8 अगस्त 2026
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सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत के बाद अभिषेक बनर्जी का फरार पीए सुमित रॉय सीआईडी दफ्तर पहुंचा

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सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत के बाद अभिषेक बनर्जी का फरार पीए सुमित रॉय सीआईडी दफ्तर पहुंचा

सारांश

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के लंबे समय से फरार पीए सुमित रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर रोक मिलने के बाद 8 अगस्त को कोलकाता के भवानी भवन में सीआईडी के सामने हाजिरी दी। साल्बोनी में सरकारी जमीन जाली दस्तावेजों से हड़पने का मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।

मुख्य बातें

सुमित रॉय , अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट, 8 अगस्त को भवानी भवन में सीआईडी के समक्ष पेश हुए।
सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त को साल्बोनी भूमि अधिग्रहण मामले में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जस्टिस तीर्थंकर घोष की पीठ से अग्रिम जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी थी।
रॉय पर जाली दस्तावेजों से पश्चिम मिदनापुर में सरकारी जमीन हड़पने और बेचने का आरोप है।
जून में कालीघाट और सेरामपुर में तलाशी के बावजूद पुलिस उन्हें नहीं पकड़ पाई थी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय शनिवार, 8 अगस्त को पूछताछ के लिए दक्षिण कोलकाता स्थित सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) के मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे। लंबे समय से फरार चल रहे रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय से अंतरिम सुरक्षा मिलने के बाद ही अधिकारियों के सामने हाजिरी दी। उन पर पश्चिम मिदनापुर जिले के साल्बोनी में जाली दस्तावेजों से सरकारी जमीन हड़पने और बेचने के गंभीर आरोप हैं।

सीआईडी दफ्तर में हाजिरी का घटनाक्रम

रॉय शनिवार सुबह 10 बजे से कुछ पहले भवानी भवन पहुंचे, जबकि सीआईडी अधिकारियों ने शुक्रवार शाम उनके दक्षिण कोलकाता स्थित आवास पर नोटिस भेजकर सुबह 11 बजे तक उपस्थित होने का निर्देश दिया था। उनके खिलाफ कई मामले और एफआईआर दर्ज हैं, और पहले से ही लुकआउट नोटिस जारी था।

सर्वोच्च न्यायालय की अंतरिम सुरक्षा

6 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय डिवीजन बेंच ने रॉय को साल्बोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज अवैध भूमि अधिग्रहण के मामले में अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। न्यायालय ने यह राहत इस शर्त पर दी कि रॉय जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होंगे। अगले आदेश तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रहेगी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की थी अग्रिम जमानत

इससे पहले रॉय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आरोपों की प्रकृति और जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों को देखते हुए यह मामला अग्रिम जमानत के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बाद रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

मामले की पृष्ठभूमि और जांच

रॉय पर आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर साल्बोनी में सरकार के कब्जे वाली जमीन अवैध रूप से हड़प ली और उसे बेच दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जब रॉय अपने ज्ञात ठिकानों पर नहीं मिले, तो स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। जून में पुलिस टीमों ने कोलकाता के कालीघाट में अभिषेक बनर्जी के आवास और सेरामपुर में रॉय के ससुराल में तलाशी ली, लेकिन वे वहां नहीं मिले।

आगे क्या होगा

सीआईडी अधिकारी अब रॉय से विस्तृत पूछताछ करेंगे। सर्वोच्च न्यायालय की शर्त के अनुसार जांच में असहयोग की स्थिति में अंतरिम सुरक्षा वापस ली जा सकती है। यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है, क्योंकि रॉय सीधे TMC के शीर्ष नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सहयोग अदालती शर्त की बाध्यता से उपजा है — स्वेच्छा से नहीं। कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिलना और फिर जांच में शामिल होना — यह क्रम बताता है कि कानूनी विकल्पों की सीढ़ी चढ़कर जांच को टालने की रणनीति अपनाई गई। असली सवाल यह है कि TMC के शीर्ष नेतृत्व से सीधे जुड़े इस मामले में जांच कितनी स्वतंत्र और निर्णायक रह पाएगी — विशेषकर तब जब राजनीतिक दबाव दोनों तरफ से काम कर सकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुमित रॉय कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
सुमित रॉय TMC महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट हैं। उन पर पश्चिम मिदनापुर के साल्बोनी में जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी जमीन हड़पने और बेचने का आरोप है, जिसके लिए एफआईआर दर्ज है।
सर्वोच्च न्यायालय ने सुमित रॉय को किस शर्त पर राहत दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त को रॉय की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई, लेकिन शर्त रखी कि वे जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दें और उसके समक्ष उपस्थित हों। असहयोग की स्थिति में यह राहत वापस ली जा सकती है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत क्यों नहीं दी?
जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने कहा कि आरोपों की प्रकृति और जांच में एकत्र साक्ष्यों को देखते हुए यह मामला अग्रिम जमानत के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बाद रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
रॉय के फरार रहने के दौरान पुलिस ने क्या कदम उठाए?
पश्चिम बंगाल सीआईडी ने लुकआउट नोटिस जारी किया और स्थानीय अदालत ने गिरफ्तारी वारंट निकाला। जून में पुलिस ने कालीघाट में अभिषेक बनर्जी के आवास और सेरामपुर में रॉय के ससुराल में तलाशी ली, लेकिन वे नहीं मिले।
इस मामले का राजनीतिक महत्व क्या है?
सुमित रॉय सीधे TMC के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी से जुड़े हैं, जो पार्टी महासचिव और भतीजे हैं। इससे यह मामला महज आपराधिक जांच न रहकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में संवेदनशील मोड़ बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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