टीएमसी पूर्व पार्षद देबराज चक्रवर्ती अब ईडी के निशाने पर, ₹100 करोड़ की संपत्ति छिपाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व पार्षद देबराज चक्रवर्ती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने चक्रवर्ती को बुधवार शाम पुरुलिया से गिरफ्तार किया था, और अब ईडी इस मामले में स्वतंत्र रूप से जांच करने की तैयारी में है।
ईडी की जांच का दायरा
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने राज्य पुलिस से चक्रवर्ती के खिलाफ लगे मुख्य आरोपों और उनसे जुड़े दस्तावेज़ मांगे हैं। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने से पहले 'एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट' (ईसीआईआर) दर्ज की जाएगी। ईडी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने प्रारंभिक जानकारी नई दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेज दी है और अब मुख्यालय की मंजूरी का इंतजार है।
अदालत का रुख और अग्रिम ज़मानत
पिछले हफ्ते कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने चक्रवर्ती की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, उसी पीठ ने उसी मामले में सह-आरोपी अदिति मुंशी को अंतरिम अग्रिम ज़मानत प्रदान कर दी — इस आधार पर कि दंपती की चार महीने की बेटी है। यह अदालती फैसला उल्लेखनीय है, क्योंकि एक ही मामले में दो आरोपियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया गया।
आरोपों का विवरण
आरोप है कि उत्तर 24 परगना जिले के राजारहाट-गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन TMC विधायक अदिति मुंशी और उनके पति देबराज ने 2026 के चुनावों से पहले कम से कम ₹100 करोड़ की संपत्ति को गुमनाम रूप से तथा रिश्तेदारों व परिचितों के नाम पर स्थानांतरित किया। अदिति पर यह भी आरोप है कि उन्होंने हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के हलफनामे में अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा नहीं दिया — जिस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
कौन हैं देबराज चक्रवर्ती और अदिति मुंशी
देबराज चक्रवर्ती बिधाननगर नगर निगम के पूर्व पार्षद हैं और इलाके में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। उनकी पत्नी अदिति मुंशी एक मशहूर भक्ति गायिका हैं, जो TMC की पूर्व विधायक भी रह चुकी हैं। इस दंपती पर आय से अधिक संपत्ति, संपत्ति छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।
आगे क्या होगा
ईडी मुख्यालय की मंजूरी मिलते ही ईसीआईआर दर्ज की जाएगी और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच स्वतंत्र रूप से शुरू होगी। यह मामला पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता की पृष्ठभूमि में आया है। गौरतलब है कि राज्य पुलिस और ईडी की समानांतर जांच इस प्रकरण को और जटिल बना सकती है।