भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट: PM मोदी पहुंचे 'टीम यूरोप' पवेलियन, EU राजदूत ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट का विधिवत उद्घाटन किया और 'टीम यूरोप' पवेलियन का दौरा किया। यूरोपीय संघ (EU) के राजदूत जीन-एरिक पाक्वेट ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति को 'सम्मान की बात' बताते हुए भारत-EU स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी की सराहना की। दोनों पक्षों ने नवीकरणीय ऊर्जा में नवाचार और नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर बल दिया।
समिट का स्वरूप और उद्देश्य
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो का आयोजन 2 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है। इस आयोजन में दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियाँ, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। समिट का मुख्य उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई गति देना है।
EU राजदूत की प्रतिक्रिया
राजदूत जीन-एरिक पाक्वेट ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीरें और एक क्लिप साझा करते हुए लिखा, 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के साथ साझेदारी करना खुशी की बात है।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस विचार का भी उल्लेख किया जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार और साहसिक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। पाक्वेट ने कहा, 'भारत और यूरोपीय संघ की स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी इसी दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी का टीम यूरोप पवेलियन पहुँचना हमारे लिए सम्मान की बात रही।'
भारत-EU साझेदारी की पृष्ठभूमि
भारत और यूरोपीय संघ के बीच स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी की नींव वर्ष 2016 में रखी गई थी। इस ढाँचे के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, स्मार्ट ग्रिड, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग जारी है। गौरतलब है कि यह साझेदारी ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो गई है जब भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा माँग को पूरा करते हुए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने के अपने लक्ष्यों पर तेज़ी से काम कर रहा है।
रणनीतिक महत्व
यूरोपीय संघ के लिए भारत नवीकरणीय ऊर्जा के एक बड़े बाज़ार और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक में सहयोग के एक अहम साझेदार के रूप में उभरा है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों पक्षों का यह सहयोग निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान और जलवायु लक्ष्यों की दिशा में काम आने वाले प्रयासों को नई रफ़्तार दे सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तेज़ हो रही है और भारत इसमें एक केंद्रीय भूमिका निभाने की स्थिति में है।
आगे की राह
समिट के दौरान होने वाली चर्चाएँ और समझौते भारत-EU संबंधों में स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को एक ठोस रूप दे सकते हैं। समिट 5 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा, जिसमें आने वाले दिनों में और अधिक द्विपक्षीय बैठकों और घोषणाओं की संभावना है।