मध्य प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को बढ़ावा, CM मोहन यादव बोले — विकास और प्रकृति का संतुलन जरूरी

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मध्य प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को बढ़ावा, CM मोहन यादव बोले — विकास और प्रकृति का संतुलन जरूरी

सारांश

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार में विकास और प्रकृति के संतुलन का आह्वान किया। राज्य जल संरक्षण में देश में पहले स्थान पर है और प्राचीन भारतीय स्थापत्य ज्ञान को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने की पहल की जा रही है।

Key Takeaways

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 मई 2026 को भोपाल में इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग का उद्घाटन किया। राज्य में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में प्राथमिकता दी जा रही है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर; खंडवा पहले और बड़वानी दूसरे स्थान पर। गुढ़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक जल संवर्धन अभियान के तहत कुओं, बावड़ियों का जीर्णोद्धार जारी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने हड़प्पा सभ्यता और अंकोरवाट को टिकाऊ निर्माण के आदर्श उदाहरण बताया।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 मई 2026 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हाल में कहा कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि सरकारी राशि का सदुपयोग हो और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो। यह बात उन्होंने इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग और ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आयोजित अखिल भारतीय सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर कही।

प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा से प्रेरणा

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि भारत की प्राचीन निर्माण परंपरा आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने राजा भोज का उल्लेख करते हुए कहा कि भोज पत्रों पर दर्ज निर्माण ज्ञान हमें अद्भुत धरोहर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा संसार पंचतत्वों से बना है और पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है, जो प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है।

उन्होंने इंदौर के निकट स्थित मांडव महल को स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जहाँ मध्य में निर्मित तालाब से मंदिर की दूसरी मंजिल तक शीतलता बनी रहती है। इसी प्रकार तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी प्राचीन स्थापत्य कला के अद्भुत नमूने देखने को मिलते हैं।

भोपाल का बड़ा तालाब और उज्जैन की शिप्रा — टिकाऊ निर्माण के मॉडल

भोपाल के बड़े तालाब के निर्माण की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें मुख्यधारा को बंद किए बिना जल राशि को नियंत्रित करने की अद्भुत तकनीक अपनाई गई थी। इसी तरह उज्जैन में शिप्रा नदी के प्रवाह के अनुरूप मंदिर और देवस्थान स्थापित किए गए हैं, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य का जीवंत प्रमाण हैं।

यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा है। उनके अनुसार, आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें।

जल संरक्षण में मध्य प्रदेश अव्वल

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने गुढ़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक जल संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत प्रदेशभर में कुओं, बावड़ियों और जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है, जिसमें खंडवा जिले को पहला और बड़वानी को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।

ग्लोबल वॉर्मिंग को एक गंभीर चुनौती बताते हुए यादव ने कहा कि सरकार ने हर वर्ष जल संरचनाओं पर कार्य करने का संकल्प लिया है।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की बात

कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए प्राचीन भारतीय तकनीक को आधार बनाया जा रहा है। उन्होंने हड़प्पा सभ्यता और अंकोरवाट के मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन निर्माण में प्रकृति के साथ संतुलन और भावी पीढ़ियों के हित का विशेष ध्यान रखा जाता था।

आगे क्या

मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। ग्रीन बिल्डिंग मानकों को सरकारी परियोजनाओं में अनिवार्य बनाने की दिशा में नीतिगत कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा नीतिगत घोषणाओं को ज़मीनी क्रियान्वयन में बदलने की होगी। प्राचीन स्थापत्य उदाहरणों का उल्लेख प्रेरणादायक है, परंतु सरकारी भवनों में ग्रीन रेटिंग अनिवार्य करने जैसे ठोस कदमों का अभाव अभी भी दिखता है। जल संरक्षण में राष्ट्रीय प्रथम स्थान एक सकारात्मक संकेत है, किंतु शहरीकरण की रफ़्तार के बीच यह बढ़त टिकाऊ तभी होगी जब निर्माण नीति में पर्यावरण मानकों को कानूनी बाध्यता दी जाए।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

मध्यप्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक क्या है और इसे क्यों अपनाया जा रहा है?
ग्रीन बिल्डिंग तकनीक ऐसी निर्माण पद्धति है जिसमें ऊर्जा, जल और सामग्री का कुशल उपयोग होता है और पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, राज्य इसे इसलिए अपना रहा है ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में सरकारी राशि का सदुपयोग हो और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग कहाँ और कब हुई?
यह बैठक 2 मई 2026 को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हाल में आयोजित हुई। इसके साथ ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर एक अखिल भारतीय सेमिनार भी आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री यादव ने किया।
मध्यप्रदेश का जल संवर्धन अभियान क्या है?
राज्य सरकार ने गुढ़ी पड़वा से गंगा दशहरा तक जल संवर्धन अभियान शुरू किया है, जिसके तहत प्रदेशभर में कुओं, बावड़ियों और जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इस अभियान के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश में प्रथम स्थान पर पहुँचा है।
जल संरक्षण में मध्यप्रदेश के कौन से जिले अव्वल रहे?
जल संरक्षण कार्यों में खंडवा जिले को प्रथम और बड़वानी जिले को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल सेमिनार में दी।
प्राचीन भारतीय स्थापत्य को आधुनिक निर्माण से क्यों जोड़ा जा रहा है?
मुख्यमंत्री यादव और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह दोनों का मानना है कि हड़प्पा सभ्यता, मांडव महल और अंकोरवाट जैसे प्राचीन निर्माण प्रकृति के साथ संतुलन के आदर्श उदाहरण हैं। इनसे प्रेरणा लेकर टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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