ईडी की छापेमारी: सब्यसाची दत्ता के 15 ठिकानों पर तलाशी, ₹13.9 करोड़ के खाते फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने 31 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक और विधाननगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के पूर्व मेयर सब्यसाची दत्ता तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ जबरन वसूली के आरोपों में 15 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में कोलकाता और उसके आसपास के साथ-साथ गुरुग्राम में भी एक जगह शामिल थी।
छापेमारी में क्या मिला
ईडी की तलाशी के दौरान सब्यसाची दत्ता के आवास, उनसे जुड़ी कंपनियों के कार्यालय और उनके सहयोगियों के घर-दफ्तर खंगाले गए। जांच में लेजर बुक्स, डिजिटल डिवाइस और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए, जो कथित तौर पर जबरन वसूली की कमाई के इस्तेमाल से जुड़े हैं।
इसके अलावा, दत्ता और उनके साथियों से संबंधित लगभग 150 बैंक और डीमैट खाते फ्रीज किए गए। ईडी के अनुसार, 9 अगस्त 2026 तक इन खातों में कम से कम ₹13.9 करोड़ का बैलेंस था। इसके साथ ही ₹40.50 लाख नकद और 17,200 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा भी जब्त की गई।
शेल कंपनियों का जाल
ईडी की जांच के अनुसार, सब्यसाची दत्ता और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर प्रिसिजन बिल्डकॉम प्राइवेट लिमिटेड, सॉफ्टलाइन मीडिया नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड और अवम रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड जैसी शेल कंपनियों के जरिए धन को इधर-उधर घुमाया। इस धन को बाद में सोना, एफडी, म्यूचुअल फंड और अचल संपत्ति जैसी परिसंपत्तियों में निवेश किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में धन-शोधन से जुड़े कई मामलों में ईडी की जांच तेज हो रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की है। इसके लिए 23 जून 2026 को एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की गई, जो विधाननगर पुलिस स्टेशन (नॉर्थ) में दर्ज प्राथमिकी (FIR) पर आधारित है।
उक्त FIR में आरोप लगाया गया था कि सब्यसाची दत्ता और उनके साथियों ने अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए स्थानीय व्यापारियों से डरा-धमकाकर, मारपीट करके और आपराधिक साजिश के जरिए जबरन वसूली का रैकेट चलाया। गौरतलब है कि दत्ता TMC के पूर्व विधायक रह चुके हैं और विधाननगर नगर निगम में मेयर का पद भी संभाल चुके हैं।
आगे की कार्रवाई
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच और कार्रवाई जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रीज खातों और जब्त दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद एजेंसी संपत्ति कुर्की की दिशा में भी आगे बढ़ सकती है।