कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय के खिलाफ सभी FIR पर DGP से रिपोर्ट तलब की, 10 सितंबर को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव व लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय के विरुद्ध राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई समस्त प्रथम सूचना रिपोर्टों (FIR) का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का आदेश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 10 सितंबर तक पुलिस रॉय के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की सिंगल जज बेंच ने DGP कार्यालय को 10 सितंबर की अगली सुनवाई तिथि से पूर्व सभी FIR से संबंधित रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी व्यवस्था दी कि यदि इस बीच पुलिस किसी भी प्रकार की जबरदस्ती कार्रवाई का प्रयास करती है, तो रॉय अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय का ध्यान आकृष्ट करने के अधिकारी होंगे।
रॉय के अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल राज्य पुलिस की जाँच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और जब भी जाँच अधिकारियों ने बुलाया, वे उपस्थित हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रॉय के खिलाफ पहली FIR 5 जून को दर्ज हुई, दूसरी 16 जून को, और उसके बाद कथित तौर पर लगभग प्रतिदिन नए मामले दर्ज किए जाते रहे।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में इस सुनवाई पर रोक लगाने की अपील की। उनका तर्क था कि रॉय से जुड़ा एक समान मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
मजूमदार ने यह भी अदालत को अवगत कराया कि रॉय के माध्यम से एक विशेष बैंक खाते में ₹20 करोड़ की राशि हस्तांतरित किए जाने का आरोप है।
आरोपों की प्रकृति
राज्य पुलिस ने रॉय के विरुद्ध दो प्रमुख श्रेणियों में मामले दर्ज किए हैं। पहला आरोप भूमि हड़पने से संबंधित है, जबकि दूसरा आरोप ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा है। रॉय के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें परेशान करने के इरादे से मुकदमे दर्ज कर रही है, हालाँकि राज्य पुलिस ने इस दावे का खंडन नहीं किया है।
आम जनता पर असर
यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त उभरा है जब TMC और विपक्ष के बीच भर्ती घोटाले व भूमि अधिग्रहण को लेकर तनाव चरम पर है। अभिषेक बनर्जी TMC के वरिष्ठ नेता हैं और उनके निकट सहयोगी के खिलाफ इस तरह की न्यायिक कार्रवाई दल की छवि पर असर डाल सकती है।
क्या होगा आगे
अब सबकी नज़रें 10 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जब DGP कार्यालय को सभी FIR का विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यह भी देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले का इस सुनवाई पर क्या प्रभाव पड़ता है।