मध्य प्रदेश: 27,000 मजदूर परिवारों को ₹600 करोड़ ट्रांसफर, 'श्रम स्टार रेटिंग' से फैक्ट्रियों की जवाबदेही तय

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मध्य प्रदेश: 27,000 मजदूर परिवारों को ₹600 करोड़ ट्रांसफर, 'श्रम स्टार रेटिंग' से फैक्ट्रियों की जवाबदेही तय

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने एक ही दिन में दो बड़े कदम उठाए — 27,000 मजदूर परिवारों को ₹600 करोड़ सीधे खाते में और 'श्रम स्टार रेटिंग' से फैक्ट्रियों को जवाबदेह बनाने की नई व्यवस्था। सबसे अहम: गिग वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया।

Key Takeaways

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 अप्रैल 2026 को 27,000 से अधिक मजदूर परिवारों के खातों में ₹600 करोड़ सीधे ट्रांसफर किए। 3,529 गिग वर्कर्स को पहली बार संबल योजना के तहत सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेगा — मध्य प्रदेश में यह पहली बार हुआ। नई 'श्रम स्टार रेटिंग प्रणाली' के तहत अब तक 554 कारखाने स्वेच्छा से जुड़ चुके हैं। 2018 से अब तक 1.8 करोड़ से अधिक मजदूर पंजीकृत; कुल ₹7,720 करोड़ से अधिक वितरित। बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर और खरगोन जिलों को योजना क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सराहा गया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 अप्रैल 2026 को भोपाल में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में 'मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना' के तहत 27,000 से अधिक मजदूर परिवारों के बैंक खातों में सिंगल-क्लिक डिजिटल माध्यम से ₹600 करोड़ की अनुग्रह राशि सीधे ट्रांसफर की। इसके साथ ही उन्होंने एक अनूठी 'श्रम स्टार रेटिंग प्रणाली' की शुरुआत की, जो औद्योगिक संस्थानों का मूल्यांकन श्रम कानूनों के पालन और कर्मचारी स्वास्थ्य-सुरक्षा के आधार पर करेगी।

संबल योजना: क्या मिला मजदूरों को

मुख्यमंत्री यादव ने एक ही क्लिक में ₹600 करोड़ की राशि 27,000 से अधिक मजदूर परिवारों के खातों में भेजी। यह राशि संगठित और असंगठित, दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों के कल्याण के लिए आवंटित की गई है। श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने बताया कि 2018 में इस योजना की शुरुआत के बाद से अब तक 1.8 करोड़ से अधिक मजदूरों का पंजीकरण हो चुका है और कुल ₹7,720 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।

गिग वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा का दायरा

संबल योजना का एक महत्वपूर्ण विस्तार करते हुए मुख्यमंत्री ने 'गिग वर्कर्स' और 'प्लेटफॉर्म वर्कर्स' को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की — जो मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है। यादव ने बताया कि 3,529 गिग वर्कर्स, जो आधुनिक डिलीवरी और सेवा अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं, अब सामाजिक सुरक्षा लाभ पाने के हकदार हो गए हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि असंगठित क्षेत्र के हर पात्र मजदूर का पंजीकरण सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है।

श्रम स्टार रेटिंग: फैक्ट्रियों की नैतिक जवाबदेही

नई 'श्रम स्टार रेटिंग प्रणाली' औद्योगिक संस्थानों को श्रम कानूनों के अनुपालन और कर्मचारियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर रेटिंग देगी। अब तक 554 कारखानों ने स्वेच्छा से इस प्रणाली को अपनाया है। यादव ने नागरिकों और मजदूर संगठनों से अपील की कि वे अच्छी 'श्रम रेटिंग' वाले संस्थानों के उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता दें, ताकि बाज़ार में नैतिक रोज़गार प्रथाओं के लिए एक स्वाभाविक प्रोत्साहन तैयार हो सके।

उत्कृष्ट जिले और आगे की राह

बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर और खरगोन जिलों को कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सराहा गया। राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम संहिताओं के अनुरूप अपने नियमों को ढालने की तैयारी भी कर रही है, जिससे मजदूरों के अधिकारों को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गिग इकॉनमी तेज़ी से बढ़ रही है और असंगठित श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा एक राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुकी है। आने वाले महीनों में इस योजना का विस्तार और पंजीकरण अभियान श्रम विभाग की प्राथमिकता रहेगी।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि 1.8 करोड़ पंजीकृत मजदूरों में से केवल 27,000 परिवारों तक यह राशि क्यों पहुँची — यानी पंजीकृत आबादी का एक अत्यंत छोटा हिस्सा। 'श्रम स्टार रेटिंग' की अवधारणा नवाचारी है, परंतु स्वैच्छिक भागीदारी पर आधारित कोई भी प्रणाली तब तक सीमित असर ही डालती है जब तक उसे नीतिगत प्रोत्साहन या खरीद नीति से नहीं जोड़ा जाता। गिग वर्कर्स को शामिल करना एक ऐतिहासिक कदम है, लेकिन 3,529 की संख्या राज्य की विशाल गिग इकॉनमी के सामने नगण्य है — क्रियान्वयन की गति और पंजीकरण की सरलता ही इसकी असली परीक्षा होगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार की एक कल्याणकारी योजना है जो संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा और अनुग्रह राशि प्रदान करती है। 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 1.8 करोड़ से अधिक मजदूर पंजीकृत हो चुके हैं और ₹7,720 करोड़ से अधिक वितरित किए जा चुके हैं।
गिग वर्कर्स को संबल योजना में कब और कैसे शामिल किया गया?
29 अप्रैल 2026 को भोपाल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को इस योजना में शामिल करने की घोषणा की। फिलहाल 3,529 गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलने के पात्र घोषित किया गया है।
श्रम स्टार रेटिंग प्रणाली कैसे काम करती है?
यह प्रणाली औद्योगिक संस्थानों का मूल्यांकन श्रम कानूनों के अनुपालन और कर्मचारियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा मानकों के आधार पर करती है। अब तक 554 कारखाने स्वेच्छा से इसमें शामिल हो चुके हैं और उद्देश्य है कि उपभोक्ता अच्छी रेटिंग वाले संस्थानों को प्राथमिकता दें।
इस योजना से किन जिलों को सबसे ज़्यादा फायदा हुआ?
बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर और खरगोन जिलों को कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सराहा गया। ये जिले पंजीकरण और लाभ वितरण दोनों मामलों में अग्रणी रहे।
केंद्र के चार श्रम संहिताओं से मध्य प्रदेश के मजदूरों पर क्या असर पड़ेगा?
राज्य सरकार केंद्र सरकार के चार नए श्रम संहिताओं के अनुरूप अपने नियमों को ढाल रही है, जिससे मजदूरों के अधिकार और अधिक सुव्यवस्थित होंगे। इससे वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़े नियम एकीकृत होंगे।
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