दिशा सालियान मौत मामले में CBI ने माँगी न्यायिक निगरानी, 18 नवंबर को होगी सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने दिशा सालियान मौत मामले की जाँच पर अदालत की निगरानी की माँग करते हुए याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। मुंबई की यह बहुचर्चित कानूनी लड़ाई उस मामले से जुड़ी है जिसमें छह साल बाद भी जाँच पूरी नहीं हो पाई है।
मुख्य घटनाक्रम
मामले में वकील नीलेश ओझा ने अदालत में दलील दी कि तीन अहम गवाहों के बयान तय 60 दिनों की समयसीमा के भीतर दर्ज नहीं किए गए। ओझा ने यह भी दावा किया कि आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली से जुड़े मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड और अन्य जानकारियाँ अदालत में जमा कराई गई हैं। हालाँकि, दो अधिकारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया कथित तौर पर अभी भी अधूरी है।
दिशा सालियान कौन थीं और क्या था मामला
दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं, जो दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर भी रह चुकी थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की थी और प्रारंभिक जाँच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था।
गौरतलब है कि दिशा की मौत के महज छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित घर में मृत पाए गए थे। दोनों मौतों के बीच कम समय के अंतर के कारण कई सवाल उठे थे, हालाँकि दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
परिवार के आरोप और हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
दिशा के पिता सतीश सालियान ने बेटी की मौत की जाँच पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि उनकी बेटी के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और फिर उसकी हत्या की गई। उन्होंने साक्ष्य दबाने और जाँच में लापरवाही के आरोप भी लगाए थे। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर स्वतंत्र जाँच की माँग की थी।
दिशा की मौत के करीब छह साल बाद 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में अहम आदेश दिया। कोर्ट ने CBI को मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जाँच करने, सतीश सालियान का बयान दर्ज करने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद CBI ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू की।
जाँच में देरी और न्यायिक निगरानी की ज़रूरत
वकील नीलेश ओझा का तर्क है कि दिशा की मौत को छह साल बीत जाने के बाद भी कुछ अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं, जिससे जाँच की गति और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब CBI पर पहले से ही जाँच में तेज़ी लाने का दबाव है। न्यायिक निगरानी की माँग यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि जाँच प्रक्रिया समयबद्ध और जवाबदेह बनी रहे।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होनी है, जिसमें CBI की न्यायिक निगरानी याचिका पर अदालत का रुख स्पष्ट होगा। यह सुनवाई इस मामले की आगामी दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।