3 अगस्त 2026
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भर्ती घोटाला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के सचिव सुमित रॉय को दी अग्रिम जमानत, जमीन कब्जा मामले में राहत नहीं

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भर्ती घोटाला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के सचिव सुमित रॉय को दी अग्रिम जमानत, जमीन कब्जा मामले में राहत नहीं

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के सचिव सुमित रॉय को भर्ती घोटाले में राहत दी, लेकिन जमीन कब्जा मामले में नहीं। अदालत ने 10 दिनों में जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया — यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में गहरी पैठ बना चुके भर्ती घोटाले की एक और कड़ी है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के सचिव सुमित रॉय को कथित भर्ती घोटाले में अग्रिम जमानत दी।
सरकारी जमीन कब्जा मामले में सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
सुनवाई न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ के समक्ष हुई।
अदालत ने सुमित रॉय को 10 दिनों के भीतर जाँच अधिकारी के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया।
बचाव पक्ष ने कहा — किसी दस्तावेज पर सुमित रॉय के हस्ताक्षर नहीं; शिकायतकर्ताओं ने तीन वर्ष बाद नाम जोड़ा।
अभियोजन ने बैंक लेनदेन और गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए हिरासत पूछताछ की माँग की थी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को कथित भर्ती घोटाला मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के सचिव सुमित रॉय को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। हालाँकि, सरकारी जमीन कब्जे से जुड़े एक अलग मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। यह सुनवाई न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ के समक्ष हुई।

अदालत के निर्देश

अग्रिम जमानत देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुमित रॉय को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे 10 दिनों के भीतर संबंधित जाँच अधिकारी (IO) के सामने उपस्थित हों और जाँच में पूरा सहयोग प्रदान करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन कब्जा मामले में राहत नहीं दी जाएगी, क्योंकि उस मामले में वर्ष 2023 से आरोपपत्र दाखिल है और केस डायरी भी प्रस्तुत की जा चुकी है।

बचाव पक्ष की दलीलें

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सब्यसाची बनर्जी ने अदालत में तर्क दिया कि जाँच एजेंसी के पास मुख्य आरोपियों आशिक गाजी इमाम और सुजय हाजरा के साथ उनके किसी भी प्रकार के डिजिटल संचार का कोई साक्ष्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कथित भर्ती घोटाले से जुड़े किसी भी दस्तावेज, मेडिकल टेस्ट या भर्ती प्रक्रिया के अभिलेख पर सुमित रॉय के हस्ताक्षर अथवा नाम मौजूद नहीं है।

बचाव पक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि शिकायतकर्ताओं ने तीन वर्ष बाद उनका नाम इस मामले में जोड़ा है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यदि सुमित रॉय वास्तव में इतने प्रभावशाली होते, तो कथित रूप से पैसे लेने के बाद वे लोगों की नियुक्ति करवा सकते थे — परंतु ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है।

अभियोजन पक्ष के तर्क

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि जाँच में बैंक लेनदेन के साक्ष्य सामने आए हैं। अभियोजन के अनुसार, गवाहों के बयान और बैंक रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर वसूली गई रकम का एक हिस्सा विभिन्न आरोपियों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया। अन्य पीड़ितों ने अपने बयानों में कहा कि उन्होंने सुजय हाजरा और आशिक गाजी को पैसे दिए थे।

राज्य सरकार ने यह भी दलील दी कि यह मामला दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़ा गंभीर मामला है, इसलिए निष्पक्ष जाँच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

जमीन कब्जा मामले में राहत नहीं

सरकारी जमीन कब्जे से जुड़ा मामला वर्ष 2023 से लंबित है और इसमें आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। AAG मजूमदार ने स्पष्ट किया कि यह मामला एक अलग मौजा (भूमि क्षेत्र) से संबंधित है। इस मामले में अदालत ने सुमित रॉय को कोई राहत नहीं दी।

आगे क्या होगा

अग्रिम जमानत मिलने के बाद सुमित रॉय को 10 दिनों के भीतर जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य है। जमीन कब्जा मामले में उनकी कानूनी स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। यह मामला पश्चिम बंगाल में चल रही भर्ती घोटाले की व्यापक जाँच का हिस्सा है, जिसमें अनेक TMC नेताओं और उनसे जुड़े लोगों के नाम सामने आ चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला पश्चिम बंगाल के भर्ती घोटाले की उस बड़ी तस्वीर का हिस्सा है जहाँ नेताओं के करीबियों पर आरोप लगते हैं और कानूनी प्रक्रिया वर्षों तक चलती है। तीन वर्ष बाद नाम जोड़ने का बचाव पक्ष का तर्क अदालत ने भर्ती मामले में स्वीकार किया, लेकिन जमीन कब्जे में नहीं — यह विभाजन बताता है कि दोनों मामलों की साक्ष्य-शृंखला अलग-अलग स्तर की है। असली सवाल यह है कि क्या जाँच एजेंसी 10 दिनों की उपस्थिति की शर्त का उपयोग ठोस साक्ष्य जुटाने में कर पाएगी, या यह मामला भी लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ जाएगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुमित रॉय को कलकत्ता हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत क्यों मिली?
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने भर्ती घोटाला मामले में सुमित रॉय को अग्रिम जमानत दी, क्योंकि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि किसी भी दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और मुख्य आरोपियों से उनके डिजिटल संचार का कोई साक्ष्य नहीं है। अदालत ने उन्हें 10 दिनों में जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया।
सुमित रॉय कौन हैं और उनका TMC से क्या संबंध है?
सुमित रॉय तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के सचिव हैं। उन पर कथित भर्ती घोटाले और सरकारी जमीन कब्जे से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में आरोप लगे हैं।
जमीन कब्जा मामले में सुमित रॉय को राहत क्यों नहीं मिली?
सरकारी जमीन कब्जे का मामला वर्ष 2023 से लंबित है और इसमें आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। राज्य सरकार ने केस डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की, जिसके बाद अदालत ने इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
अभियोजन पक्ष के अनुसार इस मामले के मुख्य आरोपी आशिक गाजी इमाम और सुजय हाजरा हैं। पीड़ितों ने अपने बयानों में कहा है कि उन्होंने नौकरी दिलाने के नाम पर इन्हीं दोनों को पैसे दिए थे।
अब आगे क्या होगा — सुमित रॉय को क्या करना होगा?
अग्रिम जमानत की शर्त के अनुसार सुमित रॉय को 10 दिनों के भीतर जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जाँच में पूरा सहयोग देना होगा। जमीन कब्जा मामले में उनकी कानूनी स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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