सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत के बाद अभिषेक बनर्जी का फरार पीए सुमित रॉय सीआईडी दफ्तर पहुंचा
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय शनिवार, 8 अगस्त को पूछताछ के लिए दक्षिण कोलकाता स्थित सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) के मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे। लंबे समय से फरार चल रहे रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय से अंतरिम सुरक्षा मिलने के बाद ही अधिकारियों के सामने हाजिरी दी। उन पर पश्चिम मिदनापुर जिले के साल्बोनी में जाली दस्तावेजों से सरकारी जमीन हड़पने और बेचने के गंभीर आरोप हैं।
सीआईडी दफ्तर में हाजिरी का घटनाक्रम
रॉय शनिवार सुबह 10 बजे से कुछ पहले भवानी भवन पहुंचे, जबकि सीआईडी अधिकारियों ने शुक्रवार शाम उनके दक्षिण कोलकाता स्थित आवास पर नोटिस भेजकर सुबह 11 बजे तक उपस्थित होने का निर्देश दिया था। उनके खिलाफ कई मामले और एफआईआर दर्ज हैं, और पहले से ही लुकआउट नोटिस जारी था।
सर्वोच्च न्यायालय की अंतरिम सुरक्षा
6 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय डिवीजन बेंच ने रॉय को साल्बोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज अवैध भूमि अधिग्रहण के मामले में अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। न्यायालय ने यह राहत इस शर्त पर दी कि रॉय जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होंगे। अगले आदेश तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रहेगी।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की थी अग्रिम जमानत
इससे पहले रॉय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आरोपों की प्रकृति और जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों को देखते हुए यह मामला अग्रिम जमानत के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बाद रॉय ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
मामले की पृष्ठभूमि और जांच
रॉय पर आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर साल्बोनी में सरकार के कब्जे वाली जमीन अवैध रूप से हड़प ली और उसे बेच दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जब रॉय अपने ज्ञात ठिकानों पर नहीं मिले, तो स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। जून में पुलिस टीमों ने कोलकाता के कालीघाट में अभिषेक बनर्जी के आवास और सेरामपुर में रॉय के ससुराल में तलाशी ली, लेकिन वे वहां नहीं मिले।
आगे क्या होगा
सीआईडी अधिकारी अब रॉय से विस्तृत पूछताछ करेंगे। सर्वोच्च न्यायालय की शर्त के अनुसार जांच में असहयोग की स्थिति में अंतरिम सुरक्षा वापस ली जा सकती है। यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है, क्योंकि रॉय सीधे TMC के शीर्ष नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक रहे हैं।