श्रम शक्ति संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना मध्य प्रदेश, CM मोहन यादव ने ₹203 करोड़ संबल किश्त जारी की
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 24 अगस्त 2026 को घोषणा की कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ 'श्रम शक्ति संहिता' लागू की गई है। उन्होंने यह बात भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए प्रदेश के श्रमिकों को संबोधित करते हुए कही।
श्रम शक्ति संहिता और श्रम स्टार रेटिंग
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए 'श्रम स्टार रेटिंग' प्रणाली की शुरुआत भी की है। यह रेटिंग व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान में किसी भी स्तर पर कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा, 'श्रमिकों की सेवा, कल्याण और खुशी हमारे लिए सबसे पहले है।'
श्रमणा योजना: आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
सरकार ने श्रमिकों को सहकारिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'श्रमणा' योजना की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से श्रमिकों के हुनर को परिष्कृत कर उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश के श्रमिक ही विकसित प्रदेश की नींव रख रहे हैं।
संबल 2.0 योजना की 11वीं किश्त जारी
इस अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के अंतर्गत अनुग्रह सहायता राशि की 11वीं किश्त के रूप में ₹203 करोड़ की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की। यह किश्त रक्षाबंधन से पूर्व श्रावण के अंतिम सोमवार को जारी की गई।
1 करोड़ 84 लाख से अधिक श्रमिकों को मिला सहारा
मुख्यमंत्री ने बताया कि संबल योजना अब तक प्रदेश के 1 करोड़ 84 लाख से अधिक श्रमिकों को आर्थिक सहारा दे चुकी है। उन्होंने कहा कि घर चलाने वाले के असामयिक निधन, अचानक आर्थिक संकट या किसी भी विपत्ति में राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के साथ खड़ी रहेगी। यह योजना कठिन समय में श्रमिक परिवारों के लिए बड़ी राहत का स्रोत बनी है।
आगे की राह
श्रम शक्ति संहिता, श्रमणा योजना और संबल 2.0 के साथ मध्य प्रदेश सरकार श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में एक व्यापक ढाँचा तैयार कर रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नीतियाँ ज़मीनी स्तर पर श्रमिकों के जीवन में किस हद तक बदलाव ला पाती हैं।