अभिषेक बनर्जी के सहायक सुमित रॉय ने कलकत्ता हाईकोर्ट में माँगी अग्रिम जमानत, जमीन हड़पने के मामले में वारंट
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले की एक अदालत द्वारा जमीन हड़पने के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद रॉय के वकील ने 15 जून 2026 को यह याचिका पेश की। फिलहाल रॉय फरार बताए जा रहे हैं और साल्बोनी पुलिस स्टेशन की टीम उनकी सक्रिय तलाश कर रही है।
अदालत में याचिका और सुनवाई की स्थिति
रॉय के वकील सब्यसाची बंदोपाध्याय ने सोमवार को न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की एकल-पीठ के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की। पीठ ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है, हालाँकि फास्ट-ट्रैक सुनवाई का अनुरोध अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। पहली सुनवाई की तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।
मामले की पृष्ठभूमि और संबंधित गिरफ्तारी
रॉय के खिलाफ पश्चिम मेदिनीपुर में जमीन हड़पने से जुड़े एक मामले में एफआईआर दर्ज है। इसी जिले में मेदिनीपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को भी भूमि भ्रष्टाचार के एक मामले में कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया गया था और वे अभी भी पुलिस हिरासत में हैं। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सुमित रॉय उसी मामले में आरोपी हैं या किसी अलग प्रकरण में।
अभिषेक बनर्जी के घर पर छापेमारी
रॉय की तलाश में साल्बोनी पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और कोलकाता पुलिस की संयुक्त टीम ने दक्षिण कोलकाता के कालीघाट रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई तब की गई जब उस इलाके में रॉय का मोबाइल फोन ट्रैक किया गया।
TMC के भीतर से उठ रहे सवाल
तृणमूल कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा, जो हाल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार मानता है, उसने सुमित रॉय पर भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अहम कड़ी होने का आरोप लगाया है। TMC के निलंबित प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा कि रॉय की गिरफ्तारी से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं पर संकट आ सकता है। दत्ता ने यह भी आशंका जताई कि मौजूदा परिस्थितियों में रॉय की जान को खतरा हो सकता है।
आगे क्या होगा
कलकत्ता उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई की तारीख तय होना बाकी है। इस बीच पुलिस की तलाश जारी है और यह मामला TMC की आंतरिक राजनीति और पश्चिम बंगाल में भूमि भ्रष्टाचार के व्यापक मुद्दे से जुड़कर और संवेदनशील होता जा रहा है।