20 अगस्त 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खाते पर डेबिट पाबंदी को लेकर बैंक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खाते पर डेबिट पाबंदी को लेकर बैंक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खाते पर बिना सूचना डेबिट पाबंदी लगाने पर बैंक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। बैंक ने पहले KYC, फिर तकनीकी समस्या, फिर ED मामले का हवाला दिया — बदलते तर्कों से न्यायमूर्ति राव और नाराज़ हुए।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को बैंक अधिकारियों को बिना पूर्व सूचना डेबिट पाबंदी लगाने पर कड़ी फटकार लगाई।
अभिषेक बनर्जी (TMC सांसद, डायमंड हार्बर) के खाते पर डेबिट पाबंदी और दो क्रेडिट कार्ड ब्लॉक किए गए थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें आँखों के इलाज के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी थी, उसके बाद यह कार्रवाई हुई।
बैंक ने पहले KYC अपडेट , फिर तकनीकी समस्या, फिर ED मामले से जुड़े दस्तावेज़ों का हवाला दिया।
न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने कहा — बिना सूचना डेबिट पाबंदी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं।
दिन के दूसरे हिस्से में पुनः सुनवाई निर्धारित; बैंक को अंतिम पक्ष रखना होगा।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 20 अगस्त 2026 को बैंक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई, जब यह सामने आया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी के बैंक खाते पर बिना पूर्व सूचना के और अत्यंत कमज़ोर आधार पर डेबिट पाबंदियाँ लगाई गई थीं। न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने बैंक के बदलते स्पष्टीकरणों पर गहरी नाराज़गी जताई और दिन के दूसरे हिस्से में पुनः सुनवाई का आदेश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

इस सप्ताह की शुरुआत में डायमंड हार्बर के सांसद और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया। उनकी शिकायत थी कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने इसी महीने उन्हें आँखों के इलाज के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दे दी थी, ठीक उसी दौरान बैंक अधिकारियों ने उनके खाते पर डेबिट पाबंदियाँ लगा दीं और उनके दो क्रेडिट कार्ड भी ब्लॉक कर दिए।

अदालत में बैंक का बदलता रुख

गुरुवार की सुबह हुई सुनवाई में बैंक अधिकारियों ने पहले अदालत को बताया कि पाबंदियाँ केवाईसी (KYC) अपडेट कराने के उद्देश्य से लगाई गई थीं। इस पर न्यायमूर्ति राव ने तीखा सवाल उठाया कि जब केवाईसी ऑनलाइन अपडेट हो सकती है, तो सांसद की बैंक में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य क्यों की गई।

बैंक के वकील ने तब आंतरिक तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया। परंतु जब न्यायमूर्ति राव इस जवाब से भी संतुष्ट नहीं हुए, तो बैंक ने तीसरा स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया — कि अभिषेक बनर्जी का नाम, फोन नंबर और दस्तावेज़ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज एक मामले से जुड़े हैं, इसलिए केवाईसी अद्यतन करना आवश्यक था और वे खुली अदालत में विवरण साझा करने में असमर्थ हैं।

न्यायालय की कड़ी टिप्पणी

बैंक के बदलते तर्कों पर न्यायमूर्ति राव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना पूर्व सूचना के डेबिट पाबंदी लगाना किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बैंक के वकील को निर्देश दिया कि वे अपनी दलील बार-बार न बदलें।

अभिषेक बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि केवाईसी का तर्क इसलिए भी निराधार है क्योंकि मौजूदा केवाईसी की समय-सीमा दिसंबर तक वैध है — यानी अभी इसके नवीनीकरण की कोई तात्कालिकता नहीं थी।

आगे की सुनवाई

न्यायमूर्ति राव ने आदेश दिया कि दिन के दूसरे हिस्से में सुनवाई फिर होगी, जिसमें बैंक अधिकारियों को डेबिट पाबंदी लगाने के अपने निर्णय पर स्पष्ट और अंतिम पक्ष रखना होगा। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ED से जुड़े मामलों में बैंकों की भूमिका और खाताधारकों के अधिकारों को लेकर व्यापक बहस चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बाहरी दबाव से प्रेरित रही होगी। जब सर्वोच्च न्यायालय किसी नागरिक को विदेश यात्रा की अनुमति दे चुका हो और उसके ठीक बाद बैंक खाता बंद हो जाए, तो यह संयोग नहीं, बल्कि समन्वय का संकेत है — जिसकी जाँच होनी चाहिए। न्यायमूर्ति राव की तीखी टिप्पणी यह भी रेखांकित करती है कि ED से जुड़े मामलों में बैंकों की स्वायत्तता और खाताधारकों के मूल अधिकारों के बीच की रेखा अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बैंक अधिकारियों को किस कारण फटकार लगाई?
न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने बैंक अधिकारियों को इसलिए फटकार लगाई क्योंकि उन्होंने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खाते पर बिना पूर्व सूचना दिए डेबिट पाबंदी लगाई और बदलते-बदलते तीन अलग-अलग कारण बताए। अदालत ने कहा कि यह कार्रवाई किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं है।
अभिषेक बनर्जी के बैंक खाते पर पाबंदी कब और क्यों लगाई गई?
पाबंदी अगस्त 2026 में उस समय लगाई गई जब सर्वोच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को आँखों के इलाज के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी थी। बैंक ने पहले KYC अपडेट, फिर तकनीकी समस्या और बाद में ED मामले से जुड़े दस्तावेज़ों का हवाला दिया।
क्या अभिषेक बनर्जी के क्रेडिट कार्ड भी ब्लॉक किए गए थे?
हाँ, अभिषेक बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि डेबिट पाबंदी के साथ-साथ उनके दो क्रेडिट कार्ड भी बिना किसी पूर्व सूचना के ब्लॉक कर दिए गए थे।
बैंक ने KYC का तर्क क्यों दिया और अदालत ने उसे क्यों खारिज किया?
बैंक ने दावा किया कि KYC अपडेट के लिए सांसद की व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी थी। अदालत ने यह तर्क इसलिए खारिज किया क्योंकि KYC ऑनलाइन अपडेट हो सकती है और मौजूदा KYC की वैधता दिसंबर तक बनी हुई है, यानी कोई तात्कालिकता नहीं थी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 20 अगस्त को दिन के दूसरे हिस्से में पुनः सुनवाई का आदेश दिया है। बैंक अधिकारियों को डेबिट पाबंदी लगाने के अपने फैसले पर स्पष्ट और अंतिम पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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