का निर्देश और जमानत की शर्तें

न्यायमूर्ति चैताली चट्टोपाध्याय की पीठ ने जमानत देते हुए यह स्पष्ट निर्देश दिया कि सब्यसाची दत्ता जमानत की अवधि के दौरान जाँच अधिकारी के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे। यह जमानत 'सशर्त' और 'अंतरिम' प्रकृति की है, अर्थात आरोपी के आचरण और सहयोग के आधार पर इसकी समीक्षा की जा सकती है।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता व्यवसायी का आरोप है कि दत्ता ने अपने सहयोगियों को उसके पास ₹1 करोड़ वसूलने के लिए भेजा था। व्यवसायी कथित तौर पर केवल ₹2.30 लाख ही दे सका, जिसके बाद शेष राशि के लिए उस पर दबाव बनाया जाता रहा। दत्ता ने शुरू से ही अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है।

गिरफ्तारी के बाद जाँच एजेंसियों ने पूर्व विधायक के कई ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस ने गिरफ्तारी के 57 दिन बाद, 5 अगस्त 2026 को, उत्तर 24 परगना जिले की बारासात अदालत में चार्जशीट दाखिल की।

ईडी की जाँच और पीएमएलए का दायरा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज करते हुए इस मामले में अपनी स्वतंत्र जाँच शुरू की। ईडी अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर तलाशी और छापेमारी अभियान भी चलाया। गौरतलब है कि मामला अब दोहरी जाँच के दायरे में है — राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसी दोनों की नज़र इस पर है।

समानांतर न्यायिक घटनाक्रम

दत्ता को जमानत उस दिन मिली जब उसी अदालत में न्यायमूर्ति तीर्थंकर बोस की एक अन्य एकल पीठ ने पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका खारिज कर दी। सुजीत बोस को ईडी ने पश्चिम बंगाल के करोड़ों रुपए के नगर पालिका नौकरी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में TMC से जुड़े कई नेताओं के खिलाफ जाँच एजेंसियों की कार्रवाई एक साथ जारी है।

आगे की राह

दत्ता के लिए यह राहत फिलहाल अंतरिम है और मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी। ईडी की PMLA जाँच अलग ट्रैक पर चलती रहेगी, जिसका दायरा राज्य पुलिस की जाँच से स्वतंत्र है। विशेषज्ञों के अनुसार, PMLA के तहत जमानत की शर्तें कहीं अधिक कठिन होती हैं, इसलिए ईडी के मामले में दत्ता की कानूनी लड़ाई अभी लंबी चल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि राजनीतिक रंग से फैसले। असली सवाल यह है कि PMLA की समानांतर जाँच में दत्ता की स्थिति क्या होगी, क्योंकि PMLA में जमानत की शर्तें राज्य पुलिस के मामले से कहीं अधिक कठोर हैं। बंगाल में लंबित ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या चुनावी राजनीति पर भी असर डालेगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सब्यसाची दत्ता को किस मामले में जमानत मिली है?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सब्यसाची दत्ता को 2018 के एक जबरन वसूली मामले में सशर्त अंतरिम जमानत दी है, जिसमें एक स्थानीय व्यवसायी ने उन पर ₹1 करोड़ की वसूली का आरोप लगाया था। उन्हें इस मामले में 8 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
जमानत की क्या शर्तें रखी गई हैं?
न्यायमूर्ति चैताली चट्टोपाध्याय की पीठ ने निर्देश दिया है कि दत्ता जमानत की अवधि के दौरान जाँच अधिकारी के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे। यह अंतरिम जमानत है, जिसकी समय-समय पर समीक्षा हो सकती है।
ईडी का इस मामले में क्या रोल है?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने PMLA के तहत ECIR दर्ज कर इस मामले में स्वतंत्र जाँच शुरू की है और कई स्थानों पर छापेमारी भी की है। PMLA जाँच राज्य पुलिस की जाँच से अलग ट्रैक पर चलती है और इसमें जमानत की शर्तें अधिक कठोर होती हैं।
सुजीत बोस कौन हैं और उनका इस खबर से क्या संबंध है?
सुजीत बोस पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री हैं, जिन्हें ईडी ने नगर पालिका नौकरी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। उसी दिन जब दत्ता को जमानत मिली, न्यायमूर्ति तीर्थंकर बोस की पीठ ने सुजीत बोस की जमानत याचिका खारिज कर दी।
सब्यसाची दत्ता के खिलाफ आरोप क्या हैं?
शिकायतकर्ता व्यवसायी के अनुसार, दत्ता ने कथित तौर पर ₹1 करोड़ वसूलने के लिए अपने लोगों को भेजा था। व्यवसायी केवल ₹2.30 लाख दे सका, जिसके बाद बाकी राशि के लिए दबाव बनाया गया। दत्ता ने इन सभी आरोपों से शुरू से इनकार किया है।
राष्ट्र प्रेस
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