अभिषेक बनर्जी के फरार सहायक सुमित रॉय ने सुप्रीम कोर्ट से माँगी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय ने 6 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया और गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की माँग की। पश्चिम बंगाल में सरकारी ज़मीन कब्जे के मामले में फरार चल रहे सुमित रॉय पर पश्चिम मिदनापुर की जिला अदालत द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोप है कि सुमित रॉय ने पश्चिम मिदनापुर के सालबोनी क्षेत्र में सरकारी ज़मीन को फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के ज़रिये अवैध रूप से कब्जाकर बेच दिया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने जाँच शुरू की, लेकिन सुमित रॉय अपने किसी भी पंजीकृत पते पर नहीं मिले। इसके बाद जिला अदालत ने उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया और पश्चिम बंगाल पुलिस की CID ने जून में ही उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया।
कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका और खारिज
सुमित रॉय के वकील ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। वकील ने मामले की जल्द सुनवाई और पीठ बदलने की माँग भी की, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया। अंततः मामला नियमित पीठ के समक्ष आया और 3 अगस्त को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने ज़मीन कब्जे के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
हालाँकि उसी दिन अदालत ने एक अलग मामले — 'सरकारी नौकरी के बदले पैसे' — में सुमित रॉय को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत प्रदान की और निर्देश दिया कि वे 10 दिन के भीतर जाँच एजेंसी के समक्ष उपस्थित हों।
सुप्रीम कोर्ट में गुहार क्यों
सुमित रॉय की मुख्य आशंका यह है कि यदि वे नौकरी वाले मामले में जाँच के लिए पेश होते हैं, तो पुलिस उन्हें ज़मीन कब्जे के मामले में उसी दौरान गिरफ्तार कर सकती है। इसी दोहरे कानूनी जोखिम से बचने के लिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की माँग की है। उनका पक्ष है कि वे जाँच में सहयोग को तैयार हैं, बशर्ते पहले गिरफ्तारी से सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
कालीघाट में तलाशी अभियान
यह ऐसे समय में आया है जब 13 जून को सालबोनी थाने की पुलिस केंद्रीय बलों के साथ तड़के दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुँची थी। पुलिस को सुमित रॉय के मोबाइल की अंतिम लोकेशन यहीं मिली थी। काफी प्रतीक्षा के बाद पुलिस ने ताला तोड़कर परिसर में प्रवेश किया, परंतु सुमित रॉय वहाँ नहीं मिले।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। गौरतलब है कि यह मामला TMC के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक सहायक को लेकर है, जिससे यह राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। सुमित रॉय की याचिका पर शीर्ष अदालत का रुख यह तय करेगा कि वे जाँच में कब और किस शर्त पर पेश होंगे।