जबरन वसूली मामले में टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद बंगाल सीआईडी के सामने पेश, 6 महीने की गिरफ्तारी से राहत
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को कोलकाता स्थित बंगाल अपराध जांच विभाग (CID) के मुख्यालय में पूछताछ के लिए पेश हुए। उनके विरुद्ध दर्ज जबरन वसूली के मामले में जांचकर्ता उनसे बयान दर्ज करना चाहते थे। यह उपस्थिति कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद दर्ज हुई जिसमें उन्हें जाँच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद एक व्यवसायी की शिकायत के बाद सामने आया, जिसने आरोप लगाया कि उसे पिछले वर्ष 21 मई को दुर्गापुर में आजाद के बंगले पर बुलाया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, वहाँ सांसद के एक कथित सहयोगी ने कथित तौर पर ₹15 लाख की माँग की। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि राशि न देने पर उसे अपना रसोई गैस व्यवसाय बंद करने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके पास इस कथित घटना की ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है।
शिकायत के आधार पर कीर्ति आजाद और कई सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद मामला बंगाल CID को सौंपा गया।
न्यायालय का आदेश और अंतरिम राहत
कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कौशिक चंदा ने 15 सितंबर को आजाद को गिरफ्तारी सहित दंडात्मक कार्रवाई से छह महीने की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। हालाँकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि राहत तभी लागू रहेगी जब सांसद जाँच में पूरा सहयोग करें। अदालत ने CID को यह भी निर्देश दिया था कि आजाद को पूछताछ के लिए बुलाने से कम से कम सात दिन पहले नोटिस दिया जाए। अदालती आदेश के अनुपालन में CID ने सांसद को 22 सितंबर को उपस्थित होने का नोटिस भेजा।
आजाद का पक्ष
टीएमसी सांसद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि कथित घटना की तारीख 21 मई को वह दुर्गापुर में थे ही नहीं। इस दावे के समर्थन में उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के सामने अपने उड़ान यात्रा रिकॉर्ड भी प्रस्तुत किए हैं। इसके अलावा, आजाद ने अदालत में एफआईआर को रद्द करने की अर्जी भी दाखिल की है, जो विचाराधीन है।
राजनीतिक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि विपक्ष समय-समय पर सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है। आजाद के मामले में विशेष बात यह है कि वह TMC सांसद होने के बाद भी CID — जो राज्य सरकार के अधीन है — की जाँच का सामना कर रहे हैं, जिसे विश्लेषक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
आगे क्या होगा
CID अब 22 सितंबर की पूछताछ में दर्ज बयानों के आधार पर आगे की जाँच दिशा तय करेगी। कलकत्ता उच्च न्यायालय में FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। आजाद को मिली छह महीने की अंतरिम राहत की अवधि में अदालत से मामले में कोई बड़ा फैसला आने की संभावना है।