27 जुलाई 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अनुब्रत मंडल को वित्तीय धोखाधड़ी मामले में दी सशर्त अग्रिम जमानत

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अनुब्रत मंडल को वित्तीय धोखाधड़ी मामले में दी सशर्त अग्रिम जमानत

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के बागी गुट के बीरभूम जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल को ₹30 लाख की कथित धोखाधड़ी मामले में सशर्त अग्रिम जमानत दी। घटना 2021 की, FIR 2026 में — सरकार बदलने के बाद। 10 दिन में जाँच अधिकारी से मिलना अनिवार्य।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस तीर्थंकर घोष ने 27 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल को सशर्त अग्रिम जमानत दी।
मामला बोलपुर निवासी सुभेंदु मंडल की शिकायत पर दर्ज हुआ, जिसमें लगभग ₹30 लाख का भुगतान न करने का आरोप है।
घटना 2021 की बताई जाती है, जबकि FIR 2026 में — राज्य में सरकार परिवर्तन के बाद — दर्ज की गई।
बचाव पक्ष ने मामले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया; हाईकोर्ट ने हिरासत में पूछताछ की ज़रूरत नहीं मानी।
जमानत शर्त: 10 दिनों के भीतर जाँच अधिकारी से मिलना और पूछताछ पर उपस्थित रहना अनिवार्य।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट के बीरभूम जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल को एक वित्तीय धोखाधड़ी मामले में सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। जस्टिस तीर्थंकर घोष ने यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि जाँच जारी रहेगी, किंतु हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

बीरभूम जिले के बोलपुर निवासी सुभेंदु मंडल ने अनुब्रत मंडल और तृणमूल कांग्रेस के कई अन्य सदस्यों के विरुद्ध वित्तीय धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें लगभग ₹30 लाख का भुगतान नहीं किया गया। सुभेंदु ने यह भी दावा किया कि भाजपा समर्थक होने के कारण उन्हें हमलों और अपमान का सामना करना पड़ा, और उस समय पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।

गौरतलब है कि यह घटना 2021 में हुई बताई जाती है, जबकि प्राथमिकी (FIR) 2026 में दर्ज की गई — अर्थात् राज्य में सरकार परिवर्तन के बाद। सरकार बदलने के पश्चात सुभेंदु ने पुनः पुलिस से संपर्क किया और तब यह मामला दर्ज हुआ।

निचली अदालत में खारिज, फिर हाईकोर्ट की शरण

गिरफ्तारी की आशंका से अनुब्रत मंडल ने पहले निचली अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दी, जो खारिज हो गई। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील दायर की।

सुनवाई में बचाव पक्ष के तर्क

सोमवार की सुनवाई में अनुब्रत मंडल के अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि घटना 2021 में हुई थी, जबकि एफआईआर 2026 में दर्ज की गई। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सरकार बदलने के कारण राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से यह मामला दर्ज किया गया है।

हाईकोर्ट ने पाया कि मामला एक पुरानी शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। अदालत ने माना कि इस परिस्थिति में हिरासत में लेकर पूछताछ अनिवार्य नहीं है, और इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार की गई।

जमानत की शर्तें

जस्टिस तीर्थंकर घोष ने अग्रिम जमानत देते हुए निर्देश दिया कि अनुब्रत मंडल को जाँच में पूर्ण सहयोग करना होगा। उन्हें 10 दिनों के भीतर जाँच अधिकारी से मिलना अनिवार्य है और पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित होना होगा।

राजनीतिक संदर्भ

अनुब्रत मंडल, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी — किंतु बहुमत वाले — गुट के बीरभूम जिला अध्यक्ष हैं। यह मामला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद विभिन्न राजनीतिक मामलों में नए सिरे से कार्रवाई देखी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामले राजनीतिक बदले की मंशा से प्रेरित हो सकते हैं, जबकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहले उन्हें न्याय से वंचित रखा गया। अदालत का अगला कदम जाँच की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक संयम का संकेत है — लेकिन यह जाँच को रोकता नहीं। असली सवाल यह है कि क्या ₹30 लाख की यह शिकायत स्वतंत्र जाँच में टिकेगी, या यह उस लंबी कतार का हिस्सा बन जाएगी जहाँ राजनीतिक बदलाव के साथ मुकदमे भी बदल जाते हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुब्रत मंडल को किस मामले में अग्रिम जमानत मिली है?
अनुब्रत मंडल को वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से सशर्त अग्रिम जमानत मिली है। बोलपुर निवासी सुभेंदु मंडल ने उनके और तृणमूल कांग्रेस के कई सदस्यों के खिलाफ लगभग ₹30 लाख का भुगतान न करने की शिकायत दर्ज कराई थी।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों दी?
हाईकोर्ट ने पाया कि मामला एक पुरानी शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है और इस परिस्थिति में हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक नहीं है। जस्टिस तीर्थंकर घोष ने स्पष्ट किया कि जाँच जारी रहेगी, लेकिन गिरफ्तारी अभी उचित नहीं।
अग्रिम जमानत की क्या शर्तें हैं?
अनुब्रत मंडल को 10 दिनों के भीतर जाँच अधिकारी से मिलना होगा और जाँच में पूर्ण सहयोग करना होगा। पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित होना भी अनिवार्य है।
यह FIR इतने साल बाद क्यों दर्ज हुई?
बचाव पक्ष के अनुसार, घटना 2021 की है लेकिन FIR 2026 में राज्य में सरकार बदलने के बाद दर्ज की गई। शिकायतकर्ता सुभेंदु मंडल का कहना है कि पहले की सरकार के दौरान पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की थी, इसलिए उन्होंने सरकार बदलने के बाद पुनः पुलिस से संपर्क किया।
अनुब्रत मंडल कौन हैं और तृणमूल कांग्रेस में उनकी क्या भूमिका है?
अनुब्रत मंडल तृणमूल कांग्रेस के बागी — किंतु बहुमत वाले — गुट के बीरभूम जिला अध्यक्ष हैं। यह गुट राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में काम करता है।
राष्ट्र प्रेस
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