24 अगस्त 2026
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स्किल है नई करेंसी, इनोवेशन है नई इकोनॉमी — CM मोहन यादव ने भोपाल कॉन्क्लेव में दिया नया मंत्र

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स्किल है नई करेंसी, इनोवेशन है नई इकोनॉमी — CM मोहन यादव ने भोपाल कॉन्क्लेव में दिया नया मंत्र

सारांश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में 'समृद्ध मध्यप्रदेश 2047' कॉन्क्लेव में कहा — स्किल नई करेंसी है, इनोवेशन नई इकोनॉमी। साथ ही केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाओं के ज़रिए जल प्रबंधन और राज्य के विकास का रोडमैप भी सामने रखा।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 24 अगस्त को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 'समृद्ध मध्यप्रदेश 2047' कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि स्किल नई करेंसी है और इनोवेशन नई इकोनॉमी ; संस्थानों को कौशल व नवाचार का केंद्र बनाना ज़रूरी।
केन-बेतवा लिंक परियोजना को मध्यप्रदेश की पहली ऐतिहासिक नदी जोड़ो परियोजना बताया।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से MP के 15 और राजस्थान के 15 जिलों को पर्याप्त जल मिलेगा।
'समृद्ध मध्यप्रदेश-2047' स्मारिका का विमोचन किया गया; केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों ने विशेषज्ञता पर प्रस्तुतियाँ दीं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 अगस्त 2026 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए कहा कि वर्तमान युग में स्किल नई करेंसी है और इनोवेशन नई इकोनॉमी'कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश 2047' विषयक इस कॉन्क्लेव में उन्होंने राज्य के केंद्रीय संस्थानों को कौशल, शोध, नवाचार और उद्यमिता का केंद्र बनाने पर बल दिया।

कॉन्क्लेव का उद्घाटन और मुख्य संदेश

मुख्यमंत्री यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया, जहाँ उन्हें नारियल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा 'वन इंस्टिट्यूट — वन प्रॉमिस' थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब राज्य आगे बढ़ेगा, तभी देश आगे बढ़ेगा और आज का समय स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का है।

केन-बेतवा और नदी जोड़ो परियोजनाएँ

मुख्यमंत्री यादव ने केन-बेतवा लिंक परियोजना को मध्यप्रदेश की पहली ऐतिहासिक नदी जोड़ो परियोजना बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से नदियों को जोड़कर जल का बेहतर प्रबंधन होगा, सिंचाई का क्षेत्र विस्तृत होगा, किसानों को पर्याप्त जल मिलेगा और बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।

इसी क्रम में पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना के माध्यम से मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल-विवाद का समाधान हुआ है। इस परियोजना से राजस्थान के 15 और मध्यप्रदेश के 15 जिलों को पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।

अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन दर्शन में राष्ट्रसेवा और अंत्योदय की भावना केंद्रीय थी। उन्होंने कामना व्यक्त की कि अटल बिहारी वाजपेयी संस्थान उनके विचारों और कार्यों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़े।

केंद्रीय संस्थानों की प्रस्तुतियाँ और स्मारिका विमोचन

इस अवसर पर मध्यप्रदेश के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों ने विशेषज्ञता, तकनीकी सहयोग एवं नवाचारों के प्रभावी उपयोग पर प्रस्तुतियाँ दीं। मुख्यमंत्री यादव ने 'समृद्ध मध्यप्रदेश-2047' स्मारिका का विमोचन भी किया। यह कॉन्क्लेव 2047 तक मध्यप्रदेश को एक समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में केंद्रीय संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि मध्यप्रदेश के केंद्रीय संस्थान इस दर्शन को ज़मीन पर कितना उतार पाए हैं। राज्य में कौशल विकास के आँकड़े अभी भी राष्ट्रीय औसत से पीछे हैं, और ऐसे कॉन्क्लेव की सफलता उनके घोषणापत्र नहीं, बल्कि क्रियान्वयन रिपोर्ट से आँकी जानी चाहिए। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाएँ दशकों पुराने जल-विवादों का समाधान हैं — यह राजनीतिक इच्छाशक्ति की उपलब्धि है, लेकिन इनके पर्यावरणीय प्रभाव और विस्थापित समुदायों के पुनर्वास पर चर्चा अभी भी अधूरी है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'समृद्ध मध्यप्रदेश 2047' कॉन्क्लेव क्या है?
यह भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव है, जिसका विषय केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों का मध्यप्रदेश के विकास में योगदान है। इसे अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ने 'वन इंस्टिट्यूट — वन प्रॉमिस' थीम पर आयोजित किया।
CM मोहन यादव ने 'स्किल नई करेंसी' से क्या तात्पर्य दिया?
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में कौशल (स्किल) ही व्यक्ति और राज्य की असली पूँजी है, और नवाचार (इनोवेशन) ही नई अर्थव्यवस्था की नींव है। उन्होंने संस्थानों से आग्रह किया कि वे कौशल, शोध और उद्यमिता के केंद्र बनें।
केन-बेतवा लिंक परियोजना क्या है और इसका क्या महत्व है?
केन-बेतवा लिंक परियोजना मध्यप्रदेश की पहली ऐतिहासिक नदी जोड़ो परियोजना है। इससे जल प्रबंधन बेहतर होगा, सिंचाई का क्षेत्र बढ़ेगा, किसानों को पर्याप्त जल मिलेगा और बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकेगा।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से किन्हें फायदा होगा?
इस परियोजना से मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से चला आ रहा जल-विवाद सुलझा है। इससे राजस्थान के 15 और मध्यप्रदेश के 15 जिलों को पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।
अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान की इस कॉन्क्लेव में क्या भूमिका थी?
इस संस्थान ने 'वन इंस्टिट्यूट — वन प्रॉमिस' थीम पर कॉन्क्लेव का आयोजन किया। CM यादव ने कहा कि संस्थान को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रसेवा और अंत्योदय के विचारों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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