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मध्य प्रदेश में कुवैत की जबेदी कंपनी करेगी ₹7,430 करोड़ का निवेश, मत्स्य उद्योग नीति-2026 के तहत समझौता

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मध्य प्रदेश में कुवैत की जबेदी कंपनी करेगी ₹7,430 करोड़ का निवेश, मत्स्य उद्योग नीति-2026 के तहत समझौता

सारांश

कुवैत की जबेदी अल कुवैत फिशरीज और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच ₹7,430 करोड़ के बाय-बैक एग्रीमेंट ने मध्य प्रदेश के मत्स्य पालन को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर ला खड़ा किया है। इंदिरा सागर से बारना तक चार बड़े जलाशयों में केज कल्चर और निर्यातोन्मुखी इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा — यह राज्य की मत्स्योद्योग नीति-2026 का पहला बड़ा विदेशी दांव है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में 6 जुलाई 2026 को भोपाल में ₹7,430 करोड़ के निवेश एवं बाय-बैक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए।
करार जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी (कुवैत) और कामदार्स केयर (इंदौर) के बीच संपन्न हुआ।
निवेश से इंदिरा सागर , बरगी , बाणसागर और बारना जलाशयों में केज कल्चर व आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा।
यह समझौता मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत हुआ है, जो विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रावधान करती है।
बाय-बैक व्यवस्था से स्थानीय मछुआरा समुदाय को निर्यात बाज़ार तक सीधी पहुँच मिलने की संभावना है।

मध्य प्रदेश के मत्स्य पालन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। 6 जुलाई 2026 को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में, मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में कुवैत की अग्रणी मत्स्य कंपनी जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच ₹7,430 करोड़ के निवेश एवं बाय-बैक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। यह करार मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के अंतर्गत संपन्न हुआ है।

समझौते में क्या शामिल है

अनुबंध के अनुसार, ₹7,430 करोड़ के अनुमानित निवेश से इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशय में केज कल्चर सहित बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना आधुनिक, निर्यातोन्मुखी और मूल्य संवर्धन आधारित मत्स्य उद्योग के विकास पर केंद्रित है।

मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के तहत राज्य में निजी एवं विदेशी निवेश आकर्षित करने का स्पष्ट प्रावधान है। यह समझौता उसी नीतिगत ढाँचे का व्यावहारिक परिणाम है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

हस्ताक्षर समारोह के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, 'मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन विकास के लिए पर्याप्त जलसंरचनाओं के भंडार हैं। इससे देश की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।' उन्होंने आगे कहा कि कुवैत एक मित्र देश है और प्रदेश में विदेशी निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार पूर्ण समर्पण के साथ कार्यरत है।

यादव ने यह भी रेखांकित किया कि किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी आय-वर्धक गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के तालाबों और जलाशयों के बेहतर प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मछुआरा समुदाय पर असर

मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश का मछुआरा समुदाय मछली पालन के ज़रिए ही अपनी आजीविका चलाता है। इस निवेश से उन्हें आधुनिक तकनीक, बेहतर बाज़ार संपर्क और निर्यात के अवसर मिलने की संभावना है। बाय-बैक एग्रीमेंट की व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि उत्पादन का एक निश्चित हिस्सा कुवैत की कंपनी द्वारा वापस खरीदा जाएगा, जिससे स्थानीय मछुआरों को बाज़ार की अनिश्चितता से राहत मिल सकती है।

नीतिगत संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश, जो परंपरागत रूप से कृषि-प्रधान राज्य रहा है, अब मत्स्य पालन को एक समानांतर आर्थिक स्तंभ के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रहा है। मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 इसी रणनीति का हिस्सा है, जो घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाज़ार में प्रदेश की उपस्थिति दर्ज कराने पर केंद्रित है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार भी ब्लू इकोनॉमी और मत्स्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत प्रोत्साहन दे रही है। आने वाले समय में इस निवेश के क्रियान्वयन की गति और जलाशय-स्तरीय बुनियादी ढाँचे के विकास पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

430 करोड़ का यह समझौता कागज़ पर प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — मध्य प्रदेश में बड़े निवेश समझौतों की घोषणाएँ पहले भी होती रही हैं, जिनकी ज़मीनी रफ्तार अपेक्षाओं से पीछे रही। बाय-बैक एग्रीमेंट की शर्तें और मछुआरा समुदाय को मिलने वाले वास्तविक लाभ का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है — यह पारदर्शिता की कमी चिंताजनक है। इंदिरा सागर और बरगी जैसे बड़े जलाशयों में केज कल्चर पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी संवेदनशील विषय है, जिस पर नीति में स्पष्टता ज़रूरी होगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में कुवैत की कंपनी कितने करोड़ का निवेश करेगी?
कुवैत की जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी और इंदौर की कामदार्स केयर के बीच ₹7,430 करोड़ के निवेश एवं बाय-बैक एग्रीमेंट पर 6 जुलाई 2026 को हस्ताक्षर हुए। यह करार मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के अंतर्गत संपन्न हुआ है।
मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार की एक नीतिगत पहल है जिसका उद्देश्य राज्य में आधुनिक, निर्यातोन्मुखी और मूल्य संवर्धन आधारित मत्स्य उद्योग विकसित करना है। इस नीति के तहत निजी एवं विदेशी निवेश आकर्षित करने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
इस निवेश से किन जलाशयों में काम होगा?
अनुबंध के अनुसार इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में केज कल्चर सहित बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। ये चारों मध्य प्रदेश के प्रमुख जलाशय हैं।
बाय-बैक एग्रीमेंट से मछुआरों को क्या फायदा होगा?
बाय-बैक एग्रीमेंट की व्यवस्था के तहत उत्पादित मछली का एक हिस्सा कुवैत की कंपनी द्वारा वापस खरीदा जाएगा, जिससे स्थानीय मछुआरा समुदाय को निर्यात बाज़ार तक पहुँच और बाज़ार की अनिश्चितता से राहत मिलने की संभावना है। हालाँकि समझौते की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस समझौते पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में मत्स्य पालन विकास के लिए पर्याप्त जलसंरचनाओं के भंडार हैं और इससे देश की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि कुवैत एक मित्र देश है और राज्य सरकार विदेशी निवेश को धरातल पर उतारने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्यरत है।
राष्ट्र प्रेस
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