अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी बैंक खाता फ्रीज को चुनौती, 19 अगस्त को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोमवार, 17 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर कर अपने बैंक खाते पर लगाए गए डेबिट प्रतिबंधों को कानूनी चुनौती दी। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नेत्र संबंधी उपचार के लिए तीन सप्ताह की विदेश यात्रा की अनुमति दी हुई है।
मामले का घटनाक्रम
अभिषेक के वकील अयान भट्टाचार्य ने न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ के समक्ष याचिका प्रस्तुत की। याचिका में दावा किया गया कि अमेरिका यात्रा से ठीक पहले बैंक अधिकारियों ने उनके मुवक्किल के खाते पर डेबिट संबंधी पाबंदियाँ लगा दीं और खाता फ्रीज किए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया।
कानूनी दलील — BNS धारा 107 का सवाल
अभिषेक के वकील ने तर्क दिया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 107 के प्रावधानों का पालन किए बिना किसी का बैंक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस धारा के तहत पुलिस को खाता फ्रीज करने से पहले संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना अनिवार्य है — जो इस मामले में नहीं किया गया।
न्यायालय की प्रतिक्रिया
न्यायमूर्ति राव ने याचिका स्वीकार करते हुए पूछा कि क्या अभिषेक के विरुद्ध कोई जाँच चल रही है। इस पर वकील ने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल अदालत के आदेश के अनुसार जाँच प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं और बैंक खाता फ्रीज किए जाने का उस जाँच से कोई संबंध नहीं है। न्यायमूर्ति राव ने इसके बाद मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति और शर्तें
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने अभिषेक को आँख के इलाज के लिए तीन सप्ताह की विदेश यात्रा की अनुमति दी थी। इस फैसले में शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया जिसमें विदेश यात्रा पर राहत देने से इनकार किया गया था।
अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई — अभिषेक केवल अपने डिप्लोमेटिक पासपोर्ट पर यात्रा करेंगे और विदेश में अपने यात्रा कार्यक्रम तथा ठहरने की जानकारी जाँच एजेंसी के साथ साझा करेंगे।
आगे क्या होगा
अभिषेक बनर्जी, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं, की याचिका पर 19 अगस्त को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि बैंक खाते पर लगी पाबंदी हटती है या बरकरार रहती है। यह मामला BNS के प्रावधानों की व्याख्या और बैंकिंग प्रतिबंधों की प्रक्रियागत वैधता के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।