कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC पूर्व विधायक अदिति मुंशी को अग्रिम जमानत दी, पति देवराज चक्रबर्ती की याचिका खारिज
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 24 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्व विधायक अदिति मुंशी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की। पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज इस मामले में उन पर कथित तौर पर अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। हालांकि, अदालत ने उनके पति देवराज चक्रबर्ती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत के निर्देश और शर्तें
जस्टिस जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने दोनों को जाँच में पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया। अदालत ने मुंशी को राहत देते हुए स्पष्ट किया कि दंपती की चार महीने की शिशु पुत्री की देखभाल को ध्यान में रखते हुए माँ को अंतरिम संरक्षण दिया गया है।
पीठ ने दोनों पर विदेश यात्रा पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है और बिना हाईकोर्ट की पूर्व अनुमति के देश से बाहर न जाने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, दोनों को अपने पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने का निर्देश भी दिया गया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम अवधि के दौरान न तो मुंशी और न ही चक्रबर्ती किसी भी गवाह से संपर्क करेंगे या उन्हें प्रभावित करने का प्रयास करेंगे। साथ ही, अदिति मुंशी को बागुईआटी थाना क्षेत्र में प्रवेश करने से भी रोका गया है, जहाँ यह मामला दर्ज किया गया है।
मामले में आरोपों की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, इस मामले में आरोप है कि दोनों ने कथित तौर पर लगभग ₹100 करोड़ की संपत्ति को गुप्त रूप से अथवा रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर स्थानांतरित किया। यह कथित रूप से चुनावी हलफनामे में संपत्ति को कम दर्शाने के उद्देश्य से किया गया बताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों पर वसूली, सिंडिकेट संचालन और जमीन कब्जाने जैसी गतिविधियों के ज़रिए बड़ी संपत्ति बनाने के आरोप भी हैं। ये कथित गतिविधियाँ राजारहाट-गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में हुई बताई जाती हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
अदिति मुंशी ने 2021 से 2026 तक राजारहाट-गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद यह कानूनी मामला और अधिक चर्चा में आया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले चल रहे हैं।
आगे की राह
हाईकोर्ट की अंतरिम राहत अस्थायी है और मामले की अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट होगी। पश्चिम बंगाल पुलिस की जाँच जारी है और दोनों आरोपियों को सहयोग करना अनिवार्य किया गया है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच राज्य में राजनीतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।